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चुनाव में 'काकाजी' की एंट्री ने हवा का रुख बदला:जनता ने भाजपा-कांग्रेस को डराकर जिताया; मुख्यमंत्री के रोड शो से कितना फायदा?

राजस्थान के निकाय चुनाव के नतीजों का एक वाक्य में विश्लेषण करें तो भाजपा जीती है, लेकिन कांग्रेस भी बुरी तरह से नहीं हारी है। निकाय चुनाव में ‘काकाजी’ की एंट्री का असर भी दिख रहा है। वैसे चुनाव संख्या के हिसाब से भाजपा 309 निकायों में से 163 में जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर आगे है। कांग्रेस 103 पर है, लेकिन ये आंकड़े अधूरी सच्चाई हैं। यहां करीब 10 हजार वार्ड में चुनाव हुए, जिसमें भाजपा ने करीब 4179 और कांग्रेस ने करीब 3612 सीटें जीतीं हैं। वहीं निर्दलीयों ने 2273 से ज्यादा वार्ड अपने नाम किए हैं। निकाय चुनाव के ये परिणाम दोनों दलों के लिए चेतावनी भी हैं। ढाई साल बाद विधानसभा चुनाव हैं। जनता ने इससे पहले ही अलार्म बजा दिया है। भाजपा के पारंपरिक गढ़-पाली और अजमेर में सेंध इस बात का संकेत हैं। उधर, आम आदमी पार्टी का बारां नगर परिषद में सबसे बड़े दल के रूप में जीतना चौंकाने वाला है। एक और साफ ट्रेंड दिखता है, इस बार 2 केंद्रीय सहित राजस्थान के 4 कैबिनेट मंत्री और पूर्व सीएम गहलोत सहित कई कांग्रेसी अपने वार्ड में पार्टी को नहीं जितवा पाए। विधायक बनने का सपना देखने वाले प्रत्याशी पार्षद तक का चुनाव हार गए। भाजपा हो या कांग्रेस, दोनों में ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्हें एक-एक वोट से भी संतुष्ट होना पड़ा। यानी खुद के वोट के अलावा कोई वोट नहीं मिला। दर्जनों निकायों में निर्दलीय ही किंगमेकर बन गए हैं। ये परिणाम भविष्य के राजनीतिक समीकरणों की पुरानी परिभाषा को तोड़ देते हैं। गढ़ टूटे हैं, मिथक टूटे हैं और सबसे बड़ी बात-जनता ने साफ कह दिया है कि भरोसा किसी पार्टी पर नहीं, अपनी मर्जी पर है। क्या इन चुनाव परिणामों पर जेन-जी का इंपेक्ट है? कांग्रेस के लिए क्या संभावना छिपी है? बड़े नेताओं का क्या होगा? राजस्थान के मंत्रिमंडल में फेरबदल की जो बातें हो रही हैं, उसमें इसका असर दिखेगा। जैसे राजनीतिक सवालों और मायनों को दस सवालों में समझते हैं… भाजपा के लिए रिजल्ट के मायने क्या है? प्रदेश में भाजपा की सरकार है। आमतौर पर यह माना जाता है कि प्रदेश में जिसकी सरकार होती है। शहरी सरकार भी उसकी ही होती है, लेकिन यह एकतरफा जीत नहीं है। भाजपा ने चुनाव के दौरान ट्रिपल इंजन की सरकार का नारा भी दिया था। 10 निगम में से सीधे तौर पर 4 निगम भाजपा ने जीत लिए हैं। भरतपुर में निर्दलीय किंगमेकर बनेंगे। अजमेर, पाली और जोधपुर में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। अगर यहां टूट-फूट हुई या निर्दलीय समर्थन में आए तो बीजेपी 7 से 8 बोर्ड बना लेगी। इसे भाजपा बड़ी जीत के रूप में भुनाएगी। नगर परिषद में भी यही हाल है। यहां 47 में से 12 में भाजपा को बहुमत मिला है। 