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कोटा में पारा 35 के पार पहुंचा:अगले हफ्ते शुष्क हवाओं से बढ़ेगी ठंडक, तापमान 2-3 डिग्री तक गिरने की संभावना

कोटा संभाग में मानसून की विदाई का दौर अंतिम चरण में पहुंच गया है। मौसम में बदलाव से दिन के समय में गर्मी है। बीते कुछ दिनों से जिले में दिन का अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ हैं। हालांकि शाम ढलते ही हवा चलने से मौसम सुहावना होने लगा है। जानें अगले सप्ताह कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग में दूसरे सप्ताह तक मौसम में बदलाव की संभावना जताई हैं। अगले हफ्ते से नमी कम होने लगेगी। शुष्क हवाओं का प्रभाव बढ़ेगा। दिन का तापमान गिरकर 31 से 33 डिग्री सेल्सियस तक आ जाएगा। जबकि रातें हल्की ठंडी होने लगेगी। न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट होगी। शुक्रवार को मौसम साफ रहा दिनभर धूप खिली रही। दिन के तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी हुई। दिन का पारा 35 डिग्री के पार पहुंच गया। जबकि न्यूनतम तापमान में एक डिग्री की गिरावट दर्ज हुई। अधिकतम तापमान 35.5 डिग्री व न्यूनतम तापमान 22.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।

सरकारी स्कूलों में अब होगा रीडिंग पीरियड:अलग-अलग गतिविधियों से स्टूडेंट्स में विकसित होगी पढ़ने और समझने की क्षमता

सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई का मतलब केवल किताब खोलकर पाठ पढ़ लेना नहीं होगा। विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करने के साथ उन्हें पढ़ी हुई सामग्री को समझने, उस पर चर्चा करने और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने का अवसर भी मिलेगा। इसके लिए स्कूलों में प्रतिदिन सातवां कालांश विशेष रूप से पठन गतिविधियों के लिए निर्धारित किया गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने पढ़ो राजस्थान मिशन के तहत सातवें कालांश को स्ट्रक्चर्ड रीडिंग सपोर्ट पीरियड के रूप में संचालित करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत सप्ताह के प्रत्येक कार्य दिवस के लिए अलग-अलग पठन गतिविधियां निर्धारित की गई हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में नियमित पठन की आदत विकसित करने के साथ उनकी समझ, अभिव्यक्ति और चिंतन क्षमता को मजबूत करना है। पाठ्यपुस्तक से आगे बढ़ेगा पठन रीडिंग पीरियड में स्टूडेंट्स को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उनकी आयु और रुचि के अनुसार जीवनियां, बाल पत्रिकाएं, कॉमिक्स, चित्र-पुस्तकें तथा स्थानीय भाषा की पुस्तकों को भी पठन सामग्री में शामिल किया जाएगा। हर कक्षा में रीडिंग कॉर्नर विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यार्थियों को सप्ताह में कम से कम एक पुस्तक घर ले जाकर पढ़ने का अवसर भी मिलेगा। इससे स्कूल के साथ-साथ घर में भी नियमित पठन की आदत विकसित करने पर जोर रहेगा। 35 मिनट में पढ़ना, समझना और साझा करना रीडिंग पीरियड को एक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संचालित किया जाएगा। शुरुआत के करीब पांच मिनट में पिछली पठन सामग्री पर विद्यार्थियों से बातचीत होगी। इसके बाद नई सामग्री अथवा गतिविधि शुरू की जाएगी। लगभग 15 से 20 मिनट निर्धारित पठन गतिविधि और शिक्षक की गाइडेड रीडिंग के लिए होंगे। गतिविधि के अंतिम चरण में विद्यार्थी बताएंगे कि उन्होंने क्या पढ़ा, क्या समझा और उन्हें नया क्या जानने को मिला। विद्यार्थी नए शब्दों, रोचक तथ्यों या पाठ से जुड़ी अपनी बात भी शेयर करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया का मूल उद्देश्य केवल पढ़ना नहीं, बल्कि पढ़ें, समझें, चर्चा करें, साझा करें और चिंतन करें के माध्यम से विद्यार्थियों को सक्रिय पाठक बनाना है। शिक्षक की भूमिका भी महत्वपूर्ण रीडिंग पीरियड में शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाले की भूमिका में नहीं रहेंगे, बल्कि विद्यार्थियों को पढ़ने, समझने और अपनी बात रखने के लिए मार्गदर्शन देंगे। गतिविधियों के दौरान विद्यार्थियों की भागीदारी, समझ और अभिव्यक्ति पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे कक्षा में पढ़ने का वातावरण अधिक संवादात्मक और गतिविधि आधारित बनाने में मदद मिलेगी। शिक्षक संघ रेसटा ने बताया सकारात्मक कदम शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया- यह सकारात्मक कदम है। विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए रीडिंग पीरियड की व्यवस्था उपयोगी पहल है। उन्होंने कहा कि यदि सातवें कालांश को नियमित रूप से गतिविधि आधारित तरीके से संचालित किया जाए तो बच्चों में केवल पठन कौशल ही नहीं, बल्कि समझने, प्रश्न पूछने, चर्चा करने और अपनी बात रखने की क्षमता भी विकसित होगी। सलावद ने कहा कि बच्चे जब अपनी रुचि की सामग्री पढ़ेंगे, उस पर चर्चा करेंगे और उसे अपने शब्दों में व्यक्त करेंगे तो पठन उनके लिए केवल पाठ याद करने की प्रक्रिया नहीं रहेगा, बल्कि सीखने और अभिव्यक्ति का माध्यम बनेगा। रीडिंग कॉर्नर और पुस्तकें घर ले जाने की व्यवस्था से विद्यालय के साथ घर में भी पढ़ने का वातावरण तैयार होगा। इस पहल की सफलता के लिए आवश्यक है कि विद्यालयों में पर्याप्त और रुचिकर पठन सामग्री उपलब्ध हो तथा शिक्षकों को गतिविधियों के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक सहयोग मिले। पांच दिन में पांच तरह की गतिविधियां

दिन में मजदूरी और रात को चोरी करने वाली गैंग-पकड़ी:5 आरोपी गिरफ्तार; मंदिरों, मकानों को निशाना बनाते थे

पाली पुलिस ने शातिर नकबजनी गैंग का खुलासा करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी दिन में मंदिरों में पत्थर घिसाई और कमठा मजदूरी के दौरान सूने मकानों और मंदिरों की रैकी करते थे और रात में वारदात को अंजाम देते थे। सीसीटीवी कैमरों से बचने के लिए आरोपी वाहनों को घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर दूर जंगल में छिपाकर कच्चे व सुनसान रास्तों से चोरी की जगह तक पहुंचते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पाली, जालोर, सिरोही, राजसमंद और उदयपुर जिलों में दो दर्जन से अधिक नकबजनी की वारदातें करना स्वीकार किया है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की जाने वाली वैन भी जब्त की है। गैंग को पकड़ने में साइबर सेल के कांस्टेबल शैलेंद्र भाटी की मुख्य भूमिका रही। पुलिस ने बनाई विशेष टीम सीओ ग्रामीण अमरसिंह रत्नू ने बताया- करीब दो महीने पहले गुंदोज के रोहिणी माता मंदिर में चोरी की वारदात हुई थी। मामले में गुड़ा एंदला थानाधिकारी दर्शन सिंह राठौड़, साइबर सेल प्रभारी गौतम आचार्य और गुंदोज चौकी प्रभारी समद सिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने आरोपियों के बारे में सुराग जुटाए और उन्हें पूछताछ के लिए थाने लेकर आई। पूछताछ में आरोपियों ने गुंदोज के रोहिणी माता मंदिर सहित पाली, जालोर, सिरोही, उदयपुर और राजसमंद जिलों में दो दर्जन से अधिक नकबजनी की वारदातें करना स्वीकार किया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। दिन में मजदूरी रात में चोरी आरोपी दिन में मंदिरों में पत्थर घिसाई व कमठा मजदूरी का काम करते बाइक और कार से घूमकर सूने मकानों और मंदिरों की रैकी करते थे। रात में वारदात को अंजाम देने से पहले आसपास के लोगों की आवाजाही पर नजर रखते और जरूरत पड़ने पर पड़ोसी मकानों के बाहर से कुंडी लगा देते थे। सीसीटीवी से बचने के लिए वाहन घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर दूर जंगल में छिपाकर कच्चे व सुनसान रास्तों से वारदात स्थल तक पहुंचते थे। चोरी का सामान औने-पौने दामों में बेच देते थे। इन आरोपियों को किया गिरफ्तार उदयपुर जिले के गोगुंदा थाना क्षेत्र के रावलिया गांव निवासी गोपाल (31) पुत्र हरजा, नाल पुलिस थाना गोगुंदा निवासी बंशी (24) पुत्र अणदाराम, उमा (22) उर्फ उमेश पुत्र अणदाराम, सुरेश (26) पुत्र धनाराम और गोपिया (26) उर्फ गोपीलाल पुत्र धनाराम को गिरफ्तार किया।

