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2 भाइयों समेत 3 बच्चों की डूबने से मौत:1 को ग्रामीणों ने बचाया; पैर फिसलने से डिग्गी में गिरा लड़का, बचाने उतरे थे साथी

1 month ago

हनुमानगढ़ जिले में कुंभाराम आर्य लिफ्ट कैनाल से जुड़ी पानी की डिग्गी में डूबने से 3 बच्चों की मौत हो गई। 1 बच्चे को ग्रामीणों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। मरने वालों में 2 सगे भाई शामिल है। जानकारी के अनुसार, पैर फिसलने से 1 बच्चा डिग्गी में गिर गया था। उसे बचाने के लिए बाकी तीनों भी पानी में कूद गए। गहरे पानी और बाहर निकलने का रास्ता नहीं होने के कारण 3 बच्चे डूब गए। बच्चों के डूबने की जानकारी मिलने पर ग्रामीण दौड़कर आए और 1 बच्चे को सुरक्षित निकाल लिया। ग्रामीण 3 बच्चों को ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। हादसा रावतसर थाना इलाके के बरमसर गांव में हुआ। मृतक बच्चों के परिजनों से मिले एसपी सूचना मिलने पर एसपी बी आदित्य रावतसर हॉस्पिटल पहुंचे और हादसे की जानकारी ली। सकुशल बाहर निकाले गए बच्चे से भी एसपी ने मुलाकात की और मृतकों के परिजनों से भी मिले। इस दौरान रावतसर सीओ विक्रम चौहान और थानाधिकारी अजय कुमार उनके साथ मौजूद थे। पैर फिसलने से गिरा 1 बच्चा, 3 बचाने के लिए कूदे एसपी बी. आदित्य ने बताया- बरमसर गांव के 4 बच्चे रामचन्द्र (14) पुत्र सीताराम गोस्वामी, बजरंग (18), उसका भाई कंवरपाल (15) पुत्र श्योनारायण गोस्वामी और सुनील (14) पुत्र जयपाल गोस्वामी रविवार शाम को करीब 4 बजे भेड़ चराने गए थे। इसी दौरान वे कुंभाराम आर्य लिफ्ट कैनाल से जुड़ी बीएसआर-11 की सिंचाई वाली पानी की डिग्गी के किनारे पहुंच गए। इस दौरान पैर फिसलने से 1 बच्चा पानी में गिर गया। उसे बचाने के लिए बाकी 3 बच्चे भी डिग्गी में कूद पड़े। हादसे की जानकारी मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और रामचंद्र को सुरक्षित निकाल लिया। ग्रामीणों ने बजरंग, सुनील और कंवरपाल को पानी से निकाला और गंभीर हालत में रावतसर के ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। 7 बहनों का इकलौता भाई था सुनील रावतसर थानाधिकारी अजय कुमार ने बताया- हादसे में जान गंवाने वाले बजरंग और कंवरपाल सगे भाई थे। अब परिवार में 3 बहनें रह गई हैं। सुनील 7 बहनों का इकलौता भाई था। गांव में 3 किशोरों की मौत के बाद गांव में मातम पसर गया। डिग्गी के आसपास सुरक्षा इंतजाम नहीं 3 बच्चों की मौत के बाद डिग्गी के आसपास सुरक्षा इंतजाम नहीं होने का मुद्दा एक बार फिर उठा है। जिले में खेतों की खुली डिग्गियों में डूबने की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को चराने के लिए भेजा जाता है, लेकिन पानी के बड़े टैंकों के किनारे कोई बाड़ या चेतावनी बोर्ड नहीं होते, जिससे हादसे होते रहते हैं।
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