slndigital.in

Filters

Channels
Topics
Other Filters

रविवार सुबह दुर्घटना:सूरत से घूमने आए दोस्तों की कार भाडखा के पास बाइक से टकराई, 2 लोगों की मौत

ग्रामीण थाना इलाके में एनएच-68 पर रविवार सुबह हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो युवकों की जान चली गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं। सूरत (गुजरात) से 15 दिन के ट्रिप पर निकले दोस्तों की कार सामने से आ रही बाइक से भिड़ गई। पुलिस के पहुंचने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाया। जहां दो लोगों को मृत घोषित कर दिया, जबकि 3 लोग घायल हुए है। रविवार सुबह करीब 8 बजे जैसलमेर हाइवे पर भाडखा के पास एक कार और बाइक की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। हादसे में कार में सवार सूरत निवासी राहुल और बाइक सवार तिरसिंगड़ी बाड़मेर निवासी छोगाराम की मौत हो गई। मदद मांगते रहे पीड़ित, लोग देखते रहे इस हादसे ने लोगों की संवेदनहीनता को भी उजागर किया। घायल आकाश के मुताबिक एक्सीडेंट के बाद तीनों दोस्त क्षतिग्रस्त कार में बुरी तरह फंस गए थे। मौके पर लोग तो इकट्ठा हो गए, लेकिन किसी ने भी उन्हें बाहर निकालने में मदद नहीं की। वे काफी देर तक तड़पते रहे। किसी ने गाड़ी से उन्हें बाहर निकालने का प्रयास नहीं किया। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। 15 दिन का था टूर प्लान, पहले पेट्रोल पंप पर आराम किया, फिर हादसा घायल आकाश ने बताया कि चारों दोस्त गुरुवार रात सूरत से 15 दिन का टूर प्लान बनाकर निकले थे। जैसलमेर के सम में घूमने के बाद शनिवार रात करीब 12 बजे बाड़मेर के लिए रवाना हुए। रात में थकान होने पर उन्होंने भाडखा के पास एक पेट्रोल पंप पर 4-5 घंटे सोकर आराम किया। रविवार सुबह जैसे ही वहां से आगे निकले कुछ ही दूरी पर सामने से आ रही बाइक से जोरदार टक्कर हो गई। काम पर जा रहा था बाइक सवार छोगाराम बाड़मेर ग्रामीण थाना अधिकारी जसवंत सिंह राजपुरोहित ने बताया कि बाइक सवार छोगाराम पेंटर का काम करता था और वह जैसलमेर के फतेहगढ़ की तरफ जा रहा था। इस बीच भाडखा के पास उसकी बाइक कार से टकरा गई। पुलिस ने राहुल और छोगाराम के शव मॉर्च्युरी में रखवा दिए हैं और मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सुपुर्द किए जाएंगे। देर रात तक सूरत से परिजनों का इंतजार किया जा रहा था।

सरकार ने करीब 193 सीसीटीवी कैमरे लगा रखे हैं:बिजली फॉल्ट होने से 15 दिन से अभय कमांड के 42 कैमरे बंद

शहर में चोरों, बदमाशों पर नजर रखने के लिए सरकार ने करीब 193 सीसीटीवी कैमरे व्यस्ततम मार्गों, संवेदनशील इलाकों, कॉलेज, स्टेडियम, सर्किलों पर लगा रखे हैं। ताकि किसी भी घटना पर तत्काल फुटेज मिल सके। लेकिन डिस्कॉम की लापरवाही से रामू बाई स्कूल, आदर्श स्टेडियम, सिटी सेंटर रोड, कॉलेज रोड, पीजी कॉलेज परिसर, केंद्रीय बस स्टैंड, सिणधरी चौराहा सहित कई जगहों पर लगे ये कैमरे पिछले 15 दिन से बंद पड़े हैं। सिस्टम सपोर्ट इंजीनियर अरबाज पठान का कहना है कि कैमरों के संचालन के लिए डिस्कॉम से बिजली कनेक्शन लिया गया है। बिजली फॉल्ट होने पर ये जोन बंद पड़े हैं। इसके लिए कॉल सेंटर से लेकर डिस्कॉम शिकायतें दर्ज करवाई गईं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। शिकायत दर्ज, फिर भी एफआरटी ठीक नहीं कर ही फॉल्ट डिस्कॉम की एफआरटी टीम बिजली फॉल्ट को दुरुस्त नहीं कर रही है। आदर्श स्टेडियम के अंदर सुबह से रात तक भीड़ रहती है। यहां करीब 10 से ज्यादा कैमरे लगे हुए हैं। रामू बाई स्कूल के आगे 3, कॉलेज रोड पर 3, कॉलेज के अंदर 3, रोडवेज बस स्टैंड पर 7, शहीद स्मारक पर 4, ​सिणधरी चौराहे पर 4, सिटी सेंटर की तरफ 4 सहित कुल 42 कैमरे पिछले 15 दिनों से बंद पड़े हैं। इन कैमरों का कंट्रोलिंग सिस्टम जिला कलेक्ट्रेट स्थित अभय कमांड सेंटर है। ​कुछ दिन पूर्व सिटी सेंटर के पास घटना हुई थी, लेकिन कैमरे बंद होने से फुटेज नहीं मिल रहे हैं। इसको लेकर सपोर्ट सिस्टम टीम ने डिस्कॉम ने शिकायत भी दर्ज करवा रखी हैं, लेकिन डिस्कॉम के अधिकारी व एफआरटी टीम इसको गंभीरता से नहीं ले रही है। पिछले पंद्रह दिन से इस क्षेत्र के कैमरे पूर्णत: बंद पड़े हैं।

राजस्थान के 13 जिलों में आज बारिश का अलर्ट:बीकानेर-सीकर में बरसात के साथ ओले गिरे; जैसलमेर में 4°C गिरा पारा