त्योहारी सीजन में हवाई किराया बिगाड़ेगा बजट:जयपुर से अहमदाबाद-कोलकाता जाना महंगा; दिवाली पर बेंगलुरु-मुंबई से लौटने का किराया 27 हजार तक

त्योहारी सीजन में हवाई सफर करने वाले यात्रियों को इस बार जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। नवरात्रि से लेकर दीपावली तक हवाई किराए में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जयपुर से अहमदाबाद और कोलकाता जाने वाले यात्रियों के साथ ही दिवाली पर दूसरे शहरों से जयपुर लौटने वालों का यात्रा बजट भी बिगड़ रहा है। त्योहारों के दौरान यात्रियों की बढ़ती मांग के बीच अलग-अलग फ्लाइट्स के किराए में भी बड़ा अंतर सामने आ रहा है। स्थिति यह है कि कुछ रूट्स पर हवाई टिकट की कीमत 20 हजार रुपए से अधिक पहुंच गई है। वहीं दिवाली से पहले धनतेरस पर बेंगलुरु से जयपुर आने के लिए यात्रियों को करीब 27 हजार रुपए तक खर्च करने पड़ सकते हैं। जयपुर-अहमदाबाद के रूट पर इंडिगो की चार फ्लाइट्स उपलब्ध हैं, लेकिन इसके बावजूद अलग-अलग फ्लाइट्स के किराए में काफी अंतर देखने को मिल रहा है। त्योहारों के दौरान यात्रा की तारीख बदलने से यात्रियों के खर्च में अंतर आ सकता है। वहीं जयपुर से कोलकाता के रूट पर इंडिगो की तीन फ्लाइट्स उपलब्ध हैं। दिवाली पर जयपुर लौटना भी महंगा, बेंगलुरु से किराया 27 हजार रुपए तक दीपावली के अवसर पर दूसरे शहरों में रहने वाले लोगों के जयपुर लौटने का खर्च भी बढ़ गया है। मुंबई से जयपुर के लिए 14 फ्लाइट्स उपलब्ध होने के बावजूद किराए में बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है। वहीं बेंगलुरु से जयपुर आने के रूट पर 7 फ्लाइट्स उपलब्ध हैं। इसके बावजूद यात्रियों को टिकट के लिए काफी अधिक रकम खर्च करनी पड़ सकती है। हैदराबाद से जयपुर आने वाले यात्रियों को भी धनतेरस पर महंगे हवाई सफर का सामना करना पड़ेगा। इस रूट पर टिकट का किराया 14,728 रुपए से लेकर 16,775 रुपए तक पहुंच गया है। चेन्नई से जयपुर के लिए एक फ्लाइट उपलब्ध है, जिसका किराया 24,211 रुपए बताया जा रहा है। ऐसे में दक्षिण भारत के शहरों से जयपुर आने वाले यात्रियों को भी त्योहार के दौरान सफर के लिए अधिक खर्च करना पड़ सकता है। अहमदाबाद से जयपुर 16 हजार के पार दिवाली के दौरान अहमदाबाद से जयपुर आने वाले यात्रियों के लिए भी हवाई टिकट सस्ता नहीं है। 6 नवंबर को इस रूट पर किराया 13,800 रुपए से लेकर 16,665 रुपए तक पहुंच गया है। वहीं, कोलकाता से जयपुर आने का किराया 9,095 रुपए से 12,455 रुपए तक है। गोवा से जयपुर के लिए एक फ्लाइट उपलब्ध है, जिसका किराया 11,916 रुपए है। त्योहारी सीजन में हवाई किराए में बढ़ोतरी के चलते यात्रियों को यात्रा की योजना बनाते समय टिकट की कीमतों पर विशेष ध्यान देना पड़ रहा है। जयपुर से अहमदाबाद और कोलकाता जाने के साथ ही मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई, अहमदाबाद, कोलकाता और गोवा से जयपुर लौटने वालों के लिए भी हवाई सफर का खर्च बढ़ा हुआ है। अलग-अलग फ्लाइट्स और यात्रा की तारीखों के अनुसार किराए में अंतर होने से यात्रियों को टिकट बुक करने से पहले उपलब्ध विकल्पों की कीमतों की तुलना करनी पड़ रही है। -

दादी के पैर से चांदी के कड़े काटने वाला पोता-गिरफ्तार:12 घंटे में पुलिस ने पकड़ा; कम दिखाई देने का फायदा उठाकर वारदात को अंजाम दिया

सवाईमाधोपुर के शेरपुर गांव में 75 साल की वृद्ध महिला के पैर से चांदी के कड़े काटकर ले जाने वाला ओर कोई नहीं बल्कि खुद का पोता ही निकला है। पुलिस ने वारदात का खुलासा करते हुए पोते को पकड़ लिया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने महिला की कम दिखाई देने की स्थिति का फायदा उठाकर वारदात को अंजाम दिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान विजय सैनी (20) पुत्र कमलेश सैनी, निवासी शेरपुर के रूप में हुई है। मामला कुण्डेरा थाना क्षेत्र का है। कटर से काटे चांदी के कड़े कुण्डेरा थानाधिकारी दिलीप कुमार ने बताया- 1 अक्टूबर को रामावतार पुत्र गोपाल निवासी शेरपुर ने गणेश धाम चौकी पर रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उनकी मां मथुरा देवी (75) घर में अकेली थीं। इसी दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने कटर से उनके पैर में पहने चांदी के कड़े काटकर ले लिए। कटर से चोट लगने के कारण महिला के पैर में चोट आई, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल सवाई माधोपुर में भर्ती कराया गया। रिपोर्ट पर कुण्डेरा थाने में मामला दर्ज कर जांच एसआई हेमसिंह को सौंपी गई। तकनीकी और मुखबिर तंत्र से आरोपी तक पहुंची पुलिस गणेश धाम चौकी प्रभारी हेमसिंह ने चौकी जाब्ते के साथ घटनास्थल के आसपास जानकारी जुटाई। पुलिस ने तकनीकी सहायता और मुखबिर तंत्र के जरिए आरोपी की तलाश शुरू की। पुलिस के अनुसार, लगातार प्रयासों के बाद घटना के महज 12 घंटे के भीतर विजय सैनी को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में पुलिस के सामने आया कि वारदात को महिला के पोते ने ही अंजाम दिया था। पुलिस के अनुसार उसने दादी के कम दिखाई देने का फायदा उठाया और कटर से चांदी के कड़े काटकर ले गया। पुलिस टीम ने की कार्रवाई थानाधिकारी के अनुसार कार्रवाई एसपी सवाई माधोपुर ज्येष्ठा मैत्रेयी आईपीएस के निर्देशन में, एएसपी सवाई माधोपुर राकेश राजौरा आरपीएस और डीएसपी साइबर थाना सवाई माधोपुर जयप्रकाश अटल के निकट सुपरविजन में की गई। कार्रवाई में कुण्डेरा थानाधिकारी दिलीप कुमार के नेतृत्व में गणेश धाम चौकी प्रभारी हेमसिंह उप निरीक्षक और चौकी जाब्ते की भूमिका रही। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर मामले में आगे की जांच कर रही है। ये खबर भी पढ़ें… घर में बुजुर्ग महिला से लूट, मुंह में कपड़ा ठूंसा:पैरों पर धारदार हथियार से किए वार, चांदी का कड़ा निकाल ले गए सवाई माधोपुर में घर में अकेली बुजुर्ग महिला के पैर पर धारदार हथियार से हमला कर बदमाश एक पैर से चांदी का कड़ा निकालकर फरार हो गए। बदमाशों ने महिला के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया था। महिला का पोता स्कूल से घर पहुंचा तो घटना का पता चला। पूरी खबर पढ़ें…

निगम चुनाव खर्च के ब्यौरे में सामने आए रोचक आंकड़े:प्रत्याशियों ने ई-रिक्शा का 1600 किराया बताया, लग्जरी कारों का रेंट सिर्फ 1000 रुपए दर्शाया

