slndigital.in

परमात्मा पार्श्वनाथ ने नाग-नागिन को बनाया धरणेंद्र पद्मावती: मनोज्ञसूरीश्वर

1 month ago

कुशल कल्पतरू वर्षावास की व्याख्यान माला के तहत पर्युषण पर्व के सातवें दिन खरतरगच्छाचार्य जिन मनोज्ञ सूरीश्वर महाराज ने कल्पसूत्र वांचना में भगवान पार्श्वनाथ का जीवन चरित्र सुनाया। उन्होंने बताया कि कमठ का प्रभु से 10 भवों तक वैर रहा। पार्श्व कुमार ने कमठ के पंचाग्नि तप से नाग-नागिन के जोड़े को मुक्त कराया, जो धरणेंद्र व पद्मावती देव बने। जब कमठ के जीव मेघमाली देव ने प्रभु के ध्यान में प्राणांत उपसर्ग किया, तब धरणेंद्र-पद्मावती ने फणछत्र बनाकर रक्षा की। वह स्थान आज अहिछत्र पार्श्वनाथ तीर्थ कहलाता है। आचार्य ने कहा कि अरिष्टनेमि परमात्मा ने विवाह मंडप में पशुओं की करुण पुकार सुनकर वैराग्य धारण किया। गिरनार पर उनके तीन कल्याणक संपन्न हुए। वहीं प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के 13 भवों का विवेचन करते हुए बताया कि उन्होंने असि, मसि और कृषि का ज्ञान दिया। एक भूल से प्रभु को 400 दिन गोचरी नहीं मिली, फिर श्रेयांस कुमार ने अक्षय तृतीया को इक्षु रस से पारणा कराया। उनकी माता मरु देवी हाथी पर समवशरण जाते हुए केवलज्ञान पाकर मोक्ष जाने वाली प्रथम जीव बनीं। चक्रवर्ती भरत से संग्राम के बीच बाहुबली को वैराग्य हुआ और बहनों की प्रेरणा से अहंकार त्यागते ही उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ। प्रवक्ता पवन कोठारी ने बताया कि ट्रस्ट अध्यक्ष दानमल डूंगरवाल, चातुर्मास संयोजक मदनलाल छाजेड़ एवं उपधान तप लाभार्थी पिस्ता देवी ताराचंद छाजेड़ परिवार इंद्रोई जोधपुर की उपस्थिति में आगामी उपधान तप को लेकर अहम बैठक हुई। इसमें सभी ट्रस्टियों, समिति सदस्यों एवं सहयोगियों ने भाग लेकर व्यवस्थाओं की रूपरेखा बनाई।