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मेयर पद महिला के लिए आरक्षित हुआ तो अब 65 में से 47 वार्डों में महिलाएं मैदान में

1 month ago

.ओपन सामान्य वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के साथ निर्दलीय महिलाओं का दम... सामान्य ओपन वार्डों में उतरी 18 महिला प्रत्याशियों में भाजपा की 4, कांग्रेस की 3 और 11 निर्दलीय महिलाएं सामान्य वार्डों में चुनाव लड़ रही हैं। वार्ड 2 से अम्बिका, 21 से हेमलता गुर्जर- भाजपा, 24 से रेनू गोरावर- कांग्रेस, 26 से वीरमती निर्दलीय व मीना- निर्दलीय, 33 से मिथिलेश- निर्दलीय, 43 से भावना- निर्दलीय, 44 से जगवती व सीमा सिंह- निर्दलीय, 49 से रसना कुमारी- भाजपा, 51 से ज्योति राघव व सुमन यादव- निर्दलीय, 54 से शकुंतला- कांग्रेस, 55 से मिथिलेश- निर्दलीय, 56 से विमला देवी- कांग्रेस, 57 से रचना- निर्दलीय, 58 से निशा अग्रवाल- भाजपा, 60 से कविता गोयल- भाजपा से है। महापौर पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित होने से इस बार महिला पार्षदों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। महिला आरक्षित वार्डों से जीतने वाली पार्षदों के साथ ही सामान्य ओपन वार्ड से जीतकर आने वाली महिला भी महापौर पद की दौड़ में शामिल हो सकती है। ऐसे में ओपन वार्ड से चुनाव लड़ रही महिलाओं के लिए यह चुनाव सिर्फ पार्षद बनने तक सीमित नहीं है, बल्कि आगे महापौर की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता भी खोल सकता है। .आरक्षण से बाहर भी 26 महिलाएं मैदान में... 154 महिला प्रत्याशियों में 26 महिलाएं ऐसे वार्डों से चुनाव लड़ रही हैं, जो महिला के लिए आरक्षित नहीं हैं। इनमें 18 सामान्य ओपन वार्डों की हैं, जबकि 8 महिलाएं एससी, ओबीसी और एसटी के गैर-महिला आरक्षित वार्डों से मैदान में हैं। यानी महिला आरक्षण के दायरे से बाहर भी महिलाओं ने राजनीतिक दावेदारी दिखाई है। यही इस चुनाव में महिला भागीदारी बढ़ने का संकेत है। आदर्श मधुकर | भरतपुर नगर निगम चुनाव में इस बार प्रत्याशियों की संख्या भले ही घट गई, लेकिन महिला भागीदारी में बड़ा उछाल आया है। वर्ष 2019 में 501 प्रत्याशियों में 124 महिलाएं थीं, जबकि इस बार 401 प्रत्याशियों में 154 महिलाएं चुनाव मैदान में हैं। यानी कुल प्रत्याशी 100 घटे, लेकिन महिला प्रत्याशी 30 बढ़ गईं। महिला हिस्सेदारी भी 24.75% से बढ़कर 38.40% हो गई। यानी निगम चुनाव में अब हर तीन प्रत्याशियों में एक से ज्यादा महिला प्रत्याशी है। इस बदलाव की बड़ी वजह महापौर पद का सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित होना माना जा रहा है। इसका असर सिर्फ महिला आरक्षित वार्डों तक सीमित नहीं रहा। सामान्य ओपन वार्डों में भी महिलाओं ने दावेदारी की है। 65 वार्डों में इस बार 21 वार्ड महिला वर्ग के लिए आरक्षित हैं, लेकिन इनके अलावा भी 26 महिलाएं गैर-महिला आरक्षित वार्डों से चुनाव लड़ रही हैं। .सामान्य महिला : 12 वार्ड, 66 प्रत्याशी .एससी महिला : 5 वार्ड, 44 प्रत्याशी .ओबीसी महिला : 4 वार्ड, 18 प्रत्याशी इन वार्डों में औसतन 6.10 महिला प्रत्याशी प्रति वार्ड मुकाबले में हैं। वार्ड 52 में 12, 15 में 11 और वार्ड 9 में 9 महिला प्रत्याशी मैदान में हैं।