कोटा नगर निगम चुनाव में नवनिर्वाचित पार्षदों की ओर से निर्वाचन आयोग को पेश किए गए चुनाव खर्च के ब्यौरे में कई रोचक आंकड़े सामने आए हैं। सबसे ज्यादा अंतर प्रचार में इस्तेमाल वाहनों के किराए में दिखाई दिया। वार्ड 70 से कांग्रेस पार्षद यूनुस मोहम्मद ने मारुति ब्रेजा, किआ सेल्टोस और किआ सोनेट जैसी गाड़ियों का किराया महज 1000 प्रतिदिन बताया है। उन्होंने प्रत्येक गाड़ी के 6 दिन के लिए 6000 खर्च दर्शाया। वहीं वार्ड 75 से भाजपा पार्षद क्रांति जैन ने ई-रिक्शा का किराया 1600 प्रतिदिन बताया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि 1000 रोज के किराए में लग्जरी कारें उपलब्ध हुईं तो ई-रिक्शा का किराया इससे ज्यादा कैसे रहा। रामदेव वर्मा ने सबसे ज्यादा, नीतू कंवर ने सबसे कम खर्च बताया चुनाव आयोग को दिए ब्यौरे के अनुसार वार्ड 23 से भाजपा पार्षद रामदेव वर्मा ने सबसे ज्यादा 3,16,950 चुनाव खर्च बताया। वहीं वार्ड 47 से भाजपा पार्षद नीतू कंवर ने महज 26,471 खर्च दर्शाया। पार्षद चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग ने अधिकतम खर्च की सीमा 3.50 लाख रुपए तय की थी। ज्यादातर प्रत्याशियों ने खर्च में माइक, टेंट, वाहन और पोस्टर-बैनर को शामिल किया है। कुछ प्रत्याशियों ने चाय-नाश्ते और अल्पाहार का खर्च भी दर्शाया। आंकड़ों से यह भी सामने आता है कि अधिक खर्च करने वाले प्रत्याशी हर वार्ड में जीत हासिल नहीं कर सके। कई वार्ड में कम खर्च करने वाले प्रत्याशियों को मतदाताओं ने जीत दिलाई। मेयर ने 53,933, डिप्टी मेयर ने 1.07 लाख खर्च बताए वार्ड 98 से निर्वाचित मेयर अनुसूईया गोस्वामी ने चुनाव में 53,933 खर्च बताया है। उनके ब्यौरे में वाहन पर कोई खर्च नहीं है। उन्होंने प्रचार सामग्री पर 24,287, टेंट पर 19,400, भोजन व चाय-नाश्ते पर 9000 और बूथ शुल्क के रूप में 1246 खर्च दर्शाया है। वहीं वार्ड 54 से डिप्टी मेयर विवेक राजवंशी ने 1,07,300 खर्च बताया। इसमें प्रचार सामग्री यानी पोस्टर-बैनर पर 16,400, कार्यकर्ताओं के भोजन पर 78,000 तथा टेंट, टेबल-कुर्सी, नाश्ता और पानी पर 12,800 खर्च दर्शाया गया है। निर्दलीयों में कौशल किशोर शर्मा का खर्च सबसे ज्यादा निर्दलीय पार्षदों में वार्ड 49 के कौशल किशोर शर्मा ने सबसे ज्यादा 1.56 लाख चुनाव खर्च बताया। वार्ड 72 के राहुल माथुर ने 78,500, वार्ड 77 की रानी ने 48,349 और वार्ड 71 की वंदना फौजदार ने 44,656 खर्च दर्शाया है। चुनाव खर्च के इन आंकड़ों में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि प्रचार पर ज्यादा पैसा खर्च करना जीत की गारंटी नहीं बना। कई वार्ड में कम खर्च करने वाले प्रत्याशियों ने ज्यादा खर्च करने वाले उम्मीदवारों को पीछे छोड़कर चुनाव जीता।

सलू्ंबर में रोजगार उत्सव कार्यक्रम:नव-नियुक्त कार्मिकों को दिए सर्टिफिकेट, सीएम के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखा

सलूंबर में शुक्रवार शाम को जिला स्तरीय रोजगार उत्सव आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के नव नियुक्त कार्मिकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों, युवाओं और नव नियुक्त कार्मिकों ने भाग लिया। इस दौरान सीएम के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण किया गया। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को शिक्षा और अन्य सुविधाओं के लिए शहरों की ओर जाने की जरूरत कम करने के लिए अटल सेवा केंद्रों के माध्यम से सुविधाएं उपलब्ध कराने के संकल्प की जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश में हुए विकास कार्यों और विद्युत क्षेत्र में किए गए कार्यों की जानकारी दी।

अजमेर- घर में घुसकर महिलाओं से छेड़छाड़:विरोध करने पर मारपीट का आरोप; ग्रामीणों ने तीन युवकों को लाठी-डंडों से आधे घंटे तक पीटा

अजमेर के आदर्शनगर थाना क्षेत्र में महिलाओं से छेड़छाड़ के आरोप में ग्रामीणों ने उत्तर प्रदेश नंबर की कार में सवार युवकों की जमकर पिटाई कर दी। युवकों की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने तीन युवकों को हिरासत में लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जानकारी के अनुसार, यूपी नंबर की कार में सवार युवक क्षेत्र के एक रेस्टोरेंट में शराब पी रहे थे। आरोप है कि नशे की हालत में युवक पास के एक घर में घुस गए। यहां उन्होंने महिलाओं के साथ अभद्रता और छेड़छाड़ की। विरोध करने पर मारपीट करने का भी आरोप है। सबसे पहले देखें वारदात की कुछ तस्वीरें...... आधे घंटे तक मारपीट घटना के दौरान शोर सुनकर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने युवकों को घेर लिया और लाठी-डंडों से उनकी पिटाई शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि करीब आधे घंटे तक युवकों के साथ मारपीट होती रही। इसी दौरान किसी ने घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर सामने आया। सूचना मिलने पर आदर्शनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तीन युवकों को हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। घटना में शामिल लोगों और महिलाओं की शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

होमगार्ड भर्ती-2022 में फर्जी डॉक्यूमेंट से ली नौकरी:17 अभ्यार्थियों के खिलाफ मामला दर्ज; खेलकूद, स्काउट, आईटीआई और कंप्यूटर के प्रमाण-पत्रों में गड़बड़ी का खुलासा

बाड़मेर में होमगार्ड सीमा गृह रक्षा दल भर्ती 2022 में बड़ा फर्जीवड़ा सामाने आया है। नौकरी पाने के लिए अभ्यर्थियों ने फर्जी खेलकूद, स्काउट, आईटीआई, कंम्प्यूटर, जाति प्रमाण-पत्र सर्टिफिकेट जमा करवा दिए। जांच में खुलासा होने के बाद 17 अभ्यार्थियों के खिलाफ सीमा गृह रक्षा दल बाड़मेर के अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी दीपसिंह ने कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दी है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। दस्तावेजों के सत्यापन में सामने आई गड़बड़ी शिकायत के अनुसार साल-2022 की गृह रक्षा स्वयंसेवक भर्ती प्रक्रिया में कुछ अभ्यर्थियों ने चयन सूची में स्थान बनाने और बोनस अंक हासिल करने के लिए फर्जी डॉक्यूमेंट प्रस्तुत किए। विभाग की ओर से दस्तावेजों की जांच और सत्यापन कराया गया तो कई प्रमाण-पत्र संदिग्ध पाए गए। होमगार्ड कमांडेंट महेंद्र सिंह के अनुसार भर्ती के दौरान 17 अभ्यर्थियों की ओर से प्रस्तुत खेलकूद, स्काउट, आईटीआई और कंप्यूटर के प्रमाण-पत्र जांच में फर्जी पाए गए। इसके बाद पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया गया। गलत जाति प्रमाण-पत्र लगाने का भी आरोप जांच में एक अभ्यर्थी पर अपनी वास्तविक जाति छिपाकर गलत वर्ग का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने का भी आरोप है। शिकायत के मुताबिक संबंधित अभ्यर्थी एसटी वर्ग से होने के बावजूद एससी वर्ग का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया था। स्काउट, स्पोर्ट्स, कंप्यूटर, आईटीआई फर्जी प्रमाण-पत्र पाए अभ्यर्थियों की ओर से प्रस्तुत किए गए स्काउट-गाइड, स्पोर्ट्स, कंप्यूटर और आईटीआई के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। इतना ही नहीं एक अभ्यर्थी ने अपनी जाति छिपाकर गलत वर्ग का प्रमाण पत्र तक लगा दिया। अब जांच के दौरान खुलासा होने पर 17 अभ्यर्थियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। होमगार्ड कमांडेंट महेंद्र सिंह ने बताया- होमगार्ड सीमा गृह रक्षा दल भर्ती 2022 के दौरान नौकरी पाने वाले 17 अभ्यर्थियों ने खेलकूद, स्काउट, आईटीआई और कंप्यूटर के सर्टिफिकेट जांच करने पर फर्जी पाए गए। अब मुकदमा दर्ज करवाया है। फर्जी प्रमाण पत्र मामले में दर्ज अभ्यार्थियों की सूची

राजस्थान- 10 साल के सबसे बड़े अकाल का खतरा:11 से ज्यादा जिले सूखे की चपेट में, 50% से कम बारिश, चलानी पड़ेगी पानी की ट्रेन

