slndigital.in

पंजाब के 'पायलट' से मिले 'परमानेंट इंचार्ज':राजस्थान के सांसदजी को दिल्ली पुलिस ने 'घसीटा'; रविंद्र भाटी को 'दादागिरी' नापसंद

6 days ago

नमस्कार, जयपुर में पंजाब इंचार्ज और 'परमानेंट इंचार्ज' की मुलाकात चर्चा में है। नागौर में माइक बंद होने पर विधायकजी ने चेतावनी दे दी। दिल्ली पुलिस ने बाड़मेर सांसदजी को घसीट दिया और जयपुर में लोग त्योहार की दुहाई दे रहे हैं। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. पंजाब इंचार्ज और 'परमानेंट इंचार्ज' एक वक्त था जब सत्ता के लिए खींचतान चली थी। दिग्गजों को समझ आ गया कि सत्ता वह किनारा है जिसे एकता के जहाज पर चढ़कर ही पाया जा सकता है। आपस में लड़कर जहाजी अपना ही बेड़ा खुद डुबो बैठते हैं। जिन दिग्गजों के संदर्भ में यह बात अक्सर कही जाती रही, अब उनका मिलना मिसाल बन रहा है। पंचायत चुनाव को लेकर राजधानी में कांग्रेस की बड़ी मीटिंग हुई। इसमें पंजाब के प्रभारी सचिन पायलट, राजस्थान स्टेट प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व सीएम अशोक गहलोत समेत कई नेता जुटे थे। पायलट और रंधावा कमरे में बैठे चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान पूर्व सीएम की एंट्री हुई। उन्होंने पायलट को देखा। मुस्कुराए और बोले- पंजाब इंचार्ज। फिर उसी मुस्कान के साथ बोले- क्या संयोग है बताइए, पहले आपके इंचार्ज ये (रंधावा) थे, अब आप इनके इंचार्ज हो। रंधावा जी ने जवाब दिया- अब तो आप ही एक-दूसरे के इंचार्ज हो। इस पर पायलट ने पूर्व सीएम से कहा- हम सबके इंचार्ज आप ही हो। राजस्थान-पंजाब से क्या फर्क पड़ता है। इस पर पूर्व सीएम ने ठहाका लगाते हुए कहा- हम तो परमानेंट इंचार्ज हैं। एकजुटता की यह तस्वीर कांग्रेस के लिए सुखद है। फिर भी हर किसी के समर्थकों की मनोकामनाएं अलग-अलग हैं। पायलट के समर्थक चाहते हैं कि अगली बार कुर्सी पर वे बैठें। जबकि सिग्नल पर गहलोत की गाड़ी रुकने पर प्रशंसक कहता है- चौथी बार आप ही गद्दी पर बैठना। 2. रविंद्र सिंह भाटी को दादागिरी नापसंद हनुमान बेनीवाल, नरेश मीणा, राजेंद्र गुढ़ा और रविंद्र सिंह भाटी… इन सब नेताओं में एक बात कॉमन यह है कि ये ‘वन मैन आर्मी’ की तरह हैं। युवाओं में इनकी फैन फॉलोइंग तगड़ी है। ये हवा का रुख अपने दम पर बना-बिगाड़ सकते हैं। हनुमान बेनीवाल ने अपनी पार्टी बना रखी है। नरेश मीणा भी BSS नाम के संगठन के प्रमुख हैं। राजेंद्र गुढ़ा और रविंद्र सिंह भाटी फिलहाल अपने स्तर पर विभिन्न मुद्दों पर संघर्ष करते दिखते हैं। EWS सरलीकरण की मांग को लेकर बाड़मेर के शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी प्रदेश में यात्रा निकाल रहे हैं। उन्हें भरपूर जन समर्थन मिल रहा है। जगह-जगह जेसीबी से फूल बरसाए जा रहे हैं। हाथी पर बैठाया जा रहा है। भव्य मंच सज रहे हैं। युवा उनकी सभा में बड़ी तादाद में जुट रहे हैं। ऐसे में भाटीजी का हौसला सातवें आसमान पर है। नागौर में उनका माइक बंद कर दिया गया। इस पर वे प्रशासन पर खूब भड़के। प्रशासन को चेतावनी देते हुए बोले- माइक में गरीब जनता की आवाज है। जिसे दबा नहीं सकते। यह दादागिरी अपनी जेब में रखो। नहीं सुधरे तो इलाज कर दिया जाएगा। 