राजस्थान के 13 जिलों में सोमवार को तेज हवा चलने और बारिश का यलो अलर्ट है। कहीं-कहीं बारिश के साथ ओले भी गिर सकते हैं। इससे पहले, रविवार को वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से बीकानेर, चूरू, झुंझुनूं और सीकर के एरिया में घने बादल छाए। बारिश के साथ ओले भी गिरे। इससे तापमान में गिरावट हुई है। राजधानी जयपुर में भी रात को मौसम बदला और गलताजी समेत कई इलाकों में बरसात हुई। इसके चलते रात में हल्की ठंडक हो गई। जैसलमेर में रविवार को अधिकतम तापमान 4 डिग्री गिरकर 36.8 डिग्री दर्ज हुआ। रविवार को सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री फलोदी में दर्ज हुआ। पिछले 24 घंटे में बीकानेर के महाजन फील्ड, रानीसर, लूणकरणसर, सीकर के फतेहपुर शेखावाटी और श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ में हल्की बारिश हुई। बीकानेर, फतेहपुर शेखावाटी में तूफानी बारिश के साथ ओले गिरे। देर शाम चूरू के सुजानगढ़ और बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ में भी तेज बारिश के साथ ओले गिरे। सीकर के फतेहपुर में 23MM पानी बरसा। राजस्थान के प्रमुख शहरों में मौसम का हाल जयपुर में रविवार को दिनभर मौसम ड्राई रहा और तापमान में मामूली बढ़ोतरी हुई। हालांकि बीच-बीच में हल्के बादल भी रहे। जयपुर में अधिकतम तापमान 34.3 डिग्री दर्ज हुआ। रात में मौसम बदला और कई इलाकों में बरसात हुई। मौसम विभाग ने जयपुर में आज भी बादल छाए रहने का अलर्ट जारी किया है। सीकर में रविवार शाम 4:15 बजे तेज हवा के साथ बारिश हुई। सीकर में करीब एक सप्ताह के बाद बारिश होने से लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली। करीब आधा घंटे तक तेज बारिश का दौर चलता रहा। इससे पहले दिनभर सीकर में तेज उमस और गर्मी रही। सीकर में रविवार को अधिकतम तापमान 36.5 और न्यूनतम 21.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अगले 1-2 दिन में सीकर के तापमान में हल्की गिरावट की संभावना है। अजमेर में रविवार सुबह से दिनभर धूप खिली रही। अधिकतम तापमान 32 और न्यूनतम 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में हल्की बूंदाबादी हो सकती है। कोटा में रविवार को अधिकतम तापमान 33.7 और न्यूनतम 21.6 डिग्री सेल्सियस रहा। धूप निकलने से गर्मी और उमस बरकरार रही। इस सीजन में काफी कम बारिश हुई है। अब तक कोटा में 461.7 MM बारिश हुई है। वहीं, अब मानसूनी गतिविधियों का दौर भी थम चुका है। उदयपुर में रविवार को तापमान में 1.8 डिग्री सेल्सियस की कमी दर्ज की गई। हवा में ठंडक बनी रही। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। दिन का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। एक दिन पहले 34.2 डिग्री सेल्सियस था। अलवर में रविवार शाम 5 बजे के बाद अचानक मौसम बदला। कई हिस्सों में घने काले बादल छा गए। इसके बाद कुछ देर तेज बारिश हुई। हालांकि बारिश ज्यादा नहीं हुई, लेकिन इससे मौसम ठंडा हो गया। शाम के समय ठंडी हवा चलने से लोगों को गर्मी से राहत महसूस हुई। अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जोधपुर में सितंबर के अंतिम दिनों में भी गर्मी का असर बना हुआ है। रविवार को अधिकतम तापमान 34.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य तापमान से 1.0 डिग्री कम रहा। न्यूनतम तापमान 26.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से 2.7 डिग्री अधिक रहा। मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिनों में बारिश की संभावना नहीं जताई है।

मुख्यमंत्री के 30 सितंबर को बाड़मेर दौरे की संभावना:चुनाव से पहले विकास कार्यों की सौगात देंगे

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 30 सितंबर को बाड़मेर आ सकते हैं। नगर निकाय चुनावों में मिली जीत के बाद सीएम के संभाग मुख्यालयों के दौरे चल रहे हैं, जिसके तहत जोधपुर संभाग से बाड़मेर का चयन किया गया है। पंचायतीराज चुनावों से ठीक पहले सीएम इस दौरे में जिले को कई विकास कार्यों उद्घाटन और शिलान्यास की सौगात दे सकते हैं। दौरे का मुख्य एजेंडा आगामी पंचायतीराज चुनाव से पहले जिले में सरकारी बिल्डिंग्स और विकास कार्यों का उद्घाटन तथा नए प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास करना है। सभा के लिए प्रशासन की ओर से मांगता, बाछड़ाऊ, तारातरा मठ और आदर्श स्टेडियम (बाड़मेर) को चिन्हित किया गया है। इनमें से किसी एक जगह पर कार्यक्रम आयोजित होगा। सीएम के संभावित दौरे को देखते हुए बाड़मेर कलेक्टर चिन्मयी गोपाल और एसपी चूनाराम जाट ने प्रस्तावित स्थानों का जायजा लिया है। रविवार रात तक कार्यक्रम का शेड्यूल फाइनल नहीं हुआ था। सियासी मायने निकाय चुनावों में जीत के बाद सीएम का फोकस अब संभाग स्तर पर जनता के बीच पहुंचकर सरकार के काम गिनाने और आगामी पंचायत चुनावों के लिए जमीन मजबूत करने पर है। इसी को लेकर सीएम का बाड़मेर दौरा प्रस्तावित है। 30 सितंबर के बाद कभी भी पंचायतीराज चुनाव को लेकर आचार संहिता भी संभव है। ऐसे में चुनाव से पहले सरकार की योजनाएं और विकास कार्यों को लेकर सीएम जनता के बीच आ रहे है।

