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निगम सवालों के घेरे में:60 में से 35 नए टिपर खुले आसमान के नीचे खड़े-खड़े बिना उपयोग के कबाड़ बने

2 weeks ago

नगर निगम और शहर में घर-घर कचरा संग्रहण का कार्य संभालने वाली पुरानी फर्म के बीच विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। शहर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के सरकारी दावों के बीच एक चौकाने वाला खेल सामने आया है। नगर निगम ने पूर्व में जिस फर्म को शहर में कचरा उठाने के लिए 60 नए टिपर उपलब्ध कराए थे उनमें से ज्यादातर वाहन कागजों में ही दौड़ते रहे या मैदान में खड़े-खड़े पूरी तरह कबाड़ बन चुके हैं। हालात यह हैं कि अनुबंध समाप्त होने के बावजूद फर्म ने न केवल वाहन समय पर नहीं लौटाए बल्कि जो वाहन निगम ने दिए थे वे या तो गायब हैं या उनके टायर और पार्ट्स तक चोरी हो चुके हैं। इस पूरे प्रकरण ने निगम के अमले और फर्म की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गत 15 सितंबर को ही इस फर्म का अनुबंध पूरी तरह से समाप्त हो चुका है, परंतु इसके बावजूद फर्म ने अब तक टिपर निगम को वापस नहीं लौटाए हैं। फर्म ने बमुश्किल 20 से 25 टिपर ही असल मैदान में काम में लिए। बाकी बचे करीब 30 से 35 टिपर पिछले पांच सालों से बिना किसी उपयोग के खुले आसमान के नीचे खड़े-खड़े पूरी तरह कंडम और बेकार हो चुके हैं। देखभाल और रखरखाव के अभाव में इन गाड़ियों की स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि कई टिपरों के टायर तक गायब हो चुके हैं और उनके महत्वपूर्ण पार्ट्स भी निकाल लिए गए हैं। नए टिपरों की खासियतः सपाट डिजाइन, अलग रंग और अतिरिक्त डस्टबिन निगम द्वारा इस बार लाई जा रही नई गाड़ियों की बनावट और तकनीकी विनिर्देश पुराने वाहनों से काफी अलग और आधुनिक हैं। पुराने टिपरों के आगे का हिस्सा उभरा हुआ होता था, जबकि इस बार आने वाले नए टिपरों का आगे का मुंह पूरी तरह सपाट (फ्लैट) होगा। हर टिपर में सूखा और गीला कचरा अलग-अलग स्टोर करने का प्रावधान होगा। इसके लिए टिपर की एक साइड का कलर नीला और दूसरी साइड का कलर हरा रखा गया है। टिपर के निचले हिस्से में दोनों तरफ दो छोटी-छोटी विशेष डस्टबिन लगाई गई हैं। इनमें लाल रंग की डस्टबिन सैनिटरी पैड या अन्य बायोमेडिकल कचरे के लिए और काली रंग की डस्टबिन सेल, बैटरी या लोहे-प्लास्टिक के अन्य छोटे कबाड़ को डालने के लिए उपयोग में लाई जाएगी। नई व्यवस्था: अब शहर में एक साथ दौड़ेंगे 140 नए टिपर पुराने टिपरों के गायब होने उनके कबाड़ में बदलने और फर्म के इस असहयोगपूर्ण रवैये के बीच नगर निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था को किसी भी हाल में बाधित न होने देने के लिए कड़े और त्वरित कदम उठाए हैं। निगम ने समानांतर रूप से एक मजबूत और आधुनिक वैकल्पिक व्यवस्था तैयार कर ली है। शहर में अब तक 50 नए टिपर पहुंच चुके हैं। निगम अधिकारियों के अनुसार, आगामी 30 तारीख तक सभी 140 नए टिपर बीकानेर पहुंच जाएंगे। नगर निगम आगामी 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से एक साथ शहर के सभी वार्डों में इन नए टिपरों को उतारने पर विचार कर रहा है। इसके पीछे एक बड़ी रणनीतिक वजह यह है कि यदि चरणबद्ध तरीके से टिपर चलाए जाते तो जिन पड़ोसी वार्डों में वाहन पहुंचने में देरी होती या शुरुआत नहीं होती, वहां के स्थानीय लोगों में विरोध और नाराजगी के सुर उठ सकते थे। इस संभावित विवाद से बचने के लिए एक साथ 140 टिपरों को सड़क पर उतारने की रणनीति बनाई गई है। वार्डवार कचरा संग्रहण का खाका नई व्यवस्था के तहत अब अमूमन हर वार्ड में दो टिपर कचरा लेने पहुंचेंगे। इसके तहत पूर्व विधानसभा क्षेत्र में 75 बड़े टिपर और पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में 65 बड़े व 15 छोटी गाड़ियों के जरिए कचरा कलेक्ट किया जाएगा। इसके अलावा, निगम के पास 55 ट्रैक्टर भी पहले ही आ चुके हैं और कई वार्डों में उनके जरिए कचरा संग्रहण का कार्य विधिवत रूप से शुरू भी कर दिया गया है। “गाड़ी वाला आया...” अब गूंजेगा खास मारवाड़ी पुट में स्वच्छ भारत अभियान के तहत अब तक पूरे देश में एक जैसे पारंपरिक गीत ही कचरा संग्रहण गाड़ियों में बजते रहे हैं। लेकिन बीकानेर नगर निगम इस बार इसमें एक अनूठा स्थानीय रंग जोड़ने जा रहा है। निगम इस बात पर गंभीरता से काम कर रहा है कि कचरा लेने आने वाली गाड़ियों में बजने वाले संगीत और संदेशों में मारवाड़ी पुट भी शामिल किया जाए। स्थानीय भाषा, शैली और लोक धुनों में पिरोए गए इन संदेशों के जरिए जब गाड़ियां बस्तियों और गलियों में पहुंचेंगी, तो शहरवासियों का जुड़ाव स्वतः बढ़ेगा और वे स्वच्छता के प्रति अधिक जागरूक होंगे। निगम की इस पहल से शहर में एक सकारात्मक स्थानीय संदेश जाने की पूरी उम्मीद है। टिपर फर्म को लौटाने थे वो अभी नहीं आए। शर्त के मुताबिक जिस कंडीशन में टिपर दिए गए थे उसी में आने थे। निगम इंतजार कर रहा है। वरना रिकवरी का विकल्प खुला है। नए 55 टिपर पहुंच चुके हैं। सिद्धार्थ पलानीचामी, कमिश्नर नगर निगम
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