3. सांसद उम्मेदाराम को घसीटा उनका नाम उम्मेदाराम बेनीवाल है। वे बाड़मेर-जैसलमेर से सांसद हैं। उम्मेदाराम अपने सौम्य व्यवहार के कारण जाने जाते हैं। लोगों के बीच उनकी पैठ भी है। सांसद वाले तेवर उनमें नहीं हैं, न ही कहीं बड़प्पन झाड़ते हैं। अपने एरिया में चरवाहों की झोंपड़ी में घुस जाते हैं। बकरी के दूध की चाय से ही सब्र कर लेते हैं। आम लोगों के हाल-चाल पूछते हैं। उनके सुख-दुख में तन्मयता से शामिल होते हैं। दिग्गजों की कतार लगे तो उम्मेदाराम लुके-छुपे नजर आएंगे। लेकिन इस बार गजब हो गया। दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहे प्रोटेस्ट में वे फ्रंट लाइन में नजर आए। दिल्ली पुलिस भी कम नहीं। आंदोलन करते सांसद महोदय को हाथ-पैरों से पकड़कर घसीट लाई। सांसद महोदय ‘छोड़ो-छोड़ो’ चिल्लाते रहे, लेकिन दिल्ली पुलिस किसकी सुनती है? उन्हें पुलिस वाहन के पास लाकर एक बार सड़क पर पटक दिया गया। फिर दोबारा उठाकर गाड़ी के अंदर डाल दिया गया। शुक्र है इस दौरान सांसद महोदय ने हाथ-पैर नहीं मारे। वाहन के दरवाजे का साइज देख सीधे-सट्‌ट हो गए ताकि खुद को नुकसान पहुंचाए बिना हिरासत में जा सकें। इस कार्रवाई के बाद जरूर उम्मेदाराम आलाकमान की नजर में आ जाएंगे। राजनीति में काम कितना ही बेहतर कर लीजिए, पहचान तो ऐसे ही पैंतरों से मिलती है। 4. चलते-चलते.. दीपावली बड़ा त्योहार है। कई काम-धंधे ऐसे हैं कि इसी सीजन में व्यापारी की आमद चमकती है। जयपुर शहर में नवरात्र से ही बाजारों में चहल-पहल हो जाती है। इस बीच अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई भी चल रही है। सड़क पर थड़ी-ठेला लगाकर लोग किसी तरह आजीविका चलाते हैं। महंगाई के दौर में परिवार को पालना किसी जंग लड़ने से कम नहीं। इस बीच न्यू सांगानेर रोड पर अतिक्रमण को चिह्नित कर दुकानें, सीढ़ियां, टिन-टप्पर की छतें तोड़ी जा रही हैं। लोग रो रहे हैं। विरोध कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने भी 15 दिन के लिए सुनवाई टाल दी। यानी कार्रवाई जारी रह सकती है। अतिक्रमण है तो तोड़ा जाएगा ही। लेकिन जिनकी दुकानें टूट रही हैं, थड़ियां उठाई जा रही हैं, वे भी नागरिक हैं। अपराधी नहीं हैं। सामने दीपावली का सीजन है। सालभर काम-धंधा इन्हीं चंद दिनों में होता है। ऐसे में कार्रवाई के दौरान सिर्फ एक दुकान नहीं टूटती बल्कि एक परिवार की उम्मीदें भी टूट जाती हैं। रोजगार का साधन टूट जाता है। हौसला टूट जाता है। चुनाव के लिए कई बार इस तरह की कार्रवाई को टाल दिया जाता है। अतिक्रमण की जद में आई दुकान टूटने के बाद एक बुजुर्ग महिला ने रोते हुए कहा- रोएं नहीं तो क्या करें, दीपावली का त्योहार तो देखते। थोड़ा सा वक्त तो दे देते। सब कुछ चौपट हो गया। इनपुट सहयोग- स्मित पालीवाल, ऋषभ सैनी (जयपुर), विजय कुमार (बाड़मेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
Click here to Read More
Previous Article
पीएम श्री महिपाल स्कूल में ब्लॉक स्तरीय प्रबल कार्यक्रम अंतर्गत आशु भाषण प्रतियोगिता संपन्न
Next Article
राजस्थान पंचायत चुनाव के पहले फेज के आज से नामांकन:16 जिला परिषद और 104 पंचायत समिति के सदस्यों के लिए प्रत्याशी भरेंगे पर्चा

Related Rajasthan Updates:

Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

Comments (0)

    Leave a comment