स्केटर्स का स्वर्णिम पंच, 63 मेडल जीते:टाइटेनियम रोलर स्केटिंग क्लब के चैंपियंस ने 70वीं जिला स्तरीय प्रतियोगिता में 28 गोल्ड जीते

बाड़मेर के बच्चे प्रदेश में जिले का नाम रोशन कर रहे है। टाइटेनियम रोलर स्केटिंग क्लब के खिलाड़ियों ने 70वीं जिला स्तरीय रोलर स्केटिंग प्रतियोगिता में क्लब के स्केटर्स ने अपनी रफ्तार और संतुलन का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 63 पदक जीते। इनमें 28 स्वर्ण, 15 रजत और 20 कांस्य पदक शामिल हैं। जिले के 21 खिलाड़ियों ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए अपना चयन पक्का कर लिया है। 14 वर्षीय आयु वर्ग से जितेंद्र जाखड़, अरविंद सिंह, राघव जाखड़, प्रियांशी चौधरी, भूमिका चौधरी, प्रियांशु माचरा और दक्ष धारणिया ने पदकों पर कब्जा कर स्टेट लेवल पर चयन हुआ है। वहीं 17 एवं 19 वर्षीय सीनियर वर्गों में जोगराजसिंह, बृजपालसिंह, मनन पूनिया, उदित चौधरी, हरीश चौधरी, जीतूसिंह, दिविजा गोदारा, मिष्ठी, निशा, अनीता चौधरी, कोमल, हार्दिक डागर, भरत कुमार और भावेश सारण ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए राज्य स्तर में जगह बनाई है। कोच बोले: बच्चों के निय​मित अभ्यास और कड़ी मेहनत ने दिलाई सफलता स्केटिंग कोच ​जितेंद्र चौधरी ने कहा कि यह सफलता महज पदकों का आंकड़ा नहीं है, बल्कि बच्चों की दिन-रात की कड़ी मेहनत और अभिभावकों के अटूट विश्वास का असली परिणाम है। ट्रैक पर जीता गया हर मेडल खिलाड़ियों के कई घंटों के पसीने और संघर्ष की गवाही देता है। उन्होंने कहा कि हमारा विजन इन होनहारों को केवल राज्य या राष्ट्रीय नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाना है। यह जीत जिले के अन्य युवाओं के लिए भी एक प्रेरणा है, क्योंकि यदि आज की मेहनत सच्ची हो, तो कल की पहचान खुद-ब-खुद बनती है और लक्ष्य बड़ा हो तो रास्ते अपने आप खुल जाते हैं।

निगम सवालों के घेरे में:60 में से 35 नए टिपर खुले आसमान के नीचे खड़े-खड़े बिना उपयोग के कबाड़ बने

नगर निगम और शहर में घर-घर कचरा संग्रहण का कार्य संभालने वाली पुरानी फर्म के बीच विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। शहर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के सरकारी दावों के बीच एक चौकाने वाला खेल सामने आया है। नगर निगम ने पूर्व में जिस फर्म को शहर में कचरा उठाने के लिए 60 नए टिपर उपलब्ध कराए थे उनमें से ज्यादातर वाहन कागजों में ही दौड़ते रहे या मैदान में खड़े-खड़े पूरी तरह कबाड़ बन चुके हैं। हालात यह हैं कि अनुबंध समाप्त होने के बावजूद फर्म ने न केवल वाहन समय पर नहीं लौटाए बल्कि जो वाहन निगम ने दिए थे वे या तो गायब हैं या उनके टायर और पार्ट्स तक चोरी हो चुके हैं। इस पूरे प्रकरण ने निगम के अमले और फर्म की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गत 15 सितंबर को ही इस फर्म का अनुबंध पूरी तरह से समाप्त हो चुका है, परंतु इसके बावजूद फर्म ने अब तक टिपर निगम को वापस नहीं लौटाए हैं। फर्म ने बमुश्किल 20 से 25 टिपर ही असल मैदान में काम में लिए। बाकी बचे करीब 30 से 35 टिपर पिछले पांच सालों से बिना किसी उपयोग के खुले आसमान के नीचे खड़े-खड़े पूरी तरह कंडम और बेकार हो चुके हैं। देखभाल और रखरखाव के अभाव में इन गाड़ियों की स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि कई टिपरों के टायर तक गायब हो चुके हैं और उनके महत्वपूर्ण पार्ट्स भी निकाल लिए गए हैं। नए टिपरों की खासियतः सपाट डिजाइन, अलग रंग और अतिरिक्त डस्टबिन निगम द्वारा इस बार लाई जा रही नई गाड़ियों की बनावट और तकनीकी विनिर्देश पुराने वाहनों से काफी अलग और आधुनिक हैं। पुराने टिपरों के आगे का हिस्सा उभरा हुआ होता था, जबकि इस बार आने वाले नए टिपरों का आगे का मुंह पूरी तरह सपाट (फ्लैट) होगा। हर टिपर में सूखा और गीला कचरा अलग-अलग स्टोर करने का प्रावधान होगा। इसके लिए टिपर की एक साइड का कलर नीला और दूसरी साइड का कलर हरा रखा गया है। टिपर के निचले हिस्से में दोनों तरफ दो छोटी-छोटी विशेष डस्टबिन लगाई गई हैं। इनमें लाल रंग की डस्टबिन सैनिटरी पैड या अन्य बायोमेडिकल कचरे के लिए और काली रंग की डस्टबिन सेल, बैटरी या लोहे-प्लास्टिक के अन्य छोटे कबाड़ को डालने के लिए उपयोग में लाई जाएगी। नई व्यवस्था: अब शहर में एक साथ दौड़ेंगे 140 नए टिपर पुराने टिपरों के गायब होने उनके कबाड़ में बदलने और फर्म के इस असहयोगपूर्ण रवैये के बीच नगर निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था को किसी भी हाल में बाधित न होने देने के लिए कड़े और त्वरित कदम उठाए हैं। निगम ने समानांतर रूप से एक मजबूत और आधुनिक वैकल्पिक व्यवस्था तैयार कर ली है। शहर में अब तक 50 नए टिपर पहुंच चुके हैं। निगम अधिकारियों के अनुसार, आगामी 30 तारीख तक सभी 140 नए टिपर बीकानेर पहुंच जाएंगे। नगर निगम आगामी 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से एक साथ शहर के सभी वार्डों में इन नए टिपरों को उतारने पर विचार कर रहा है। इसके पीछे एक बड़ी रणनीतिक वजह यह है कि यदि चरणबद्ध तरीके से टिपर चलाए जाते तो जिन पड़ोसी वार्डों में वाहन पहुंचने में देरी होती या शुरुआत नहीं होती, वहां के स्थानीय लोगों में विरोध और नाराजगी के सुर उठ सकते थे। इस संभावित विवाद से बचने के लिए एक साथ 140 टिपरों को सड़क पर उतारने की रणनीति बनाई गई है। वार्डवार कचरा संग्रहण का खाका नई व्यवस्था के तहत अब अमूमन हर वार्ड में दो टिपर कचरा लेने पहुंचेंगे। इसके तहत पूर्व विधानसभा क्षेत्र में 75 बड़े टिपर और पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में 65 बड़े व 15 छोटी गाड़ियों के जरिए कचरा कलेक्ट किया जाएगा। इसके अलावा, निगम के पास 55 ट्रैक्टर भी पहले ही आ चुके हैं और कई वार्डों में उनके जरिए कचरा संग्रहण का कार्य विधिवत रूप से शुरू भी कर दिया गया है। “गाड़ी वाला आया...” अब गूंजेगा खास मारवाड़ी पुट में स्वच्छ भारत अभियान के तहत अब तक पूरे देश में एक जैसे पारंपरिक गीत ही कचरा संग्रहण गाड़ियों में बजते रहे हैं। लेकिन बीकानेर नगर निगम इस बार इसमें एक अनूठा स्थानीय रंग जोड़ने जा रहा है। निगम इस बात पर गंभीरता से काम कर रहा है कि कचरा लेने आने वाली गाड़ियों में बजने वाले संगीत और संदेशों में मारवाड़ी पुट भी शामिल किया जाए। स्थानीय भाषा, शैली और लोक धुनों में पिरोए गए इन संदेशों के जरिए जब गाड़ियां बस्तियों और गलियों में पहुंचेंगी, तो शहरवासियों का जुड़ाव स्वतः बढ़ेगा और वे स्वच्छता के प्रति अधिक जागरूक होंगे। निगम की इस पहल से शहर में एक सकारात्मक स्थानीय संदेश जाने की पूरी उम्मीद है। टिपर फर्म को लौटाने थे वो अभी नहीं आए। शर्त के मुताबिक जिस कंडीशन में टिपर दिए गए थे उसी में आने थे। निगम इंतजार कर रहा है। वरना रिकवरी का विकल्प खुला है। नए 55 टिपर पहुंच चुके हैं। सिद्धार्थ पलानीचामी, कमिश्नर नगर निगम