28 परिषद में निर्दलीय किंगमेकर हैं। ऐसे में यहां और नगर पालिकाओं में भाजपा जोड़-तोड़ करके नंबर को बड़ा कर ही लेगी। क्या सरकार या पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है? नहीं। शहरी सरकार के चुनाव दो साल की देरी से हुए हैं। लंबे समय तक प्रशासकों ने काम किया। ये माना जाता है कि चुने हुए जनप्रतिनिधि और अफसर के कामकाज के तरीके में अंतर होता है, ये अंतर वोटिंग पैटर्न से सीधा समझा जाता है। सरकार और संगठन ने इस चुनौती को पहले भांप लिया और विधानसभा चुनाव की तर्ज पर माइक्रो प्लानिंग की। नतीजा ये हुआ कि कांग्रेस को ज्यादा सीटें जीतने से रोक लिया। बीजेपी की बढ़त बरकरार रख ली। दूसरा ये चुनाव पूरी तरह स्थानीय मुद्दों और स्थानीय नेताओं के आधार पर लड़ा जाता है। सरकार और पार्टी के सामने बड़ी चुनौती नहीं है। क्योंकि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में वोटिंग पैटर्न अलग होता है। दूसरा आमताैर पर ट्रेंड ये रहा कि सत्ताधारी पार्टी पूरा बहुमत नहीं जुटा पाने की बावजूद आमतौर पर मेयर, सभापति और अध्यक्ष भी ज्यादा बना ही लेती है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा चुनाव में कितने खरे उतरे? रोड शो से फायदा हुआ क्या? सबसे बड़ा सवाल यही है, क्योंकि ये चुनाव सरकार के 3 साल के कामकाज पर जनता की मुहर पर तौर पर देखे जा रहे थे। लिहाजा चुनाव की रणनीति बनाने से लेकर धरातल पर उतारने को लेकर मुख्यमंत्री खुद सक्रिय रहे। इस चुनाव के बाद चर्चा है कि ‘काकाजी’ ने रुख पलट दिया। दरअसल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ज्यादातर रोड शो और सभाओं में कहा था कि ‘कांग्रेस के लोग कहते थे कि इनके काकाजी भी वन स्टेट वन इलेक्शन नहीं करवा पाएंगे। अब देख लीजिए, आपके काकाजी ने वन स्टेट-वन इलेक्शन करवा दिए हैं।’ राजस्थान के इतिहास में पहली बार एक साथ निकाय चुनाव हुए। पहली बार पार्षदों को जिताने के लिए मुख्यमंत्री खुद चुनाव मैदान में उतरे और रोड शो करने के साथ जनसभाएं कीं। विरोधी दलों ने खूब तंज कसे और चटकारे लिए। कांग्रेस के पास कई मुद्दे होने के बावजूद 10 में से 5 निगम में सीधे तौर पर बहुमत जुटा लिया। राजस्थान की राजनीति में बाबोसा, जादूगर और मैडम के नाम की चर्चा होती आई है, लेकिन इस बार काकाजी की एंट्री ने हवा का रुख बदला। भाजपा के लिए क्या बड़ी चुनौतियां देखने को मिली? बिजली, सड़क, पानी और सफाई जैसे कामों की जिम्मेदारी शहरी सरकार की होती है, लेकिन चुनावों में देरी की वजह से ये जिम्मेदारी सीधे सरकार पर आ गई। अब भविष्य में इस पर काम करना होगा। मॉनिटरिंग भी सरकार को करनी होगी। बड़े नेताओं के गढ़ में पार्टी की हार हुई है। इसका फायदा विपक्षी दल उठाएंगे। जैसे, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले में पार्टी हार गई। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के चुनाव में सक्रिय होने के बावजूद 36 सालों बाद भाजपा पूर्ण बहुमत नहीं जुटा सकी। जोधपुर में भी भाजपा और कांग्रेस बराबरी पर खड़े हैं। वसुंधरा के गढ़ में पार्टी हार गई। कई मंत्रियों के इलाकों में भी पार्टी हार गई। ऐसे में बूथ मैनेजमेंट से लेकर पार्टी के पन्ना प्रमुख सिस्टम पर काम करना होगा। क्या जेन जी वोटर का इंपेक्ट है? राजस्थान में आमतौर पर बढ़ी वोटिंग को बीजेपी के लिए फायदेमंद बताया जाता है, लेकिन इस बार पार्टी को बढ़ी हुई वोटिंग का फायदा नहीं मिला। इसके पीछे जेन-जी फैक्टर को ही माना जा रहा है। हालांकि इसके आंकड़े अभी स्पष्ट नहीं है। एक साथ चुनाव होने से रिजल्ट में क्या बदलाव दिखा? एक साथ चुनाव कराने की रणनीति से दोनों पार्टियों को खास फायदा नहीं हुआ, लेकिन राज्य का फायदा हुआ। क्योंकि बार-बार लगने वाली आचार संहिता और धन की बर्बादी नहीं हुई। निकाय चुनाव के नतीजे पंचायत चुनावों को कैसे प्रभावित करेंगे? शहरी निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं का आमतौर कोई सीधा संबंध नहीं है। दोनों के मुद्दे अलग होते हैं। हालांकि पंचायत चुनाव में सत्ताधारी पार्टी के लिए ज्यादा चुनौती मानी जा रही है। इसका एक बड़ा कारण निकाय चुनाव की बड़ी हाइप है। बागियों ने रिजल्ट को कितना प्रभावित किया? पाली में राकेश भाटी, अजमेर धर्मेंद्र गहलोत जैसे बीजेपी के मजबूत नेताओं के कारण पार्टी को नुकसान हुआ। निगम के साथ परिषदों और पालिकाओं में बहुमत नहीं मिलने का सबसे बड़ा कारण भी बागी हैं, क्योंकि इसके कारण जमकर भितरघात हुआ। चुनावों के सबसे बड़े 4 उलटफेर कांग्रेस ने इन चुनाव में क्या पाया? मायने क्या? यदि पिछले निकाय चुनावों से तुलना करें, तो कांग्रेस ने इस चुनाव में कुछ खास नहीं पाया, बल्कि खोया ज्यादा है। क्योंकि पिछली बार पांच नगर निगमों सहित 125 निकायों पर उसका कब्जा था। इस बार वो बढ़त गंवा दी है। जिन निकायों में जीती, वहां ज्यादातर जगहों पर बहुमत की स्थिति में नहीं है। ऐसे में उसे अभी लंबा संघर्ष करना है। हालांकि ये भी क्लियर है कि सत्ताधारी दल को निकाय में ज्यादा सीटें मिलती आई हैं। कांग्रेस की गुटबाजी और भितरघात का क्या रहा इस बार? आमतौर पर कहा जाता है कि कांग्रेस में गुटबाजी है। इस बार भीलवाड़ा को छोड़ दें तो खुले तौर पर गुटबाजी देखने को नहीं मिली। ज्यादातर जगहों पर नेता एकजुट होकर चुनाव लड़ते दिखे। पाली, अजमेर और जोधपुर इसके बड़े उदाहरण है। कांग्रेस के सभी बड़े नेता जैसे, अशोक गहलोत, सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा, टीकाराम जूली अपने गढ़ बचाने में कामयाब रहे। हालांकि कुछ जगहों पर क्लियर बहुमत नहीं मिला, लेकिन