कमजोर मानसून के कारण राजस्थान के सामने 10 साल के सबसे बड़े अकाल का खतरा खड़ा हो गया है। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के सूत्रों के अनुसार 11 जिले सूखे की चपेट में हैं। यहां सामान्य से 25% तक कम बारिश हुई है। इनमें 3 की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यहां सामान्य से 50% से भी कम बारिश हुई। आशंका है कि अगली गर्मियों में 2-3 जिलों में पानी की ट्रेन चलानी पड़ सकती है। बाजरा, मूंग, ग्वार जैसी फसलों को नुकसान हुआ है। अन्य राज्यों से खाद्य सामग्री आयात करनी पड़ेगी, जिससे महंगाई बढ़ सकती है। चिंता यह है कि पड़ोसी राज्यों में भी हालत बेहतर नहीं है। पंजाब में सामान्य से 41%, हरियाणा में 23, गुजरात में 10 और एमपी में सामान्य से 4% कम बारिश हुई। 10 साल में इस बार सबसे ज्यादा जिलों में अकाल के हालात राजस्थान में 2015 के बाद अब 2026 में ज्यादा जिले सूखे से प्रभावित होने की आशंका बन गई है। 2015 में बारिश सामान्य से 9 फीसदी ज्यादा हुई थी, लेकिन छितराई हुई होने के कारण 19 जिलों की कई तहसीलों में सूखे के हालात बन गए थे। इस बार दोहरी मार है, बारिश भी छितराई हुई रही और सामान्य से करीब 19 फीसदी कम भी रही। पटवारियों की टीम राज्य से प्रभावित इलाकों में सर्वे में जुटी हुई है। सभी जिलों की गिरदावरी रिपोर्ट (फसल खराबा और अकाल के हालात, जिन्हें सरकारी भाषा में अभावग्रस्त क्षेत्र कहा जाता है) कलक्टरों के जरिए राजस्व विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग तक पहुंचेगी। फसल खराबे और सूखे के हालातों को लेकर 15 अक्टूबर के बाद रिपोर्ट सौंपी जाएगी। फिलहाल सर्वे का अंतिम दौर चल रहा है। सरकार इस रिपोर्ट के बाद अभावग्रस्त (सूखा) जिलों और तहसीलों की सूची जारी करेगी। इसके बाद सूखा प्रभावित जिलों की संख्या कितनी है, ये स्थिति साफ हो जाएगी। संबंधित विभागीय सूत्रों ने बताया शुरुआती सर्वे से साफ है कि इस बार 11 से अधिक जिले सूखे की चपेट में आ रहे हैं। सबसे ज्यादा खराब हालत पाली, जैसलमेर और जालोर जिले में हैं। यहां की अधिकतर तहसीलें प्रभावित हैं और किसानों का काफी नुकसान हुआ है। तीनों जिलों में सामान्य से 50 फीसदी तक कम बारिश हुई है। वहीं बांसवाड़ा, सिरोही, हनुमानगढ़, उदयपुर, राजसमंद, बालोतरा, भीलवाड़ा और जोधपुर में भी कई तहसीलों में कम बरसात के कारण अकाल के हालात बन गए हैं। पिछली बार 23 जिलों में 60 फीसदी से ज्यादा बारिश राजस्थान में पिछली बरसात के आंकड़ों से इस बार की बारिश की तुलना करें तो निराशा हाथ लगती है। पिछली बार 23 जिले ऐसे थे, जहां सामान्य से 60 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई थी। लेकिन इस बार पूरे मानसून में एक भी जिला ऐसा नहीं है, जहां बहुत ज्यादा बारिश हुई हो। वहीं पिछली बार केवल 1 जिला ऐसा था जहां सामान्य बारिश हुई थी, लेकिन इस बार 24 जिले ऐसे हैं, जहां बारिश सामान्य रही। पिछली बार एक भी जिला ऐसा नहीं था, जो बरसात की कमी से जूझा हो। लेकिन इस बार 14 जिले ऐसे हैं जो बरसात की कमी से जूझ रहे हैं। सामान्य माने जाने वाले 24 में से 18 जिले माइनस में प्रदेश में कम बारिश की मार राजधानी जयपुर पर भी पड़ी है। हालांकि मौसम विभाग ने यहां सामान्य बारिश मानी है। मौसम विभाग सामान्य से 19 फीसदी कम बारिश को नॉर्मल में गिनता है। ऐसे में राजस्थान के 24 जिले सामान्य बरिश वाले माने जा रहे हैं। यदि लिस्ट देखें तो इन 24 में से 18 जिलों में बरसात के आंकड़े माइनस में हैं। टोंक, जयपुर, चित्तौड़गढ़ जैसे जिलों में सामान्य से 17 फीसदी से भी कम बरसात हुई है। वहीं बारां और अजमेर में सामान्य से 15 फीसदी से भी कम बारिश दर्ज हुई है। केवल 6 जिलों में आंकड़े प्लस में दिखाई दे रहे हैं। इनमें से फलोदी व भरतपुर के ही आंकड़े दहाई को पार कर पाए हैं। केवल 3 जिलों में 24% से ज्यादा बरिश यहां 41 में से केवल 3 जिले हैं, जहां मानसून कुछ मेहरबान रहा। धौलपुर, डीग और सलूम्बर में 24 से 28 फीसदी तक अधिक बरसात हुई। पिछले सीजन की बात करें तो 17 जिलों में सामान्य से 20 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी। जैसी आशंका जताई, वैसा ही रहा मानसून मौसम विभाग ने मानसून के पूर्वानुमान के तहत अल नीनो प्रभाव के कारण छितराई और कमजोर बरसात होने की आशंका जताई गई थी, जो सही साबित हो गई। मानसूनी बादल भी मैदानी इलाकों से खिसककर उत्तर में हिमालय की पहाड़ियों की ओर शिफ्ट हो गए। इस कारण मैदानी इलाकों में बरसात छितराई हुई रही। ओवरऑल देखें, तो आंकड़ा भले ही सामान्य से माइनस 17 एमएम कम बरसात होने का है, लेकिन छितराई बरसात के कारण कई इलाकों में बरसात नाम मात्र की हुई है। इससे ज्यादा नुकसान हुआ है। राजस्थान में मौसम विभाग निदेशक राधे श्याम शर्मा के अनुसार मानसून से पहले ही कम बारिश का पूर्वानुमान लगा लिया गया था। राजस्थान में वैसा ही कम बरसात का दौर देखने को मिला। दक्षिणी राजस्थान के अधिकतर जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई। शुरूआत से देखें तो जून-जुलाई के महीने में मानसून करीब-करीब सामान्य रहा। इसके बाद अगस्त और सितंबर में मानसूनी बारिश काफी कम रिपोर्ट हुई। इससे पहले देखें तो 2009 में सामान्य से कम बरसात हुई थी, तब केवल 249 एमएम बरसात हुई थी। ये सामान्य से करीब 43 फीसदी कम थी। कुछेक जिलों में पानी वाली रेल, सिंचाई के लिए किसान होंगे परेशान कम बरसात ने पीने के पानी और सिंचाई, दोनों की ही कमी कर दी है। पिछले साल मानसून के बाद राजस्थान के बांध जो 90.5 फीसदी भरे हुए थे। वे इस मानसून के बाद 62 फीसदी के आस-पास ही भर पाए हैं। इससे किसानों के लिए खेती को लेकर काफी चुनौतियां रहने वाली हैं। वहीं पेयजल प्रबंधन के लिए सरकार को अतिरिक्त बजट खर्च करना पड़ेगा। आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने पाली सहित कुछेक जिलों में पानी की ट्रेन चलाए जाने की बात से इंकार नहीं किया है। इससे पहले पाली में 2022 में जोधपुर से पानी की ट्रेन भेजी गई थी। बांध भराव के मामले में सबसे बुरा हाल जोधपुर जोन का है। यहां बांधों में क्षमता के मुकाबले 16 फीसदी ही भराव रह गया है, जबकि जोधपुर जोन के बांध पिछले मानसून के बाद 80 फीसदी से ज्यादा भर गए थे। वहीं जयपुर, उदयपुर, कोटा और बांसवाड़ा सभी जोनों में बांधों की स्थिति पिछले मानसून की तुलना में काफी खराब है। केवल भरतपुर जोन के बांधों में पिछले मानसून के मुकाबले 1 फीसदी ज्यादा पानी आया है। महंगा होगा दाल-बाजरा और पशुओं का चारा राजस्थान में बारिश की कमी और सूखे जैसी स्थिति बनने से बाजरा, ग्वार, मूंग, मोठ और सोयाबीन जैसी प्रमुख खरीफ की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इससे खाद्य सामग्री पर महंगाई की मार पड़ने की आशंका है। वहीं अगली गर्मियों में पशुओं के लिए चारा संकट खड़ा होने की भी आशंका है। चारा महंगा होगा तो दूध और इससे बनने वाले प्रोडक्ट पर भी महंगाई का साया पड़ सकता है। राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट कैलाश शर्मा के अनुसार कम बरसात के कारण राजस्थान में अन्य राज्यों और क्षेत्रों से पशु आहार और आवश्यक खाद्य सामग्रियों को आयात करना होगा। सब्जियां भी महंगी होंगी। इससे आर्थिक बोझ कुछ बढ़ जाएगा। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कामगारों की आर्थिक स्थिति ज्यादा प्रभावित होगी। 1-1 करोड़ की राशि स्वीकृत करने का अधिकार राज्य सरकार को कई जिलों में राहत कार्य शुरू करने पड़ गए हैं। पीने के पानी के लिए टैंकर व्यवस्था को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया है। कम बारिश वाले जिलों में कलेक्टरों को 1-1 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत करने का अधिकार दे दिया गया है। वहीं चारे की कमी से निपटने के लिए बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर सहित आस-पास के जिलों में नए चारा डिपो खोलने के आदेश भी दे दिए गए हैं। …. मौसम की ये खबर भी पढ़िए… अक्टूबर में भी पारा 40 डिग्री के ऊपर:रात के तापमान में तेजी से गिरावट; जानें- अगले एक हफ्ते कैसा रहेगा मौसम राजस्थान में अक्टूबर में भी दिन के समय तेज गर्मी है। पारा 40 डिग्री के ऊपर पहुंच गया है। सबसे ज्यादा असर पश्चिमी जिलों में है। शुक्रवार को सबसे अधिक तापमान पिलानी (झुंझुनूं) में दर्ज हुआ। पूरी खबर पढ़िए…