वन क्षेत्रों का यह कैसा प्रशासनिक बंटवारा?:33 वर्ग किमी के फलोदी में 4 रेंजर-1 डीएफओ, 734 वर्ग किलोमीटर के सलूंबर में भी इतने ही

वन विभाग द्वारा किए गए 20 जिलों के वन मंडलों के पुनर्गठन ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भास्कर ने इसका विश्लेषण किया तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। सलूंबर जिले की सबसे छोटी सेमारी रेंज (35.36 वर्ग किमी) का वन क्षेत्र पूरे फलोदी जिले (33.50 वर्ग किमी वन क्षेत्र) से भी बड़ा है। जहां फलोदी में इतने से जंगल के लिए एक डीएफओ और 4 रेंजर तैनात हैं, वहीं इससे 21 गुना अधिक 734.47 वर्ग किमी वन वाले सलूंबर की निगरानी का जिम्मा भी महज इतने ही अफसरों पर है। यही असमानता नागौर और डीग में भी है। 25.51 वर्ग किमी वन क्षेत्र वाले नागौर में 3 रेंजों के साथ डीएफओ और 3 रेंजर मौजूद हैं, जहां मेड़ता रेंज सिर्फ 1.9 वर्ग किमी की है। दूसरी ओर 72.13 वर्ग किमी में फैले डीग के वन क्षेत्र को भी समान अमला संभाल रहा है। बता दें कि विभाग ने पुनर्गठन की अधिसूचना गत 30 जुलाई को जारी की थी। भौगोलिक चुनौती : अरावली का सघन जंगल बनाम मरुस्थल का खाली ढांचा सलूंबर-उदयपुर अंचल में अरावली का सघन जंगल, दुर्गम पहाड़ियां और वन्यजीव फैले हैं। यहां जयसमंद, फुलवारी की नाल और सीतामाता जैसी 3 बड़ी सेंचुरी की सुरक्षा का भी दबाव है। जहां जंगल का घना जाल है, वहां संसाधनों की कमी है। वहीं दूसरी ओर, मरुस्थलीय व मैदानी जिलों में वन सीमित होने के बावजूद अफसरों और दफ्तरों का पूरा अमला तैनात है। पुनर्गठित वन मंडलों का इलाका एक्सपर्ट : प्रशासनिक सीमा से बिगड़ा संतुलन सेवानिवृत्त सीसीएफ राहुल भटनागर के अनुसार पहले एक डीएफओ के पास कई जिलों के वन क्षेत्रों का चार्ज होता था। बाद में प्रशासनिक सीमाओं के अनुसार वन सीमा तय की गई। इससे कई वन मंडलों में बहुत कम वन क्षेत्र रह गया। जिन जिलों में वन क्षेत्र कम हैं, वहां पंचायतों की जमीन, सड़क किनारे पौधरोपण जैसे सामाजिक कार्य ज्यादा होते हैं और वन सुरक्षा से जुड़े काम कम होते हैं। वहीं ज्यादा वन क्षेत्र वाले जिलों में सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है।

