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राजस्थान में 'बॉस स्कैम', स्टूडेंट्स ने उड़ाए 6.80 करोड़ रुपए:हाईप्रोफाइल बिजनेसमैन टारगेट, एक मैसेज से ट्रांसफर हुआ पैसा; जानें- कैसे पकड़े गए मास्टरमाइंड

1 month ago

जयपुर की एक बड़ी कंपनी में अकाउंट संभालने वाले कर्मचारी के पास अचानक 'बॉस' का वॉट्सएप पर मैसेज आया। मैसेज में लिखा था- जल्दी से इस खाते में 6 करोड़ 80 लाख रुपए ट्रांसफर कर दो। ‘बॉस’ का मैसेज मिलते ही कर्मचारी ने तुरंत 6.80 करोड़ रुपए उस खाते में ट्रांसफर कर दिए। लेकिन कुछ मिनट बाद जब हकीकत पता पड़ी तो पैरों तले जमीन खिसक गई। पैसा ट्रांसफर करने का ऑर्डर देने वाला कोई 'बॉस' नहीं, बल्कि शातिर साइबर ठग था। प्रदेश के हाईप्रोफाइल बिजनेसमैन को टारगेट करने वाली इस गैंग का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। एक मास्टरमाइंड फिजियोथेरेपी का स्टूडेंट निकला है। कोई बी-टेक पास कर ठग बना तो कोई बी.एससी है। 'बॉस' बनकर ये ठग स्कैम को कैसे अंजाम दे रहे थे? पकड़ी गई गैंग से अबतक क्या-क्या सच सामने आया है? पढ़िए- संडे बिग स्टोरी में…. सबसे पहले जानिए- पूरा मामला क्या है? जयपुर की एक निजी कंपनी के अकाउंटेंट ने साइबर क्राइम पुलिस थाने में 25 अगस्त को रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें बताया कि 24 अगस्त को साइबर ठगों ने अकाउंटेंट के कंप्यूटर को हैक कर लिया। कंप्यूटर में अकाउंटेंट का वेब वॉट्सऐप चालू था, जहां कॉन्टैक्ट लिस्ट से आरोपियों ने कंपनी के डायरेक्टर का नाम और प्रोफाइल फोटो चुराई। फिर वॉट्सएप कॉन्टेक्ट लिस्ट से कंपनी के असल डायरेक्टर का नंबर हटाकर अपने नंबर को उसी नाम और प्रोफाइल फोटो के साथ जोड़ दिया। शातिर ठगों ने कंपनी के डायरेक्टर और अकाउंट हेड के बीच पहले से हो रखी वॉट्सएप चैट की भी क्लोनिंग तैयार कर ली। यही वजह रही कि अकाउंटेंट ने उसे असली बॉस का मैसेज समझकर तुरंत ही 3 अलग-अलग खातों में 6.80 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए। कुछ देर बाद ही ठगी का पता चलते ही पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 और साइबर क्राइम पुलिस की मदद ली। समय रहते टीमों ने करीब 3 करोड़ 50 लाख रुपए खातों में होल्ड करवाए। मामले में 2, 3 और 4 सितंबर को अलग-अलग कार्रवाईयों में कुल 8 आरोपी पकड़ में आ चुके हैं। कोई B.Tech पास, कोई B.Sc पास तो कई फिजियोथेरेपी का स्टूडेंट पकड़ी गई गैंग के कई आरोपी हाई क्वालिफाइड हैं। बी.टेक, बीए.एसी करने के बाद बेरोजगार बैठे दो युवक साइबर ठगी के काम में जुट गए थे। वहीं, एक आरोपी फीजियोथेरेपी में सेकंड ईयर का स्टूडेंट है। एक बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर रहा है। वहीं पंजाब में बिजनेस चला रहा एक युवक भी इस गैंग से जुड़कर काम कर रहा था। जयपुर के रेनवाल के भादवा गांव का बृजमोहन द्रोण उर्फ लक्की BSC पास है। लेकिन गैंग में इसकी भूमिका बाकी आरोपियों से एक कदम आगे थी। पुलिस के मुताबिक उसने गिरोह को सिर्फ बैंक खाता नहीं दिया। बल्कि पैसों को ठिकाने लगाने का जिम्मा भी इसी के पास था। बृजमोहन ठगी का पैसा खाते में आते ही उसे एक के बाद एक दूसरे खातों में घूमाने और क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में कन्वर्ट करने में माहिर है। पुलिस के मुताबिक द्रोण उर्फ लक्की USDT को विदेश में बैठे ठगों के बताए ऑनलाइन करेंसी एप में ट्रांसफर करता था। इस दौरान वो लगातार टेलीग्राम के जरिए ठगों के टच में रहता और पूरी मॉनिटरिंग करता कि पैसा कहां पहुंचा, आगे किसने भेजा, किसने उसे डिजिटल मुद्रा बना दिया। कुचामन-डीडवाना के सिंघाना का रहने वाला समानाराम भले ही 12वीं पास है। लेकिन ठगी के करोड़ों रुपए क्रिप्टोकरेंसी में कन्वर्ट कराने में माहिर है। समानाराम समानाराम का काम उन लोगों से मिलाना था जो बैंक के पैसे को डिजिटल मुद्रा में बदलते हैं। दरअसल, पैसों को USDT में बदलकर विदेश भेजना आसान होता है। इस करेंसी को साइबर ठग किसी भी देश की मुद्रा में कन्वर्ट करवा सकते हैं। मूल रूप से हरियाणा में हिसार के आदमपुर जिले के गांव बाना का रहने वाला संदीप एमए पास है। पुलिस के मुताबिक संदीप की पहचान एक फर्म के डायरेक्टर के तौर पर हुई है। संदीप की कंपनी के खाते में ही ठगी की सबसे ज्यादा रकम करीब 2 करोड़ रुपए ट्रांसफर हुए थे। संदीप ने करीब 15 दिन पहले नया कॉर्पोरेट खाता खुलवाया था। ठगों ने संदीप को जयपुर के रींगस में बुलाया और होटल में ठहराया था। उसने ये कॉर्पोरेट खाता ठगों को कमीशन के बदले किराए पर दे दिया। उसने ठगों को इस खाते की चेकबुक, एटीएम कार्ड, आधार, पैन और खाते से जुड़ी सिम तक दे दी। 250 बैंक खातों में घूमा पैसा पुलिस के अनुसार अकाउंट्स हेड ने कंपनी के खाते से रकम तीन प्रथम लाभार्थी खातों में ट्रांसफर कर दी थी। बाद में इन तीन खातों से ये रकम आगे करीब 250 से ज्यादा बैंक खातों में पहुंचा। पुलिस जांच में ये भी सामने आया कि रकम म्यूल बैंक खातों में पहुंचने के बाद सिंगापुर और हांगकांग में बैठे गिरोह के मास्टरमाइंड इंटरनेट बैंकिंग के जरिए उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर रहे थे। 3 महीने पहले ही चर्चा में आया ठगी का ये नया तरीका नागौर डीएसटी के सायबर एक्सपर्ट नरसी किलक के अनुसार बताया ठगी ये तरीका नया है। अब साइबर ठग भरोसे और ह्यूमन बिहेवियर का फायदा भी उठा रहे हैं। कर्मचारी को लगता है कि बॉस का फोटो और नाम है तो आदेश सही होगा।
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