धरने पर कोई 'लल्लू-पंजू' नहीं बैठा:चीफ साहब बोले-'विश्वेंद्र मुझसे प्यार करते हैं'; वनमंत्री के पीछे दौड़े 'मेयर-पति'

नमस्कार, चीफ साहब को पूर्व मंत्रीजी ने ‘आखिरी सलाम’ वाला मैसेज भी कर डाला। हालांकि डोटासरा जी का कहना है कि ‘वे तो मुझसे प्यार करते हैं’। डोटासरा को भीलवाड़ा में भी इसी तरह डैमेज कंट्रोल करना होगा। अलवर में मेयर के प्रोग्राम से वनमंत्री खफा होकर चल पड़े। मेयर पति के दौड़ लगाने पर भी नहीं रुके। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. ‘अलविदा’ और ‘प्यार’ राजनीति में अहम मौकों पर आत्मा की आवाज सुनी जाती है। आत्मा कभी-कभी ही पुकारती है। लेकिन जब पुकारती है तो घटनाक्रम का सिलसिला तैयार कर देती है। यूं तो वे पूर्व मंत्री हैं और पिछला विधानसभा चुनाव हार गए। लेकिन पूर्व राजपरिवार से होने के कारण उनका काफी रुतबा है। राजनीति में उन्होंने 40 साल से ज्यादा समय बिताया। इस दौरान दोनों प्रमुख दलों में रहकर पदों को शोभायमान किया। बीते हुए राजतंत्र के असर के चलते बगावत करना उनका रुचिकर विषय है। पिछले शासनकाल में पार्टी के एक धड़े के साथ उन्होंने दिल्ली कूच कर दिया था। बाद में उन्हें मना लिया गया और सरकार बच गई। विधानसभा चुनाव हारने के बाद वे स्वास्थ्य और निजी परेशानियों से भी गुजरे। लेकिन वक्त के साथ सब ठीक हो गया। उनकी नजर में जो ठीक नहीं हुआ वह था भरतपुर और डीग के जिलाध्यक्षों की कार्यशैली। साथ ही निकाय चुनाव में जिन्हें टिकट दिया गया, उन्होंने भरतपुर में भद पिटवा दी। इसी बात को आधार बनाकर उन्होंने चीफ साहब को घेर लिया। सिर्फ घेरा नहीं, बल्कि भयंकर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से जांच तक की मांग कर दी। मन की भड़ास निकाल लेने के बाद उन्होंने संगठन के मुखियाजी से कह दिया कि अब आपसे अलविदा ले ली जाए इसी में भलाई है। अलविदा को उनका इस्तीफा मानकर खबर उड़ा दी गई कि ‘राजा साहब’ ने कांग्रेस छोड़ दी। कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने प्रजा जैसा भाव दिखाते हुए सोशल मीडिया के मैदान में पोस्टों के घुड़सवार छोड़ दिए। लिखा- हुकुम। आपका स्वाभिमान हमारा मान है। आप जो इशारा कर देंगे, हम वही कर डालेंगे। कुल मिलाकर जो डैमेज हो रहा था वह कंट्रोल के दायरे से बाहर निकलता जा रहा था। उस पर चीफ साहब ने ‘टूलकिट’ का नाम देकर आग में घी डाल दिया था। लेकिन बाद में उनके तेवर नरम दिखे। उन्होंने कहा कि विश्वेंद्र जी तो मुझसे बहुत प्यार करते हैं। आशीर्वाद बनाए रखते हैं। सोशल मीडिया का क्या भरोसा, उनसे बात होगी तो सब साफ हो जाएगा। 2. मेयर पति को 'डेकोरम' का सबक अगर आपका कोई प्रियजन, जानकार, छोटा भाई, बड़ा भाई, जिगरी यार, लंगोटिया आदि मंत्री पद की शपथ ले ले, तो यह मानकर उससे प्रियजन, जानकार, छोटा भाई, बड़ा भाई, जिगरी यार, लंगोटिया जैसा व्यवहार मत कीजिएगा। आपको यह ध्यान रखना पड़ेगा कि अब उसका एक प्रोटोकॉल है और वह एक डेकोरम मेंटेन करता है। अगर आपने यारी-दोस्ती में डेकोरम बिगाड़ने की कोशिश की। तो हो सकता है कि छोटा भाई बिगड़कर निकल जाए और आप सोचते रह जाएं कि आखिर हुआ क्या? यह ज्ञान इसलिए झाड़ना पड़ा क्योंकि अलवर में मेयर के पतिदेव के साथ ऐसा ही हुआ। गांधी जयंती पर छोटा सा प्रोग्राम मेयर की ओर से किया गया था। प्रोग्राम में वन मंत्रीजी भी पहुंचे। उन्होंने गांधीजी-शास्त्रीजी की तस्वीरों पर फूल चढ़ाए, गांधीजी की मूर्ति को माला पहनाई और सीधे कार की ओर चल पड़े। न मेयर से कुछ कहा और न मेयर-पति से। बात फैल गई कि मंत्रीजी नाराज होकर जा रहे हैं। मेयर-पति को पता चला तो कार की तरफ ‘रोको-रोको’ चिल्लाते हुए दौड़े। आवाज को अनसुना कर मंत्रीजी रवाना हो गए। जिन मंत्रीजी महोदय ने मेयर चुने जाने के बाद रो-रोकर अपनी भावनाएं जाहिर की थी, वे इस तरह नाराज होकर चल दें, ये कैसे हो सकता है? घबराए मेयर-पति ने पत्नी को साथ लिया और सीधे साहब के बंगले पर पहुंच गए। वहां जैसा कि हर नाराज व्यक्ति दावा करता है कि कैसी नाराजगी? मैं तो परिवार का बच्चा हूं। मैं तो आपका छोटा भाई हूं। आप तो मेरे बड़े हैं। हम तो एक ही परिवार के सदस्य हैं। ऐसे ही दावे मंत्रीजी की ओर से किए गए। मेयर-पति ने राहत की सांस ली। लेकिन उन्हें घटनाक्रम का कुछ-कुछ अंदाजा हो गया। वे खिसियानी सी घबराहट के साथ बोले- हमने तो अभी नया-नया काम संभाला है, प्रोटोकॉल जानते नहीं। बाकी मंत्री का डेकोरम होता है। आगे से उसका ध्यान रखेंगे। 3. भीलवाड़ा में भी ‘डैमेज-कंट्रोल की मांग’ सयुंक्त परिवार टूट कर बिखर चुके। अब तो परिवार के 4 सदस्यों को भी एकजुट रखना टेढ़ी खीर है। ऐसे में सोचिए कि संगठन का मुखिया कैसे मैनेज करता होगा? एक तरफ भरतपुर वाले नेताजी ‘राजा साहब’ बने हुए हैं तो दूसरी तरफ भीलावड़ा में निकाय चुनाव की हार को पीसीसी सदस्य पचा नहीं पा रहे हैं। भीलवाड़ा में कांग्रेस के 17 सिंबल ऐन वक्त तक नहीं पहुंचे थे। इस पर कांग्रेस के ही मनोज पालीवाल ने आरोप लगाया दिया कि मुखियाजी 'मैनेज' हो गए। अब हार का ठीकरा प्रदेशाध्यक्ष पर फोड़ते हुए कभी हवन-यज्ञ कर रहे हैं, कभी चरखा चला रहे हैं, कभी गूंगे-बहरे-अंधे प्रतीक बनाकर गांधीजी की 'लाठी' थामे भजन गाते चल रहे हैं। एक युवक के आंखों पर पट्‌टी, दूसरे के कानों पर और तीसरे के मुंह पर पट्‌टी बांधकर पालीवाल जी ने शहर का दौरा किया। जो देखे वही अचंभा करे। पूछने पर आहत स्वर में बोले- संगठन का नेतृत्व इन्हीं तीन बंदरों के समान हो चुका है। उन्हें न दिखाई देता है, न सुनाई देता है और न वे कुछ बोलते हैं। 4. चलते-चलते.. नेतागण जब सड़कों पर उतरने लगें तो समझ लीजिए कि चुनाव नजदीक हैं। किसानों का मुद्दा लेकर कोटा के इटावा में पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने भी सिर पर आसमान उठाया हुआ है। वे कहते नहीं हैं, ललकारते हैं। उनकी भाषा में ही सारे हथियार अस्त्र-शस्त्र होते हैं। इटावा में खाद, नहर के पानी, फसल खराबे को लेकर किसान हुंकार रैली हुई थी। रैली के जरिए गुंजल जी खूब गूंजे। आर-पार की जंग की चेतावनी दे दी। सरकार को घेरा। नेताओं पर आरोप लगाए। सभा में मन की भड़ास भली-भांति निकालने के बाद वे रैली के रूप में एसडीएम कार्यालय की तरफ बढ़े। चूंकि वे खुद को फायरब्रांड नेता मानते हैं, ऐसे में उनका मानना है कि एसडीएम और डिप्टी एसपी को भी उन्हें फायरब्रांड ही मानना चाहिए और अपने दफ्तर छोड़कर जहां वे धरना दे रही हैं, वहीं आकर चुपचाप ज्ञापन ले लेना चाहिए। दुर्भागय से एसडीएम और डिप्टी एसपी ऐसा नहीं मानते, वे अपने दफ्तरों में कुर्सियों पर काबिज रहे। उन्होंने नियम से चलने का प्रयास किया और कह दिया कि पांच लोग आकर ज्ञापन दे दो। जब तक नेताजी के चारों ओर जन-सागर न हो, और उस जन-समुद्र में लहरें न उठ रही हों, तब तक ज्ञापन देने में क्या आनंद है। इसी नियम को याद रखते हुए उन्होंने मौके पर एसडीएम और डिप्टी को बुलाया था। दवाब बढ़ने लगा तो अधिकारी बाहर निकले। गुंजल ने उन्हें फटकारते हुए कहा- धरने पर कोई लल्लू पंजू नहीं बैठा। प्रहलाद गुंजल बैठा है। राज आने दो, तुमको टांग दूंगा। बाहर आने में जोर आ रहा था? इनपुट सहयोग- रईस पठान (इटावा, कोटा), धर्मेंद्र यादव (अलवर), गौरव माथुर (भरतपुर), मनीष जैन (भीलवाड़ा)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

