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भाजपा-कांग्रेस 3-3 में जीती, 1 में निर्दलीय किंग मेकर

1 month ago

नगर निकाय चुनावों के परिणाम घोषित हो गए। जिले का जनमत फिफ्टी-फिफ्टी वाला रहा। कुल 7 नगर निकायों में से भाजपा व कांग्रेस को 3-3 निकाय में स्पष्ट बहुमत मिला। रावतभाटा में 7 निर्दलीय निर्णायक भूमिका में है। वहां कुल 40 में से भाजपा ने 17 व कांग्रेस ने 16 वार्ड जीते। जादुई अंक से दोनों क्रमश: 4 व 5 सीटें दूर है। पहली बार नगर पालिका बनी आकोला कांग्रेस की झोली में गई। कुल 20 में से उसने 12 वार्ड जीते। भाजपा 7 ही जीत सकी। एक निर्दलीय जीता। बाकी 6 निकायों मे से गत चुनाव में 5 में कांग्रेस और 1 में भाजपा का बोर्ड बना था। इस बार में इनमें से 2 में कांग्रेस और 3 में भाजपा का बहुमत आया। रावतभाटा में कांग्रेस से एक सीट ज्यादा होने के साथ सत्ता व विधायक के प्रभाव से भाजपा 4 निर्दलीयों को साथ लेकर बोर्ड बना पाई तो अब जिले में भाजपा के 4 और कांग्रेस के 3 बोर्ड रह जाएंगे। इनमें सिर्फ बड़ीसादड़ी ही ऐसा निकाय है, जहां कोई पार्टी यानी कांग्रेस अपना बोर्ड बचाने में सफल रही। वर्ना भाजपा अपना एकमात्र बोर्ड कपासन तो कांग्रेस चित्तौड़गढ़, बेगूं, निंबाहेड़ा, बड़ीसादड़ी व रावतभाटा गंवाने की स्थिति में है। कांग्रेस नई नपा आकोला व भाजपा से कपासन छीनकर बराबरी पर आ पाई। यदि इन दोनों व बड़ीसादड़ी के साथ 5 निर्दलीय जुटाकर रावतभाटा में भी बोर्ड बना सकी तो जिले में भाजपा पर बढ़त कायम रख पाएगी। भाजपा ने 28 वार्ड ज्यादा जीते, 4 निकाय में आगे रही, सत्ता फैक्टर पर कांग्रेस से पीछे इस बार कुल 7 निकायों के 250 वार्ड थे। भाजपा 4 निकाय में कांग्रेस से आगे रही और कुल 130 यानी 52 प्रतिशत वार्ड जीते। कांग्रेस ने 3 निकाय में आगे रहते हुए 102 यानी 41 प्रतिशत वार्ड जीते। इस तरह वो भाजपा से पीछे रही पर सत्ता के साथ निकाय वाले ट्रेंड से देखे तो उसका प्रदर्शन बेहतर है। पिछली बार कांग्रेस सरकार में हुए चुनावों में कुल 6 निकाय के 220 वार्ड थे। कांग्रेस ने इनमें से 130 वार्ड यानी 59 प्रतिशत सीटें जीती और 5 में साफ बहुमत के साथ बोर्ड बनाया था। तब विपक्षी दल भाजपा को 81 यानी 37 प्रतिशत वार्ड ही मिले। पिछले व इस चुनाव का एक बड़ा अंतर निर्दलीयों का अपेक्षाकृत असरदार प्रदर्शन भी है। गत बार 6 निकायों में 9 निर्दलीय ही जीत पाए थे। इस बार 7 निकायों में 18 निर्दलीय जीतकर आए। रावतभाटा में तो 40 में से 7 निर्दलीयों ने दोनों पार्टियों का गणित बिगाड़ कर रख दिया। चित्तौड़गढ़ में गत बार एक भी निर्दलीय नहीं था, वहां इस बार 4 जीते। बेगूं में भी गत बार से एक ज्यादा जीता। कपासन में गत बार की तरह 2 व आकोला में भी एक निर्दलीय जीता। सिर्फ बड़ीसादड़ी में ही कोई निर्दलीय नहीं जीत सका। आकोला आकोला | नवगठित आकोला नगरपालिका के 20 वार्डों के चुनाव परिणाम में कांग्रेस ने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए 12 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि भाजपा के खाते में मात्र 7 सीटें आई। वार्ड 13 में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रही। आकोला निकाय में यह चुनाव विधायक अर्जुनलाल जीनगर एवं कांग्रेस के पूर्व प्रधान भगवतीलाल हिंगड़ के नेतृत्व में लड़ा गया। इन दोनों ही नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर थी, इसमें हिंगड़ प्रतिष्ठा बचाने में कामयाब रहे। निर्वाचन अधिकारी बृजेन्द्र मीणा ने मतगणना के बाद परिणामों की आधिकारिक घोषणा की। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी की और मिठाई बांटकर जीत का जश्न मनाया। महज 3 वोटों से जीते प्रकाश चंद्र: सबसे करीबी मुकाबला वार्ड नंबर सात में रहा। जहां कांग्रेस के प्रकाश चन्द्र ने भाजपा के पिंटू छीपा को महज 3 वोटों से हराया। प्रकाश चन्द्र को 206 और पिंटू छिपा को 203, वार्ड 10 में कांग्रेस के पप्पू लालभील ने 392 वोट हासिल कर भाजपा के पवन कुमार को 266 वोटों से हराया। वार्ड 13 में निर्दलीय उमा तेली ने 153 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। बेगूं बेगूं | नगर की नई सरकार चुनने के लिए जनता ने इस बार भाजपा को प्रचंड बहुमत दिया है। सोमवार को घोषित 30 वार्डों के नतीजों में 30 में भाजपा ने 19 सीटें जीती। जबकि कांग्रेस 8 पर ही जीत पाई है। तीन वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं। पांच वार्डों में भाजपा प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध चुन लिए जाने से अब भाजपा के पास कुल 24 सीटें हो चुकी। इस कारण भाजपा का बोर्ड बनना तय है। स्वामी विवेकानंद माडल स्कूल में मतगणना हुई। ईवीएम से 30 वार्डों की मतगणना मात्र सवा घंटे में पूरी हो गई। रिटनिंग अधिकारी एसडीएम अंकित सामरिया ने रिजल्ट घोषित किए। तहसीलदार गोपाल जीनगर, थानाधिकारी चंपाराम मय ज़ाब्ता मौजूद रहे । भाजपा की शानदार जीत पर नगर में ढोल नगाड़ों के साथ आतिशबाज़ी कर मिठाई बाटी। भाजपा में जीत का जोश है तो कांग्रेस में करारी हार की मायूसी। विधायक डॉ सुरेश धाकड़ ने नपा चुनाव में पूरी ताक़त झोंक दी थी। अब उनके नेतृत्व में भाजपा बोर्ड बनाने में जुटी है । जबकि कांग्रेस आपसी गुटबाजी और खींचतान में फंसी रही। कांग्रेस में नेतृत्व का अभाव रहा। 3 निर्दलीय जीते : वार्ड 5 से निर्दलीय दुर्गा बाई 152 वोटों से, 12 से सलीम अंसारी 46 वाटों से और वार्ड 13 से निर्दलीय प्रत्याशी रुखसार बानो 409 वोटों से जीती है । कपासन कपासन | नगर पालिका में इस बार कांग्रेस ने 25 में से 13 सीट हासिल कर भाजपा को लगातार तीसरी बार बोर्ड बनाने से रोक दिया। वहीं साल 2000 के बाद कांग्रेस का पूर्ण बहुमत वाला बोर्ड बनेगा। इधर चुनाव के नतीजे भी काफी एक रोचक रहे। कुछ वार्डो में काफी निकट का मामला रहा, वार्ड 4 में भाजपा की प्रत्याक्षी सुनीता भदादा मात्र एक वोट से विजयी घोषित हुई। उनके सामने कांग्रेस की अनीता नंदवाना थी। यह वार्ड भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष राज विजयवर्गीय का था ओर उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। वार्ड 23 में कांग्रेस की शांता बारेगामा ने भाजपा की पुष्पा बारेगामा पर मात्र 2 मतों से विजयी प्राप्त की। यह वार्ड माली समाज बाहुल्य है। सूरज माली प्रकरण वाला सूरज माली भी इसी वार्ड का निवासी है। शांता के पति भेरू बारेगामा की प्रकरण में सूरज का साथ देने में अहम भूमिका रही थी। इसी प्रकार वार्ड 20 में कांग्रेस की अनीता शर्मा ने भाजपा की पिंकी सुथार पर मात्र 5 मतो से जीत हासिल की। वार्ड 14 में भी मामला काफी नजदीकी रहा।जिसमें भाजपा के अभिनव दुग्गड मात्र 7 मत से विजयी हुए।उनके सामने कांग्रेस के महावीर चंडालिया थे। दोनों जैन समाज से है व मामला काफी रोचक था। निंबाहेड़ा निम्बाहेड़ा | नगर निकाय चुनाव के चुनाव परिणाम आने से पहले ही ऐसा लग रहा था जैसे दोनों ही दलों को परिणामों का पूर्वाभास था । अगर परिषद चुनावों में भाजपा को 27 , कांग्रेस को 17 तो एक सीट निर्दलीय को मिली।