slndigital.in

बाड़ाबंदी में फूल पार्टी की 'पूल-पार्टी':डांसर के साथ पूर्व सरपंच का 'गमछा-डांस'; हनुमान बेनीवाल के 'नागनाथ-सांपनाथ'

1 month ago

नमस्कार, प्रशिक्षण शिविर के नाम पर प्रत्याशी जिस पिकनिक पर निकले हैं उसे बाड़ाबंदी कहा जा रहा है। इस दौरान कहीं पूल पार्टी और दाल-बाटी का आनंद लिया गया और कहीं मंदिर में भजन किए गए। टोंक में महिला डांसर के साथ पूर्व सरपंच का ‘गमछा डांस’ सामने आया और चुनाव के दौरान दिग्गजों ने लगाया पूरा दम। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. बाड़ेबंदी में दाल-बाटी, भजन और पूल पार्टी किसी जमाने में बाड़े में पशुओं को रखा जाता था। अब नेताओं को रखा जाता है। लेकिन बाड़ाबंदी में रखने की क्या जरूरत? जरूरत है। क्योंकि नेताजी के भाव चीनी से भी तेज चल रहे हैं। बोर्ड बनाने के लिए खरीद-बिक्री हो सकती है। ऐसे में जो प्रत्याशी बचा गया वही सिकंदर। बाड़े में भी कैडर के हिसाब से रखा जा रहा है। कहीं प्रत्याशियों को शानदार रिजॉर्ट में रखा गया है और कहीं कम बजट वालों ने प्रत्याशियों को मंदिर में रख छोड़ा। जो रिसोर्ट जा रहे थे उनके नखरे भी अलग। बस में बैठते ही उन्हें गर्मी लगने लगी। ऑर्डर हुआ- भैया AC ऑन कर दो। रिसॉर्ट पहुंचकर पुरुष प्रत्याशियों ने पूल में छलांग लगा दी। खूब नहाए। चुनाव की गर्मी उतारी। पूल में नारेबाजी भी कर दी। नहा-धोकर रेडी हुए तो गरमा-गरम दाल और नरमा-नरम बाटियां पेश हो गई। जो बेचारे मंदिर में ठहरे थे, वे बैठकर भजन करने लगे। किसी ने इकतारा संभाल लिया तो किसी ने झांझ। दस दिन ठहरने का इंतजाम किया गया है। ऐसे में कुछ महिला प्रत्याशी बच्चों को लेकर पहुंच गईं। एकाध ने सास को साथ ले लिया। जयपुर में महिला प्रत्याशी से पूछा कहां जा रही हैं? जवाब दिया प्रशिक्षण शिविर में। काहे का प्रशिक्षण और काहे का शिविर। इसी बस में सवार होने जा रही दूसरी महिला प्रत्याशी ने बेधड़क कहा- बाड़ाबंदी में जा रहे हैं। पाली में रवाना होती बस की खिड़की से झांककर एक प्रत्याशी ने ‘विक्ट्री साइन’ दिखा दिया। 2. पूर्व सरपंच और परिवहन निरीक्षक का डांस टोंक के एक नेताजी और एक अफसर चर्चा में हैं। चर्चा उनके डांस की हैं। हालांकि इस प्रस्तुति का चुनाव से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं। उनियारा के रोहित गांव में तेजाजी मेले पर कल्चरल इवनिंग हुई। मौका धार्मिक था और माहौल सांस्कृतिक। प्रोग्राम में रोहित गांव के पूर्व सरपंच हरिराम भी थे और परिवहन निरीक्षक हंसराज भी। आयोजकों ने माहौल में तड़का लगाने के लिए ऑर्केस्ट्रा पार्टी और महिला डांसरों को बुलाया था। महिला डांसरों ने भी मंच पर धूम मचा दी। ऐसा डांस किया कि पूर्व सरपंच साहब गमछा हिलाते हुए नृत्य करने कूद पड़े। खूब नाचे। डांसर के इर्द-गिर्द घूमकर जबरदस्त ठुमके लगाए। नेताजी के समर्थक भी पास ही जुटे थे। ताली बजाकर हौसला बढ़ाते रहे। पूर्व सरपंच को नाचता देख ट्रैफिक के अफसर परिवहन निरीक्षक साहब को भी हुकहुकी हुई। पूर्व सरपंच के थमने के बाद उन्होंने रिले दौड़ की मशाल थाम ली। कमर मटकाते हुए मंच के सेंटर पर पहुंच गए और ऐसे नाचे जैसे किसी प्रतियोगिता के लिए ऑडिशन चल रहा हो। अफसर साहब ने भी लटके झटके खूब दिखाए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ये अफसर साहब ही थे। वीडियो सामने आने के बाद लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। कोई कह रहा- पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। कोई कह रहा- भावनाओं में बह गए। 