वन विभाग की नई गश्त एसओपी:2 कर्मचारी अनिवार्य, बॉडी कैमरा देंगे

छोटी सादड़ी रेंज में डंपर से कुचलकर रेंजर की मौत के बाद वन विभाग हरकत में आ गया है। अवैध खनन, अतिक्रमण और तस्करों पर नकेल कसने के साथ-साथ वनकर्मियों की सुरक्षा के लिए विभाग ने नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी की है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (पीसीसीएफ) अरिजित बनर्जी की ओर से जारी आदेश के तहत अब कोई भी वनकर्मी अकेले गश्त पर नहीं जाएगा। गश्ती दल में कम से कम दो वनकर्मियों की मौजूदगी अनिवार्य कर दी गई है। गश्त के दौरान बाइक सवार वनकर्मी किसी भी चार पहिया वाहन या अर्थ मूवर को सीधे रोकने का प्रयास नहीं करेंगे। किसी भी कार्रवाई या गश्त के दौरान कम से कम तीन वनकर्मी बॉडी कैमरा पहनेंगे। इनकी फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग हार्ड डिस्क में सुरक्षित रखी जाएगी। आदेश सही, पर संसाधनों की कमी दूर करना जरूरी वन मुख्यालय का आदेश कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए सही दिशा में पहला कदम है, लेकिन इसे धरातल पर उतारने के लिए संसाधन देने होंगे। हर रेंज में कम से कम एक चार पहिया वाहन होना बेहद जरूरी है, जो फिलहाल कई जगहों पर नहीं है। साथ ही, गश्ती दल में दो के बजाय और अधिक स्टाफ तैनात किया जाना चाहिए। -राहुल भटनागर, सेवानिवृत्त सीसीएफ

चक्रवाती सिस्टम से बना डिप्रेशन लो प्रेशर एरिया में बदला:विदाई वेला में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय; सीकर, बीकानेर में आंधी-बारिश, खेतों में फसल बिछी

मानसून की विदाई के बाद प्रदेश में सीजन का पहला नया सिस्टम एक्टिव हो गया है। इस सिस्टम के असर से दो से तीन दिन पूर्वी राजस्थान में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश होगी। रविवार को अजमेर, सीकर, कोटा, नागौर, डूंगरपुर, बीकानेर सहित कई स्थानों पर आधा इंच तक बारिश हुई। आंधी के कारण फसलों को नुकसान हुआ है। ज्यादातर शहरों में दिन-रात के तापमान में 4 डिग्री तक की गिरावट दर्ज हुई। मौसम विभाग जयपुर केन्द्र निदेशक आरएस शर्मा ने बताया कि दो दिन भरतपुर, जयपुर, कोटा संभाग व शेखावाटी में बारिश के आसार हैं। लो प्रेशर और हवा में नमी से होगी बारिश : चक्रवाती सिस्टम की तीव्रता पूर्वी इलाकों में ज्यादा थी लेकिन डिप्रेशन के कमजोर होकर वेल मार्क लो प्रेशर एरिया में बदलने से बारिश की तीव्रता कम रहेगी लेकिन हवा में नमी बनी रहने के कारण हल्की से मध्यम बारिश देता है। जब एक वेल मार्क लो प्रेशर एरिया और पश्चिमी विक्षोभ सिस्टम आपस में टकराते हैं, तो बारिश की संभावना बढ़ जाती है।

गैंगस्टर रोहित का घर तोड़ने का मामला पहुंचा हाईकोर्ट:13 जुलाई की रात अज्ञात लोगों ने जेसीबी से ढहाया था 2 मंजिला मकान

विदेश में बैठकर वारदातों को अंजाम दे रहे कुख्यात गैंगस्टर रोहित गोदारा से जुड़े कपूरीसर (लूणकरणसर) स्थित मकान को पिछले दिनों बुलडोजर चलाकर ढहाने का मामला अब राजस्थान उच्च न्यायालय (जोधपुर) पहुंच गया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस रहस्यमयी घटनाक्रम में नया मोड़ आ गया है। कपूरीसर निवासी रोहित गोदारा की भाभी शकुंतला देवी ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने अनधिकृत रूप से उनके आवासीय परिसर में घुसकर मकान को ध्वस्त करने का प्रयास किया। मामले में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुनील बेनीवाल की एकलपीठ ने बीकानेर पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता द्वारा 10 दिन के भीतर प्रस्तुत किए जाने वाले नए अभ्यावेदन पर गंभीरता से विचार करें। यदि आरोपों में सत्यता पाई जाती है, तो संबंधित थानाधिकारी को तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने और कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएं। याचिकाकर्ता की और से पैरवी एडवोकेट कौशल गौतम और नवनीत सिंह ने की। एफबीआई की चार्जशीट में भी गूंजा था रोहित गोदारा का नाम रोहित गोदारा केवल राजस्थान या भारत में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के राडार पर भी है। हाल ही में कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के तार जोड़ते हुए अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई ने अपनी चार्जशीट में बड़ा दावा किया था। एफबीआई के अनुसार, भारत की जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई, भगोड़े गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा समेत कई गैंगस्टर्स के नेटवर्क का इस्तेमाल इस वारदात में हुआ था। अमेरिका द्वारा भारतीय अपराधियों और उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए चलाए जा रहे “ऑपरेशन हार्ड बॉल’ के तहत अमेरिकी फेडरल कोर्ट में 37 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, जिसमें रोहित गोदारा का नाम प्रमुखता से शामिल है। रात के अंधेरे में चली थी जेसीबी, रहस्य बरकरार उल्लेखनीय है कि 13 जुलाई की रात लूणकरणसर कस्बे से करीब 16 किलोमीटर दूर तेजाणा ढाणी स्थित रोहित गोदारा से जुड़े दो मंजिला मकान पर अचानक बुलडोजर चला दिया गया था। देर रात पहुंची जेसीबी ने मकान के पिछले हिस्से को पूरी तरह से ढहा दिया, दीवारें जमींदोज कर दीं और मुख्य हिस्से के दरवाजे-खिड़कियों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। अगली सुबह जब ग्रामीणों को घटना का पता चला तो मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। हालांकि, घटना के कई महीने बीत जाने के बाद भी सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि यदि यह कार्रवाई पुलिस या प्रशासन की मौजूदगी में आधिकारिक तौर पर नहीं हुई, तो आखिर देर रात बुलडोजर किसने चलाया? अब तक किसी भी विरोधी गैंग या सिरफिरे ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है, और स्थानीय ग्रामीण भी खौफ के कारण कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु 10 दिन की मोहलत: याचिकाकर्ता शकुंतला देवी को बीकानेर एसपी के समक्ष अपनी शिकायत और सभी साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए 10 दिनों का समय दिया गया है। निष्पक्ष जांच के आदेश: बीकानेर एसपी को शिकायतों और दस्तावेजों की जांच कर तथ्यों की सत्यता जांचने के निर्देश दिए गए हैं। केस दर्ज हाे सकता है: यदि जांच में बिना आधिकारिक स्वीकृति या अवैध रूप से संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की पुष्टि होती है, तो आरोपियों पर मामला दर्ज होगा।