सभी वार्डों के कुल वोट या वोट प्रतिशत में दोनों ही प्रमुख दलों में सीटों के अनुपात में अंतर नहीं दिखा । भाजपा को कुल 21852 तो कांग्रेस को 21786 मत मिले दोनों के वोटो में मात्र 66 वोट का अंतर ही रहा।सबसे अधिक जीत का अंतर भी सबसे बड़े वार्ड 24 नंबर में 1155 मति का रहा।वही सबसे कम वोट अंतर 7 वोट से वार्ड 35 की प्रत्याशी जीती।वही भाजपा के 5 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में सभी हारे। कांग्रेस के 7 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में थे वे सभी जीते। ग्रामीण क्षेत्र जो परिसीमन में नए जुड़े उनमें 6 में से 4 में भाजपा जीती। परिसीमन भाजपा की विजय का मुख्य कारण माना जा रहा है।क्योंकि पिछले चुनाव कांग्रेस ने परिसीमन में परिवर्तन कर जीता।ऐसा सोच कर भाजपा ने परिसीमन में सुधार किया और वह सफल भी रही। बड़ीसादड़ी बड़ीसादड़ी | नगरपालिका चुनाव-2026 के घोषित परिणाम में 25 वार्डों में कांग्रेस ने 13 सीटों पर जीत दर्ज कर लगातार दूसरी बार नगरपालिका में बहुमत बरकरार रखा है पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 14 वार्ड जीतकर बोर्ड बनाया था। इस बार कांग्रेस को 2 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं भाजपा को 12 सीटों पर संतोष करना पड़ा। ुपरिणामों की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि कई अनुभवी और चर्चित चेहरों को जनता ने इस बार नकार दिया, जबकि नए और युवा प्रत्याशियों ने अपनी जीत से राजनीतिक समीकरण बदल दिए। वार्ड-1 में भाजपा के मोहन सिंह मीणा ने कांग्रेस के गोपाल सिंह मीणा को महज 4 वोट से हराकर सबसे करीबी मुकाबला जीता। वार्ड-2 में भाजपा के युवा प्रत्याशी भारत लाल व्यास ने पूर्व कांग्रेस पार्षद भोपाल सिंह मोगरा को शिकस्त दी।् वार्ड-6 में पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष विनोद कंठालिया ने जीत दर्ज की। वार्ड-7 में भाजपा के पूर्व पार्षद धर्मेंद्र सिंह को नगर कांग्रेस अध्यक्ष रणजीत सिंह झाला ने हराकर कांग्रेस के खाते में सीट डाली। वार्ड-11 का परिणाम खासा चर्चित रहा। यहां आजादी के बाद पहली बार भाजपा की अनीता रेगर ने जीत का परचम फहराया। कांग्रेस के पूर्व प्रधान हिंगड़ ने साबित की नेतृत्व क्षमता चित्तौड़गढ़. प्रत्याशियों की जीत पर कलेक्ट्रेट पर जश्न मनाते हुए समर्थक व कार्यकर्ता। विश्लेषण भास्कर जनमत 50-50 भाजपा को मिला कांग्रेस की आपसी खींचतान और गुटबाजी का फायदा भाजपा का लगातार तीसरी बार बोर्ड बनाने का सपना टूटा भाजपा को 27वार्डों के साथ पिछले चुनाव से 11 सीटों पर मिली बढ़त, कांग्रेस को 11 सीटों का नुकसान भी कांग्रेस का बहुमत बरकरार, भाजपा को झटका मंत्री दक और विधायक जीनगर को करारा झटका अभी जिले के पांचों विधायक सत्तासीन भाजपा से हैं। जिले से एकमात्र मंत्री गौतम दक व कपासन विधायक अर्जुन जीनगर को करारा झटका लगा। दक बड़ीसादड़ी में कांग्रेस का दोबारा बहुमत नहीं रोक पाए। जीनगर की विस में दोनों निकायों में कांग्रेस बहुमत लाने मंें सफल रही। पूर्व मंत्री विधायक श्रीचंद कृपलानी के निंबाहेड़ा मेंं भाजपा ने 60% वार्ड जीते। नप बनने के बाद पहला सभापति बनेगा पर उनके क्षेत्र की एक अन्य विस छोटीसादड़ी में पार्टी 13 से आगे नहीं बढ़ी। चित्तौड़गढ़ में विधायक चंद्रभानसिंह आक्या जिले के सबसे बड़े निकाय में 60 में से 33 सीटें जीतकर बहुमत लाने में सफल रहे।