slndigital.in

5.05 करोड़ से बनेगा पीबीएम का सेन्ट्रल ड्रग वेयरहाउस:डीएमएफटी की गवर्निंग काउंसिल ने दी बजट को हरी झंडी, सरकार से वित्तीय स्वीकृति का इंतजार

2 weeks ago

संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली निशुल्क दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने और उनके सुरक्षित भंडारण के लिए एक बड़ी राहत सामने आई है। अस्पताल परिसर में 5.05 करोड़ रुपये की लागत से नया और आधुनिक सेन्ट्रल ड्रग वेयरहाउस तैयार किया जाएगा। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित डीएमएफटी (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउण्डेशन ट्रस्ट) गवर्निंग काउंसिल की बैठक में इस बजट को हरी झंडी दे दी गई है। वर्तमान में यह प्रस्ताव राज्य सरकार के वित्त (बजट) विभाग, जयपुर को अंतिम प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति के लिए भेजा गया है। बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद से अतिशीध्र वित्तीय स्वीकृत दिलाने का अनुरोध भी मेडिकल कालेज प्रशासन ने किया है। दरअसल पीबीएम के लिए अलग से बना वेयरहाउस काफी छोटा है, जिससे दवाओं का उचित रखरखाव करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। ड्रग वेयरहाउस प्रभारी डॉ. शिव शंकर झंवर ने बताया कि नए वेयरहाउस के लिए पास में ही जगह चिह्नित कर ली गई है। इसके बनने के बाद दवाओं के स्टॉक और भंडारण में कोई परेशानी नहीं होगी। वित्तीय मंजूरी मिलते ही निर्माण एजेंसी और तखमीना (एस्टिमेट) तैयार किया जाएगा।वेयरहाउस बनने से दवाओं की गुणवत्ता और कोल्ड चेन बरकरार रहेगी, दवाइयों का सुव्यवस्थित रखरखाव होगा, सब-स्टोर्स और डीडीसी सेंटरों तक दवाओं का वितरण सुगम होगा, जिससे मरीजों को काउंटर पर दवा की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। ड्रग वेयरहाउस के लिए जगह चिह्नित की जा चुकी है। डीएमएफटी से बजट स्वीकृत हो चुका है और अंतिम वित्तीय स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखा गया है। डॉ. सुरेंद्र वर्मा, प्रिंसिपल, एसपीएमसी क्यों जरूरी है नया वेयरहाउस? 1: स्टॉक और जगह की भारी कमी: राज्य सरकार द्वारा कुल 1,822 प्रकार की दवाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इनमें से पीबीएम अस्पताल में लगभग 1,500 तरह की दवाओं की नियमित आवश्यकता रहती है, जबकि वर्तमान में केवल 1,349 तरह की दवाएं ही उपलब्ध हैं। इस तरह 151 दवाओं की कमी बनी रहती है। नियमानुसार वेयरहाउस में 4 महीने का एडवांस स्टॉक रखना अनिवार्य है, जिसके तहत हर समय लगभग 50 से 60 लाख दवाओं का भंडारण रहता है। पुराना भवन छोटा होने के कारण दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा था। 2: कोल्ड चेन मेंटेन न होना और धूल की समस्या: स्थान के अभाव के कारण दवाओं की कोल्ड चेन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। अस्पताल के तीनों सब-स्टोर पुराने और जर्जर भवनों में चल रहे हैं। इनमें से जिरिएट्रिक क्लिनिक में संचालित स्टोर की खिड़कियां टूटी होने के कारण खुली दवाओं पर धूल जमती है 3: उपकरणों की खराबी व संसाधनों का अभाव: पुराने स्टोर में एसी नहीं हैं और डीप फ्रीजर भी अक्सर खराब रहते हैं। इसके अलावा, 28 में से 8 दवा वितरण केंद्रों पर रेफ्रिजरेटर/फ्रीज की उचित व्यवस्था न होने से तापमान-संवेदनशील दवाओं की कोल्ड चेन टूट जाती है। 4: निरीक्षण में उजागर हुई खामी: प्रसूताओं की मौतों के मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव और जोधपुर मेडिकल कॉलेज के जांच दल के निरीक्षण के दौरान भी दवाओं की कोल्ड चेन मेंटेन न होने की गंभीर बात सामने आई थी।
Click here to Read More
Previous Article
नगर निगम जमादार नरेश कुमार पंवार बने 'पब्लिक के स्टार':ग्लास फैक्ट्री रोड पर बंद रोड लाइट हुई ठीक, लोगों को राहत
Next Article
हर स्कूल को मिलेंगे 37500 रुपए:उदयपुर-सलूंबर के 30 पीएमश्री स्कूलों की बाल वाटिकाओं के लिए 11 लाख जारी

Related Rajasthan Updates:

Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

Comments (0)

    Leave a comment