2 करोड़ की रिश्वत का मामला:एसओजी एएसपी सोनी गिरफ्तार, दलाल के साथ 3 दिन के रिमांड पर

नगर निगम के 272 प्लॉट घोटाले में आरोपी को राहत दिलाने और 2 किलो सोने के जेवर छोड़ने के बदले 2 करोड़ रुपए की घूस लेने के मामले में नया मोड़ आया है। एसीबी इंटेलिजेंस यूनिट की जांच में दलाल सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला के साथ एसओजी एएसपी मुकेश सोनी की भी घूसकांड में संलिप्तता और साजिश सामने आई है। इसके बाद एसीबी ने रविवार को एसओजी एएसपी मुकेश सोनी को भी गिरफ्तार कर लिया। शाम को दोनों आरोपियों को एसीबी कोर्ट के जज के निवास पर पेश किया गया, जहां से दोनों को तीन दिन के रिमांड पर लिया गया। अब एसीबी दोनों से पूछताछ करेगी। एसीबी टीम ने रविवार शाम गोवर्धन विलास स्थित एसओजी ऑफिस में सर्च ऑपरेशन चलाया। एएसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा, डीएसपी सोनू शेखावत मय टीम शाम 7 बजे एसओजी ऑफिस पहुंचे। इसके बाद एक-एक दस्तावेज खंगाले गए। कार्रवाई देर रात तक चली। इस दौरान आरोपी मुकेश सोनी भी टीम के साथ मौजूद रहा। परिवादी निरंजन मोगरा से जब्त किए गए जेवर और दस्तावेजों के बारे में भी पूछताछ की गई। खास तौर पर यह देखा गया कि परिवादी के घर से कार्रवाई के दौरान कौन-कौन सा सामान लिया गया था और उसमें से कितना सामान जब्ती की फर्द में दर्ज किया गया। सर्च में मिले दस्तावेज, केस डायरी, जब्ती रिकॉर्ड और अन्य रिकॉर्ड का परिवादी के आरोपों से मिलान किया जाएगा। पुराने दोस्त थे सज्जन व परिवादी, अफसरों से पहचान भुनाकर खेल जांच में यह भी सामने आया कि सज्जन जैन और परिवादी निरंजन मोगरा पुराने दोस्त हैं। सज्जन की कई अधिकारियों से अच्छी पहचान है। इनमें एएसपी मुकेश सोनी भी शामिल थे। जमानत पर छूटने के बाद परिवादी को पता चला कि उसके घर से ले जाए गए जेवर और अन्य सामान जब्ती की फर्द में दर्ज नहीं किए गए। उसने 2 किलो जेवर वापस मांगे। आरोप है कि इसके लिए उसे बार-बार गिरफ्तार करने की धमकी दी गई। इसके बाद परिवादी ने सज्जन से 2 किलो जेवर छुड़वाने और केस में राहत दिलाने के लिए मदद मांगी। सज्जन ने इसके बदले एएसपी के नाम पर 1 करोड़ रुपए की घूस मांगी। बाद में एएसपी से घूस की रकम बढ़ाकर 2 करोड़ रुपए कर दी गई।

कप्तानी की सियासत; नाम वापस नहीं तो घमासान तय:RCA...हाईकमान की गुगली बेअसर, क्रीज छोड़ने के लिए तैयार नहीं नेतापुत्र

