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श्रीगंगानगर नगर परिषद चेयरमैन की दौड़ में 3 नाम:मूंदड़ा, दावड़ा और डॉ. मैय्यर में टक्कर, जानिए- किसे मिलेगी कुर्सी

1 month ago

श्रीगंगानगर नगर परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद अब चर्चा चेयरमैन पद को लेकर शुरू हो गई है। 65 वार्डों में से 30 सीटें जीतकर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। कांग्रेस को 17 और निर्दलीयों को 18 सीटें मिली हैं। फिलहाल नगर परिषद में बहुमत के लिए 33 पार्षदों की जरूरत है। ऐसे में भाजपा बहुमत से सिर्फ 3 सीट दूर है। 18 निर्दलीयों में कई पार्षदों को भाजपा समर्थक माना जा रहा है। यदि इनमें से तीन भी भाजपा के साथ आते हैं तो भाजपा आसानी से बहुमत का आंकड़ा पूरा कर बोर्ड बना सकती है। हालांकि बोर्ड बनने की तस्वीर साफ होने के साथ ही भाजपा में चेयरमैन पद के दावेदारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पढ़िए- सबसे प्रभावशाली 3 दावेदार संजय मूंदड़ा का नाम सबसे आगे चेयरमैन पद की दौड़ में संजय मूंदड़ा का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। आढ़त व्यवसाय से जुड़े मूंदड़ा लंबे समय से भाजपा से जुड़े हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होती है। उन्होंने वार्ड 55 से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीता है। पार्टी में लंबे समय से सक्रियता, स्थानीय पहचान और राजनीतिक पकड़ उनके पक्ष में जाती है। चुनाव से पहले भी उनके चेयरमैन पद के दावेदार होने की चर्चा थी। यही वजह है कि परिणाम आने के बाद उनका नाम सबसे पहले लिया जा रहा है। अजय दावड़ा को परिषद का अनुभव अजय दावड़ा उर्फ लक्की दावड़ा भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वे नगर परिषद के पूर्व उपसभापति रह चुके हैं। उन्होंने वार्ड 58 से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की है। पूर्व उपसभापति रहने के कारण उन्हें परिषद के कामकाज, सदन की कार्यप्रणाली और पार्षदों के साथ तालमेल का अनुभव है। संगठन और स्थानीय राजनीति में सक्रियता भी उनके पक्ष में जाती है। डॉ. भरत पाल मैय्यर भी दौड़ में तीसरा प्रमुख नाम डॉ. भरत पाल मैय्यर का है। उन्होंने वार्ड 21 से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की है। मैय्यर का नगर परिषद की राजनीति से पुराना जुड़ाव रहा है और शहर में डॉक्टर के रूप में भी उनकी पहचान है। उनका पूर्व परिषद अनुभव, शहर में पहचान और भाजपा संगठन से जुड़ाव उन्हें चेयरमैन पद की दौड़ में बनाए हुए है। पहले निर्दलीयों का साथ, फिर चेयरमैन पर फैसला भाजपा के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाना है। 30 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़ा दल जरूर है, लेकिन बहुमत के लिए उसे 3 और पार्षदों की जरूरत है। यदि 3 निर्दलीय भाजपा के साथ आते हैं तो उसके पास 33 पार्षद हो जाएंगे और बोर्ड गठन का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके बाद पार्टी के सामने चेयरमैन के नाम पर सहमति बनाने की चुनौती होगी। हालांकि निर्दलीयों का रुख भी बोर्ड गठन के साथ चेयरमैन के चुनाव में महत्वपूर्ण रहेगा। श्रीगंगानगर चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… श्रीगंगानगर में 65 वार्डों के नतीजे घोषित:बीजेपी 30, कांग्रेस 17 और 18 निर्दलीय ने जीत दर्ज कराई श्रीगंगानगर नगर परिषद के 65 वार्डों के नतीजे सामने आने के बाद अब बोर्ड गठन की तस्वीर भी लगभग साफ हो गई है। भाजपा 30 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि कांग्रेस को 17 और निर्दलीयों को 18 वार्डों में जीत मिली है। पूरी खबर पढ़िए
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