डोटासरा पर संगीन आरोप, विश्वेंद्र सिंह को नोटिस:'नसीहत की जरूरत नहीं....' पोस्ट से कांग्रेस में भूचाल, क्या आर-पार के मूड में आलाकमान?

'मैंने हमेशा मान-सम्मान और स्वाभिमान से जीवन जिया है, मेरे उसूल और आदर्शों से कभी कोई समझौता नहीं किया। मेरे कार्यकर्ताओं में मौजूदा चापलूसी की परंपरा के कारण आक्रोश है, यदि सच को सच कहना, गलत और झूठ का साथ नहीं देना पाप है तो मैं इसको हर बार करूंगा, मैं ना गलत करता हूं न ही गलत सहन करता हूं...' भरतपुर के पूर्व राजपरिवार से आने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह के नाम से हुई एक सोशल मीडिया पोस्ट ने कांग्रेस में भूचाल लाते हुए राजस्थान के सियासी पारे को अचानक गरमा दिया है। अपनी बेबाक शैली के लिए पहचाने जाने वाले विश्वेंद्र सिंह ने अध्यक्ष के नाम भावुक पोस्ट लिखते हुए साफ कहा कि 'गलत नीति-रीति के साथ कदमताल करने की बजाय अलविदा कहना ही बेहतर है।' दिनभर मान-मनौव्वल के कयासों के बाद शाम को कांग्रेस की अनुशासन कमेटी की ओर से उन्हें नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा गया है। आखिर कांग्रेस के कद्दावर नेता विश्वेंद्र सिंह के ‘इस्तीफे’ का पूरा विवाद क्या है, उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा पर क्या संगीन आरोप लगाए, इस पूरे घटनाक्रम के सियासी मायने क्या हैं और शाम को क्यों अचानक सख्त अंदाज में उतर आई कांग्रेस? यही जानेंगे आज के राजस्थान एक्सप्लेनर में… सवाल-1: पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह के इस्तीफे का क्या मामला है और उन्होंने क्या सफाई दी? जवाब: 2 अक्टूबर की सुबह प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया, जब पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे विश्वेंद्र सिंह के नाम से एक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए एक पोस्ट सामने आई। इस पूरे मामले में शुक्रवार को दिनभर क्या-क्या घटनाक्रम हुआ, विस्तार से जानिए। सुबह विश्वेंद्र सिंह ने की भावुक पोस्ट विश्वेंद्र सिंह के नाम से जारी पोस्ट में लिखा कि पार्टी में व्याप्त चाटुकारिता, चापलूसी की परंपरा और गलत नीतियों के कारण उनका 'दम घुट रहा था'। उन्होंने लिखा, 'दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर है'। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पुरखों ने कभी गलत चीजों और स्वाभिमान से समझौता नहीं किया, इसलिए वे ऐसी कार्यप्रणाली के साथ कदमताल नहीं कर सकते। दिनभर की अटकलों के बाद विश्वेंद्र सिंह ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से कोई औपचारिक त्यागपत्र नहीं दिया है, बल्कि कांग्रेस आलाकमान को अपनी पीड़ा बताते हुए इस्तीफे के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा कि- पार्टी के लिए जीवन देने वाले वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर कुछ 'छुटभैये और पैराशूट नेताओं' को तवज्जो दी जा रही है, जिससे उनके कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। दोपहर में मान-मनौव्वल की अटकलें सूत्रों के मुताबिक, पूरे विवाद के बीच कांग्रेस के कुछ नेताओं की ओर से विश्वेंद्रसिंह से मान-मनौव्वल और जल्दबाजी में कोई कठोर कदम उठाने के बजाय आलाकमान के रुख का इंतजार करने की बात की जा रही थी। इस समझाइश के बाद ही माना जा रहा था कि विश्वेंद्र सिंह के तेवर कुछ नरम हुए। शाम को अनुशासन समिति ने जारी किया नोटिस देर शाम कांग्रेस की अनुशासन समिति के चेयरमैन उदयलाल आंजना की ओर से विश्वेंद्र सिंह के नाम 8 बिंदुओं को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 7 दिन में जवाब मांग लिया गया। जिसमें लिखा गया कि, जिलाध्यक्ष डीग एवं जिलाध्यक्ष भरतपुर की ओर से प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजी गई शिकायत के आधार पर ये नोटिस जारी किया गया है। सवाल-2: विश्वेंद्र सिंह की नाराजगी का असली कारण क्या है और PCC चीफ डोटासरा पर क्या आरोप लगाए? जवाब: कांग्रेस नेता विश्वेंद्र सिंह का गुस्सा अचानक नहीं फूटा है। बल्कि भरतपुर और डीग जिले में निकाय चुनावों के शर्मनाक प्रदर्शन के बाद से ही वे प्रदेश संगठन पर हमलावर थे। उनकी नाराजगी की 3 बड़ी वजहें हैं। 1. निकाय चुनाव में हार और गलत टिकट वितरण: शहरी निकाय चुनाव में भरतपुर और डीग जिले में कांग्रेस का एक भी बोर्ड नहीं बनने पर विश्वेंद्र सिंह ने हार के लिए डोटासरा और भरतपुर जिलाध्यक्ष व डीग जिलाध्यक्ष को जिम्मेदार बताया था। उन्होंने कहा था- प्रदेश अध्यक्ष मूक-बधिर बनकर बैठे हैं। वहीं कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि, निकाय चुनाव के लिए विश्वेंद्र सिंह और स्थानीय टीम को ही अधिकृत किया गया था और सिंबल भी उन्हीं की सिफारिश पर जारी किए गए। 2. भर्ती घोटालों और डोटासरा के परिवार पर निशाना: विश्वेंद्र सिंह ने सियासी जंग को व्यक्तिगत आरोपों तक भी पहुंचा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि गोविंद डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहते REET भर्ती परीक्षा में धांधली हुई और उनके बेटे-बहू और रिश्तेदारों को RAS साक्षात्कार में कथित तौर पर समान 80-80 अंक दिलवाकर नियमों का उल्लंघन किया गया। उन्होंने इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। हालांकि इस मामले में वहीं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पर लगाए आरोपों और मनमुटाव से जुड़े सवाल पर डोटासरा ने मतभेद की बात खारिज करते हुए इसे भाजपा का टूलकिट और दुष्प्रचार बताया। 3. निष्कासन की आहट से पहले आक्रामक दांव: अंदरखाने की खबरों के अनुसार, पिछले कुछ समय से विश्वेंद्र सिंह की बयानबाजी से नाराज होकर प्रदेश संगठन उनके खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्रवाई या निष्कासन की तैयारी कर रहा था। इस गाज के गिरने से पहले ही विश्वेंद्र सिंह ने इस्तीफे के संकेत का दांव खेलकर बढ़त बनाने की कोशिश की। सवाल-3: पूर्व राजपरिवार के मुखिया विश्वेंद्र सिंह का राजनीतिक इतिहास और भरतपुर में कितना दबदबा है? जवाब: भरतपुर के पूर्व महाराजा बृजेंद्र सिंह के पुत्र विश्वेंद्र सिंह को स्थानीय राजनीति में 'राजा जी' के नाम से जाना जाता है। पूर्वी राजस्थान के जाट समुदाय और मेवात-मत्स्य क्षेत्र में उनका गहरा राजनीतिक असर माना जाता है। 3 बार सांसद और विधायक: वे जनता दल, बीजेपी और कांग्रेस तीनों प्रमुख धाराओं से राजनीति कर चुके हैं। वे 1989, 1999 और 2004 में लोकसभा सांसद रहे और 1993 में नदबई, 2013 व 2018 में डीग-कुम्हेर सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए। कैबिनेट मंत्री का पद: अशोक गहलोत सरकार में वे पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन कैबिनेट मंत्री रहे हैं। 2020 मानेसर संकट के प्रमुख चेहरे: 2020 में जब सचिन पायलट खेमे ने गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत की थी, तब विश्वेंद्र सिंह पायलट के साथ मानेसर में डटे थे। इसके बाद उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त भी कर दिया गया था, हालांकि बाद में उनका पुनरुद्धार हुआ। 2024 लोकसभा चुनाव में प्रभाव: 2024 के लोकसभा चुनाव में भरतपुर (सुरक्षित) सीट से कांग्रेस प्रत्याशी संजना जाटव की जीत में विश्वेंद्र सिंह के सियासी दबदबे की अहम भूमिका मानी जाती है। सवाल-4: इस पूरे विवाद और उथल-पुथल का राजस्थान की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? जवाब: पंचायत राज चुनावों से ठीक पहले विश्वेंद्र सिंह का आक्रामक रुख कांग्रेस के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है। पूर्वी राजस्थान में वोट बैंक का गणित: भरतपुर, डीग, करौली और धौलपुर बेल्ट में जाट वोटबैंक पर विश्वेंद्र सिंह की मजबूत पकड़ है। यदि वे ऐसे समय पर पार्टी से अलग होते हैं या निष्क्रिय होते हैं तो कांग्रेस का यह मजबूत गढ़ कमजोर पड़ सकता है। गुटबाजी का नया दौर: विधानसभा चुनाव में हार के बाद से शांत दिख रही राजस्थान कांग्रेस में पायलट समर्थकों और डोटासरा/गहलोत खेमे के बीच की पुरानी खींचतान एक बार फिर सतह पर आ गई है। सवाल-5: इस पूरे विवाद पर क्या बोले कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा? जवाब: विश्वेंद्र सिंह के रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा- उनके इस्तीफे की मुझे आधिकारिक जानकारी नहीं है। 'विश्वेंद्र सिंह, हमारी पार्टी के बेहद वरिष्ठ नेता हैं, मैं खुद उनकी सरकार में राज्य मंत्री रहा हूं और वे मुझे छोटा भाई मानते हैं। हम सोशल मीडिया के बयानों पर कोई राय नहीं बना सकते।' उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी मुद्दे पर जल्दबाजी में फैसला नहीं लिया जाएगा। 'मैं प्रदेशाध्यक्ष हूं; मुझे कार्यकर्ता-नेताओं की भावनाएं, जिलाध्यक्षों और क्षेत्र के अन्य वरिष्ठ नेताओं की राय भी समझनी होगी। उनकी जो भी बात होगी, उसे पूरी गंभीरता से सुना जाएगा।' साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हाल के घटनाक्रम से पहले उन्होंने कभी भी उनसे संगठन की नियुक्तियों या टिकट वितरण को लेकर व्यक्तिगत रूप से कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी। सवाल-6: भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का बड़ा बयान, क्या बोले? जवाब: पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह के कांग्रेस से इस्तीफे के संकेतों पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कड़ा हमला बोला है। राजसमंद पहुंचे एक कार्यक्रम में मदन राठौड़ ने कहा- ‘कांग्रेस अब पूरी तरह बिखर रही है और चार धड़ों में बंट चुकी है। पहले सचिन पायलट को बाहर का रास्ता दिखाया गया, और अब पार्टी के निष्ठावान नेता खुद किनारे हो रहे हैं।’ नोटिस के बाद फिर विश्वेंद्र सिंह के तल्ख तेवर… कांग्रेस की ओर से मिले नोटिस के बाद विश्वेंद्र सिंह के सोशल मीडिया हैंडल से फिर शुक्रवार देर शाम एक पोस्ट की। जिसमें उदयलाल आंजना को संबोधित करते हुए लिखा गया कि, पहले आपके नोटिस का जवाब देना चाहिए या पीसीसी चीफ का उनको लेकर दिए बयान पर कोई प्रतिक्रिया। वो मुझे अपने बड़े भाई के रूप में देख रहे हैं, दूसरी ओर आपकी कारगुजारी सामने है.. आप अपनी कार्यवाही के लिए स्वतंत्र हैं और मैं राजनीतिक भविष्य को लेकर स्वतंत्र हूं। मैं हमेशा मर्यादा और अनुशासन में रहा हूं। उम्र के इस पड़ाव पर शायद मुझे किसी की नसीहत की जरूरत नहीं है।