आरसीए चुनावों को लेकर नाम वापसी की आखिरी तारीख सोमवार को है, लेकिन रविवार को भी फाइनल टीम गठन के लिए सत्ता-संगठन के प्रयास बेअसर रहे। भाजपा हाईकमान तक के प्रयासों के बाद भी नेतापुत्रों का क्रिकेट मोह खत्म नहीं हो रहा। ये सभी चुनावी पिच पर बैटिंग के लिए खुद को परफेक्ट ‘बल्लेबाज’ मानते हैं। मामला एक बार फिर भाजपा हाईकमान तक पहुंचा है। कुछ का दावा है कि जब कई राज्यों में नेता क्रिकेट का संचालन कर रहे हैं तो राजस्थान में ऐसा क्यों नहीं? दुनिया की क्रिकेट (आईसीसी) का सफल संचालन केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह कर रहे हैं। इसके अलावा अरुण जेटली के बेटे रोहन जेटली (दिल्ली), ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमन सिंधिया (मध्य प्रदेश), हिमाचल के पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के बेटे अरुण सिंह धूमल (आईपीएल चेयरमैन) और शरद पवार के बेटे रोहित राजेन्द्र पवार (महाराष्ट्र) के अलावा कई सांसद और विधायक कई राज्यों में क्रिकेट से जुड़े हैं और सफल संचालन कर रहे हैं तो फिर राजस्थान में नेताओं को क्रिकेट की सत्ता में आने से रोकने के प्रयास क्यों किए जा रहे हैं? बृजकिशोर के मामले की सुनवाई आज हाईकोर्ट में आरसीए चुनाव में सरकार के पैनल के प्रमुख दौसा जिला क्रिकेट संघ के सचिव बृजकिशोर उपाध्याय के मामले की सुनवाई सोमवार को हाईकोर्ट में होगी। पूर्व सचिव प्रदीप नागर ने उनके जिला सचिव बनने को अवैध बताते हुए याचिका लगाई है। सवाल है कि जब सरकार ने बृजकिशोर का नाम अध्यक्ष पद पर तय कर दिया तो फिर सचिव पद के लिए नामांकन क्यों किया? साथ ही, 3 नए जिलों के मामले में आज हाई कोर्ट और मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। आज नामांकन वापसी के बाद तस्वीर साफ होगी फिलहाल सोमवार को नामांकन वापसी के बाद ही तस्वीर साफ होगी। देखना दिलचस्प होगा कि नेतापुत्र चुनावी घमासान में बने रहते हैं या फिर नाम वापस लेते हैं। नेतापुत्रों के अलावा एडहॉक कमेटी के पूर्व कन्वीनर डीडी कुमावत ने भी अध्यक्ष पद पर दावेदारी पेश कर रखी है। रविवार को स्क्रूटनी के बाद सभी 30 नाम वैलिड पाए गए। नेतापुत्रों ने आरसीए से नहीं लिया एक भी पैसा : 29 महीने तक आरसीए में एडहॉक कमेटी का राज रहा। धनंजय खींवसर पूरे समय एडहॉक कमेटी में रहे लेकिन आरसीए से एक पैसा नहीं उठाया। अन्य नेतापुत्रों ने भी टीए-डीए नहीं लिया। आरसीए से मिली जानकारी के मुताबिक एडहॉक कमेटी के कार्यकाल के दौरान 4 जिला संघों के सचिवों ने लगभग 42 लाख रुपए टीए-डीए के रूप में लिए ​थे।

समान परीक्षा; शुल्क जमा कराने की नई डेडलाइन:30 सितंबर तक परीक्षा फीस नहीं भरने पर 100 से 1000 रुपए तक लगेगी पेनल्टी

शिक्षा सत्र 2026-27 में कक्षा 9वीं से 12वीं की अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं राज्य स्तर पर आयोजित की जाएंगी। राज्य स्तरीय समान परीक्षा 2026-27 को लेकर शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों को परीक्षा शुल्क जमा कराने के लिए अंतिम मौका दिया है। कक्षा 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों के लिए 30 रुपए प्रति परीक्षार्थी शुल्क निर्धारित है। सामान्य शुल्क के साथ भुगतान की अंतिम तिथि अब 30 सितंबर रात 11:59 बजे तय की गई है। इसके बाद स्कूलों को अतिरिक्त शुल्क देना होगा। पहले शुल्क जमा कराने की अंतिम तिथि 26 सितंबर निर्धारित थी, निर्धारित तिथि तक प्रदेश के 13 हजार निजी स्कूलों में से 50 फीसदी ने ही परीक्षा शुल्क जमा कराया है। विद्यार्थी हित को देखते हुए पूर्व निर्धारित 26 सितंबर की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 सितंबर की गई है। शुल्क SB Collect Portal के माध्यम से जमा कराया जाएगा। राज्य स्तरीय अर्द्धवार्षिक परीक्षा 15 से 29 अक्टूबर तक आयोजित होगी। 16 सितंबर से परीक्षा शुल्क जमा कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। अभी भी 50% निजी स्कूल शुल्क जमा कराने से वंचित हैं। छात्र हित में अंतिम तिथि में बढ़ोतरी की गई है। निर्धारित तिथि के बाद विलंब शुल्क का भुगतान करना होगा। अरविंद शर्मा, सहायक निदेशक, पंजीयक शिक्षा विभागीय परीक्षाएं राजस्थान 10 दिन की देरी पर 100 रुपए अतिरिक्त, 11 अक्टूबर से एक हजार की पेनल्टी विभाग के संशोधित आदेश के अनुसार 1 से 10 अक्टूबर तक परीक्षा शुल्क जमा कराने पर प्रत्येक विद्यार्थी के लिए 100 रुपए विलंब शुल्क देना होगा। वहीं 11 अक्टूबर से परीक्षा शुरू होने तक शुल्क जमा कराने वाले स्कूलों से 1,000 रुपए प्रति विद्यार्थी असाधारण विलंब शुल्क लिया जाएगा। ऐसे में समय पर शुल्क जमा नहीं कराने पर स्कूलों पर आर्थिक भार कई गुना बढ़ सकता है।

5.05 करोड़ से बनेगा पीबीएम का सेन्ट्रल ड्रग वेयरहाउस:डीएमएफटी की गवर्निंग काउंसिल ने दी बजट को हरी झंडी, सरकार से वित्तीय स्वीकृति का इंतजार

संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली निशुल्क दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने और उनके सुरक्षित भंडारण के लिए एक बड़ी राहत सामने आई है। अस्पताल परिसर में 5.05 करोड़ रुपये की लागत से नया और आधुनिक सेन्ट्रल ड्रग वेयरहाउस तैयार किया जाएगा। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित डीएमएफटी (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउण्डेशन ट्रस्ट) गवर्निंग काउंसिल की बैठक में इस बजट को हरी झंडी दे दी गई है। वर्तमान में यह प्रस्ताव राज्य सरकार के वित्त (बजट) विभाग, जयपुर को अंतिम प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति के लिए भेजा गया है। बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद से अतिशीध्र वित्तीय स्वीकृत दिलाने का अनुरोध भी मेडिकल कालेज प्रशासन ने किया है। दरअसल पीबीएम के लिए अलग से बना वेयरहाउस काफी छोटा है, जिससे दवाओं का उचित रखरखाव करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। ड्रग वेयरहाउस प्रभारी डॉ. शिव शंकर झंवर ने बताया कि नए वेयरहाउस के लिए पास में ही जगह चिह्नित कर ली गई है। इसके बनने के बाद दवाओं के स्टॉक और भंडारण में कोई परेशानी नहीं होगी। वित्तीय मंजूरी मिलते ही निर्माण एजेंसी और तखमीना (एस्टिमेट) तैयार किया जाएगा।वेयरहाउस बनने से दवाओं की गुणवत्ता और कोल्ड चेन बरकरार रहेगी, दवाइयों का सुव्यवस्थित रखरखाव होगा, सब-स्टोर्स और डीडीसी सेंटरों तक दवाओं का वितरण सुगम होगा, जिससे मरीजों को काउंटर पर दवा की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। ड्रग वेयरहाउस के लिए जगह चिह्नित की जा चुकी है। डीएमएफटी से बजट स्वीकृत हो चुका है और अंतिम वित्तीय स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखा गया है। डॉ. सुरेंद्र वर्मा, प्रिंसिपल, एसपीएमसी क्यों जरूरी है नया वेयरहाउस? 1: स्टॉक और जगह की भारी कमी: राज्य सरकार द्वारा कुल 1,822 प्रकार की दवाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इनमें से पीबीएम अस्पताल में लगभग 1,500 तरह की दवाओं की नियमित आवश्यकता रहती है, जबकि वर्तमान में केवल 1,349 तरह की दवाएं ही उपलब्ध हैं। इस तरह 151 दवाओं की कमी बनी रहती है। नियमानुसार वेयरहाउस में 4 महीने का एडवांस स्टॉक रखना अनिवार्य है, जिसके तहत हर समय लगभग 50 से 60 लाख दवाओं का भंडारण रहता है। पुराना भवन छोटा होने के कारण दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा था। 2: कोल्ड चेन मेंटेन न होना और धूल की समस्या: स्थान के अभाव के कारण दवाओं की कोल्ड चेन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। अस्पताल के तीनों सब-स्टोर पुराने और जर्जर भवनों में चल रहे हैं। इनमें से जिरिएट्रिक क्लिनिक में संचालित स्टोर की खिड़कियां टूटी होने के कारण खुली दवाओं पर धूल जमती है 3: उपकरणों की खराबी व संसाधनों का अभाव: पुराने स्टोर में एसी नहीं हैं और डीप फ्रीजर भी अक्सर खराब रहते हैं। इसके अलावा, 28 में से 8 दवा वितरण केंद्रों पर रेफ्रिजरेटर/फ्रीज की उचित व्यवस्था न होने से तापमान-संवेदनशील दवाओं की कोल्ड चेन टूट जाती है। 4: निरीक्षण में उजागर हुई खामी: प्रसूताओं की मौतों के मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव और जोधपुर मेडिकल कॉलेज के जांच दल के निरीक्षण के दौरान भी दवाओं की कोल्ड चेन मेंटेन न होने की गंभीर बात सामने आई थी।

हर स्कूल को मिलेंगे 37500 रुपए:उदयपुर-सलूंबर के 30 पीएमश्री स्कूलों की बाल वाटिकाओं के लिए 11 लाख जारी

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (2020) व नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क-2022 के तहत उदयपुर और सलूंबर जिले के 30 पीएमश्री स्कूलों की बाल वाटिकाओं में पढ़ाई का तौर-तरीका बदलने जा रहा है। पूर्व प्राथमिक कक्षाओं में अब छोटे बच्चे खेलोगे-कूदोगे बनोगे नवाब की तर्ज पर सुरक्षित खिलौनों और टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मटेरियल) किट से पढ़ेंगे। समग्र शिक्षा विभाग ने इसके लिए 11.25 लाख रुपए का बजट मंजूर किया है। छात्रों के हिसाब से प्रति बाल वाटिका को अधिकतम 37 हजार 500 रुपए दिए जाएंगे। अगले दो दिनों में स्कूलों को वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी जाएगी। एपीसी राजेंद्र प्रसाद नायक ने बताया कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए शिक्षा मंत्रालय के प्रबंध पोर्टल पर ऑनलाइन प्रविष्टि अनिवार्य की गई है। पीटीएम में बच्चे इन सामग्रियों से गतिविधियां करके अभिभावकों के सामने प्रदर्शन करेंगे। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने कड़े मानक तय किए हैं। सभी खिलौनों और शिक्षण सामग्री पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का मार्क अनिवार्य होगा। विक्रेता का वैध बीआईएस लाइसेंस नंबर एसएमसी/एसडीएमसी समिति के रिकॉर्ड में रहेगा। जमीन पर चुनौतियां भी..., खरीदारी में ये 4 बड़ी बाधाएं बीआईएस विक्रेताओं की कमी : कोटड़ा और झाड़ोल जैसे दूरस्थ इलाकों में बीआईएस लाइसेंस धारक दुकानें सीमित हैं। ट्रेनिंग की कमी : शिक्षकों को बाल वाटिका पैडागॉजी का व्यावहारिक प्रशिक्षण न मिलने पर खिलौने अलमारी में बंद रहने की आशंका है। रखरखाव का बजट नहीं : खिलौने टूटने या गुम होने पर मेंटेनेंस का अलग से प्रावधान नहीं है। समय का दबाव : 5 दिन की कम समय-सीमा के कारण संस्था प्रधानों पर जल्दबाजी में खरीदारी का प्रशासनिक दबाव रहेगा।