3. चलते-चलते.. निकाय चुनाव हो गए। प्रत्याशियों ने जी-जान लगाई ही। लेकिन असली दम नेताओं ने दिखाया। विधायक, पूर्व विधायक, सांसद, पूर्व सांसद और तमाम बड़े नेताओं ने चुनाव में पूरा जोर लगा दिया। ओसियां से पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा भी इन दिनों काफी एक्टिव रहीं। रिटर्निंग अधिकारी से विधायक की मुलाकात और अपने प्रत्याशी को बाहर निकालने के मुद्दे पर धरना दिया। गांव-गांव घूमीं। प्रत्याशियों के समर्थन में सभाएं कीं। सबसे बड़ी बात, वोटर को उसकी ताकत का एहसास दिलाया। बड़े नेताओं की मौजूदगी से प्रत्याशियों का मनोबल बढ़ा। वैसे भी दिव्या फायरब्रांड नेता मानी जाती हैं। कांग्रेस के शीर्ष आलाकमान तक उनकी पहुंच है। उच्च शिक्षित हैं और बड़े राजनीतिक परिवार से आती हैं। तेवर में धार भी है। एक सभा में वोटर्स से दिव्या मदेरणा बोलीं- ये 2026 है। राजीव गांधी संचार क्रांति लाए थे। आज हर हाथ में मोबाइल है, कैमरा है। आपकी आवाज दिल्ली तक जा सकती है। पुलिस तानाशाही करे तो वीडियो रिकॉर्ड करो, मुझे टैग करो फोन करो, फिर मैं देखूंगी कि कौन तानाशाही करता है। अगर कोई युवा आपकी आवाज उठाए और पुलिस उसे उठा ले तो पूरा गांव एक हो जाना चाहिए। चुनाव प्रकार के दौरान कुछ ऐसा ही जलवा आरएलपी प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल का रहा। वे वन मैन आर्मी की तरह घूमे। हैदराबाद से AIMIM के ओवैसी के साथ जुगलबंदी बैठाने की कोशिश कर रहे हैं। विधानसभा में उनका एक भी विधायक नहीं। फिर भी दोनों प्रमुख दलों पर हमलावर रहे। बोले- एक नागनाथ है तो दूसरा सांपनाथ। राजस्थान को बचाना है तो हमें मजबूत करो। चुनाव में हार-जीत के पीछे बहुत सारे समीकरण काम करते हैं। लेकिन कुछ नेता अपने तेवरों के कारण हमेशा चर्चा में रहते हैं। इनपुट सहयोग- शिवम ठाकुर (जयपुर), किशन शर्मा (बेगूं, चित्तौड़गढ़), भरत मूलचंदानी (अजमेर), अमित विजयवर्गीय (आमेट, राजसमंद), ओम टेलर (पाली), महावीर बैरवा (टोंक)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार सुबह 7 बजे मुलाकात होगाी।
Click here to Read More
Previous Article
राजस्थान में अमेजन-फ्लिपकार्ट के पुराने पैकेट में ड्रग्स की डिलीवरी:रैपिडो-पोर्टर जैसी एप का इस्तेमाल कर रहे तस्कर; मास्टरमाइंड RDX को किसी ने नहीं देखा
Next Article
तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार 3 दोस्तों को कुचला:रंजिश के चलते हत्या का आरोप; 9 घंटे बाद पुलिस और परिजनों के बीच बनी सहमति

Related Rajasthan Updates:

Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

Comments (0)

    Leave a comment