अक्टूबर में भी पारा 40 डिग्री के ऊपर:रात के तापमान में तेजी से गिरावट; जानें- अगले एक हफ्ते कैसा रहेगा मौसम

राजस्थान में अक्टूबर में भी दिन के समय तेज गर्मी है। पारा 40 डिग्री के ऊपर पहुंच गया है। सबसे ज्यादा असर पश्चिमी जिलों में है। शुक्रवार को सबसे अधिक तापमान पिलानी (झुंझुनूं) में दर्ज हुआ। वहीं पूर्वी जिलों में रात के तापमान में तेजी से गिरावट हो रही है। सीकर, भीलवाड़ा, उदयपुर, नागौर में रात में ठंडक बढ़ गई। इन शहरों में शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। मौसम विभाग ने राज्य में अगले एक सप्ताह मौसम ड्राई रहने का अनुमान जताया है। प्रदेश में बारिश की स्थिति मौसम की बड़ी अपडेट्स 40 डिग्री पार तापमान: राजस्थान के सभी शहरों में शुक्रवार को आसमान साफ रहा। सबसे अधिक तापमान पिलानी (झुंझुनूं) में 40.2 डिग्री, श्रीगंगानगर में 40.1 डिग्री सेल्सियस रहा। रात में ठंडक बढ़ी: राजस्थान के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में न्यूनतम तापमान में गिरावट होने से रात में ठंडक बढ़ गई। अजमेर, भीलवाड़ा, सीकर, कोटा, उदयपुर में शुक्रवार को न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे दर्ज हुआ। सबसे कम तापमान सीकर में 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। अब आगे क्या?: मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार- राज्य में शनिवार से मौसम साफ रहेगा। हालांकि तापमान में कोई खास परिवर्तन देखने को नहीं मिलेगा। दिन में अधिकांश शहरों का तापमान 30 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। वहीं न्यूनतम तापमान 18 से 25 डिग्री के बीच दर्ज होने की संभावना है। राजस्थान के प्रमुख शहरों में मौसम का हाल जयपुर: राजधानी में शुक्रवार को दिनभर मौसम साफ रहा। दिन में तेज धूप रहने से अधिकतम तापमान करीब 1 डिग्री चढ़कर 36.2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। दिन में हल्की गर्मी रही, जबकि रात में ठंडक रही। जयपुर में न्यूनतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। अजमेर: मानसून की विदाई के बाद अजमेर में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। अक्टूबर की शुरुआत के साथ सुबह-शाम हल्की ठंडक महसूस होने लगी है। वहीं दिन में तेज धूप से गर्मी बरकरार है। शहर में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री और न्यूनतम 20.0 डिग्री दर्ज किया गया। सीकर: शहर में शुक्रवार को दिनभर तेज धूप की वजह से गर्मी रही। सीकर में पिछले 7 दिन से मौसम ड्राई बना हुआ है। सीकर में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 19.4 डिग्री दर्ज किया गया। कोटा: शहर में आसमान साफ रहा। दिनभर धूप खिली रही। अधिकतम तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी हुई। दिन का पारा 35 डिग्री के पार पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान में एक डिग्री की गिरावट दर्ज हुई। शहर में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 35.5 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। उदयपुर: लेकसिटी में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शहर में सुबह से मौसम पूरी तरह से साफ रहा। वहीं शाम को हल्की सर्दी का असर महसूस होने लगा। जोधपुर: ब्लूसिटी में अक्टूबर महीने में भी मौसम गर्म बना हुआ है। जोधपुर में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 38.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से 1.3 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 23.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अलवर: शहर में शुक्रवार सुबह से मौसम सामान्य बना रहा। दिन में तेज धूप के कारण गर्मी का असर रहा और तापमान करीब 37 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम विभाग के अनुसा अगले कुछ दिनों में भी मौसम साफ रहने की संभावना है। 3 से 6 अक्टूबर के दौरान अधिकतम तापमान करीब 38 डिग्री तक पहुंच सकता है। …. ये खबर भी पढ़िए… राजस्थान- 10 साल के सबसे बड़े अकाल का खतरा:11 से ज्यादा जिले सूखे की चपेट में, 50% से कम बारिश, चलानी पड़ेगी पानी की ट्रेन कमजोर मानसून के कारण राजस्थान के सामने 10 साल के सबसे बड़े अकाल का खतरा खड़ा हो गया है। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के सूत्रों के अनुसार 11 जिले सूखे की चपेट में हैं। पूरी खबर पढ़िए…

फ्री बीज बांटने में घोटाला, सप्लाई से पहले बुवाई दिखाई:फर्म के लिए नियम बदले, फिर 14.5 करोड़ के बीज खरीदे, 2 माह बाद पुरानी शर्तें लागू

निशुल्क बीज वितरण में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है। पड़ताल में सामने आया कि प्रदेश में बिना जरूरत 14.5 करोड़ का ढैंचा बीज (जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ाने वाली घास का बीज) खरीद कर किसानों को बांट दिया। बीज निगम के अफसरों ने आंध्र की चक्रा सीड्स को फायदा पहुंचाने के लिए खरीद के नियम व शर्तें बदल दीं। फिर बीज खरीद लिया। फर्जीवाड़ा छुपाने को दो महीने बाद दूसरे टेंडर से पहले पुरानी शर्तें लागू कर दीं। बीज निगम ने 30 हजार क्विंटल बीज के लिए 3 मई 2025 को टेंडर निकाला था। 6 मई को टेंडर की 3 शर्तों में बदलाव करते हुए बीज उत्पादक किसानों की सूची व भुगतान के लिए ब्रीडर सर्टिफिकेट जैसी शर्तें हटा दीं। टेंडर में सिर्फ चक्रा सीड्स ने ही हिस्सा लिया। एकल फर्म पर टेंडर रद्द करने की बजाय अफसरों ने 14.50 करोड़ में 10 हजार क्विंटल बीज खरीद लिए। हद तो यह कि कई जगह बीज सप्लाई से पहले ही बुवाई दिखा दी। सप्लाई के एक महीने बाद बिल बनाए गए। मैने अभी जॉइन किया है। इस विषय में बता नहीं सकता। आप फैक्ट भेज दीजिए। हम जांच करवा लेंगे। -गौरव चतुर्वेदी, एमडी, बीज निगम भास्कर ने चक्रा सीड्स का पक्ष जानने के लिए दो बार ईमेल किया। मैनेजमेंट ने दोनों ई-मेल का जवाब नहीं दिया। एक्सप्लेनर : किसानों की सूची व भुगतान की शर्तों में ढील दी निविदा की अमानत राशि में भी दे दी थी छूट पुरानी शर्त में टेंडर की कुल मात्रा 30,000 क्विंटल थी, जिसके लिए बोली दाताओं को 2% यानी 75 लाख रुपए जमा करवाने थे। नई शर्त में इसे बदलकर बोलीदाता द्वारा ऑफर की गई मात्रा की कीमत का 2% लागू कर दिया। यानी 6 हजार क्विंटल ऑफर करने वाली फर्म को कम सिक्योरिटी राशि जमा करवानी पड़े। इससे छोटी कंपनियों के लिए रास्ता खुल गया। एक्सपर्ट : शर्तें बदलने से पारदर्शिता पर सवाल रिटायर्ड अकाउंट्स ऑफिसर कानाराम का कहना है सरकारी खरीद नियम शर्तों के मुताबिक होती है। एक ही तरह का बीज खरीदने के लिए अलग-अलग टेंडर में नियम शर्तों में समान नियम लागू होने चाहिए। दो महीने में हुए दो टेंडर में अलग-अलग शर्तें पारदर्शिता पर सवाल उठाती है। सप्लाई से पहले रजिस्टर में एंट्री व बुवाई दिखाई निगम ने डीडवाना-कुचामन के लिए 30 जुलाई 2025 को सप्लाई इनवॉइस संख्या NGR25-26MKT0033 के जरिए 263 क्विंटल बीज भेजा। रिकॉर्ड में बीज पहुंचने से पहले ही 15 से 21 जुलाई के बीच ढैंचा बीज का वितरण और बुवाई करना बताया। यह पूरा मामला बजट घोषणा का था। कोई फर्म नहीं आ रही थी। इसलिए नियमानुसार ही कुछ छूट दी गई थी। यह सब कमेटी स्तर से तय हुआ था। -मुकेश शर्मा, तत्कालीन विपणन प्रबंधक, राजस्थान बीज निगम

हाथीवाला पार्क की पार्किंग से व्यर्थ बह रहा पानी:देवास से जितना पानी लाए, उतना सालभर में रिसाव से बह जाएगा

शहर में जलसंकट के बीच एक ओर देवास बांध से पानी लाकर पिछोला और शहर की जल व्यवस्था को संभालने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर झील से निकल रहा हजारों लीटर पानी नालियों में बह रहा है। पिछोला-स्वरूप सागर क्षेत्र में पानी का तेज रिसाव सामने आया है। झील संवर्धन एवं विकास समिति के पूर्व सदस्य प्रो. महेश शर्मा ने जलदाय विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर यह स्थिति दिखाई। यह रिसाव झरिया मार्ग पर मीट मार्केट के अंदर से और यहां से आगे बनी दुकानों के पास हो रहा है। इन्हीं हालातों के चलते पिछोला का जल स्तर एक इंच रोज घट रहा है। अधिकारियों ने भी बड़ी मात्रा में पानी बहता देखकर चिंता जताई। जिस मात्रा में यहां से पानी बह रहा है, उस हिसाब से देवास प्रथम (अलसीगढ़) से जितना पानी लाया गया था उतना पानी सालभर में पूरा व्यर्थ हो सकता है। उन्होंने रिसाव वाले स्थान पर ग्राउटिंग कर इसे बंद करने और पास में सहायक दीवार बनाने का सुझाव दिया। अफसरों का मेयर को सुझाव- पानी को पंप कर फिर झीलों में डालें स्वरूपसागर से हो रहे रिवास को लेकर अधिकारियों ने नगर निगम महापौर पारस सिंघवी से बात की। अफसरों ने रिसाव से निकल रहे पानी को तत्काल रोकने और निगम के माध्यम से उसे वापस झील में पंप करने का सुझाव दिया। यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब शहर में जलसंकट बना हुआ है और गर्मियों के लिए झीलों में उपलब्ध पानी को बचाने की जरूरत है। ऐसे में झील से निकलकर नालियों में जा रहा पानी चिंता बढ़ा रहा है। हाथीवाला पार्क की पार्किंग से भी व्यर्थ बह रहा पानी नगर निगम परिसर स्थित हाथीवाला पार्क की पार्किंग से भी दिन-रात भारी पंप के जरिये पानी नालियों में फेंका जा रहा है। यह पानी हर डेढ़ घंटे में पंप किया जा रहा है। उनके अनुसार इसकी मात्रा आकोदड़ा और मादड़ी से लाए गए पानी के बराबर हो सकती है। स्वरूप सागर के मीट मार्केट के पीछे से भी पानी लगातार बह रहा है। उन्होंने निगम से शहर में ऐसे सभी स्थान चिह्नित करने की मांग की, जहां बेसमेंट या अन्य स्थानों से पानी निकाला जा रहा है। उनका कहना है कि इस पानी को नालियों में बहाने के बजाय झीलों में वापस पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिए। क्या मिसाल देंगे हम पिछले साल वाटर चैनल को बताया था अनूठा पिछले वर्ष झीलों की नगरी की जल व्यवस्था और वाटर चैनल को वैश्विक स्तर पर अनूठा बताया गया था। पानी की एक बूंद भी व्यर्थ नहीं जाने देने की व्यवस्था को समझने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने देशभर के जल संसाधन मंत्रियों और प्रमुख शासन सचिवों के साथ ‘वाटर विजन : 2047’ के उद्देश्य से आयोजन किया था। अब जलसंकट के बीच झील का पानी नालियों में बहना उस व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जल स्रातों की इस तरह अनदेखी की गई तो झीलों का दुनिया को क्या मिसाल देगा।