ये नेता प्रतिष्ठा बचाने में कामयाब रहे। चुनावों का राजस्थान राजनीति में आगे क्या असर देखने को मिलेगा? मंत्रिमंडल विस्तार में मुख्यमंत्री और संगठन को अब काफी छूट मिल जाएगी। क्योंकि मंत्रियों और विधायकों की परफॉर्मेंस और निकाय चुनावों के नतीजों से परफॉर्मेंस आंकने का आधार मिल जाएगा। ऐसे में पंचायतों के चुनाव के बाद मंत्रियों का प्रमोशन, डिमोशन या बदलाव होना तय माना जा रहा है। ये खबरें भी पढ़ें 1. जयपुर, जोधपुर, कोटा में मेयर-डिप्टी मेयर के चुनाव स्थगित:राज्य निर्वाचन आयोग नए सिरे से जारी करेगा कार्यक्रम, EVM खराबी से रिजल्ट अटका 2. जयपुर समेत 4 निगमों में भाजपा बनाएगी मेयर:बीकानेर में कांग्रेस को बहुमत, पाली-अजमेर के रिजल्ट ने चौंकाया; 4 निगमों में निर्दलीय किंगमेकर 3. 47 नगर परिषदों में से 28 में निर्दलीय किंगमेकर:बारां में पहली बार 'आप' का बोर्ड; सीकर में प्रत्याशियों के समर्थकों में पथराव 4. पूर्व सीएम गहलोत और केंद्रीय मंत्री शेखावत अपने वार्ड हारे:पायलट के क्षेत्र में जीती कांग्रेस; राजस्थान निकाय चुनाव में पहली बार ‘आप’ का बोर्ड 5. जयपुर में सुनील-पुनीत-विमल मेयर की रेस में:उदयपुर में कटारिया के रिश्तेदार, कोटा में स्पीकर की पसंद पर लग सकती है मुहर, जानिए निगमों में मेयर के प्रमुख दावेदार 6. भाजपा–कांग्रेस से टिकट लाए, परिवार के वोट भी नहीं मिले:कांग्रेस में पिता–पुत्र और पति–पत्नी की जोड़ी दहाई भी नहीं छू पाई, भाजपा प्रत्याशी को मिला महज एक वोट 7. BJP-कांग्रेस के वोट शेयर में 1% से कम अंतर:आरएलपी-आप सहित 5 पार्टियों को नोटा से कम वोट, भाजपा ने कांग्रेस से 566 वार्ड ज्यादा जीते

भाजपा-कांग्रेस से टिकट लाए, परिवार के वोट भी नहीं मिले:कांग्रेस में पिता–पुत्र और पति–पत्नी की जोड़ी दहाई भी नहीं छू पाई, भाजपा प्रत्याशी को मिला महज एक वोट

राजस्थान नगरी निकाय के लिए हुए चुनाव का सोमवार को रिजल्ट आ गया। जयपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 113 से कांग्रेस कैंडिडेट गजनफर अली ने 10014 वोटों से रिकॉर्ड जीत दर्ज की। वहीं दूसरी ओर ऐसे कैंडिडेट भी हैं जिनको एक वोट भी नहीं मिले। ऐसे प्रत्याशियों ने प्रचार में कोई कमी नहीं छोड़ी, लेकिन इन्हें दूसरों के तो छोड़िए परिवार वालों के भी वोट नहीं मिले। चौंकाने वाली बात ये है कि ऐसे प्रत्याशियों में निर्दलीय ही नहीं भाजपा–कांग्रेस के प्रत्याशी भी शामिल हैं। इस तरह के सबसे अधिक नतीजे नागौर जिले में सामने आए हैं। सबसे चौंकाने वाला रिजल्ट डीडवाना जिले के परबतसर से आया। यहां भाजपा प्रत्याशी कैलाशचंद्र को महज एक वोट मिला। यदि ये मानें कि ये एक वोट भी उनका खुद का ही है तो उनके अलावा उन्हें किसी ने वोट नहीं दिया। कैलाशचंद्र वार्ड 13 से पार्टी के प्रत्याशी बनाए गए थे। दो प्रस्तावकों ने भी नहीं डाला वोट? खास बात है कि इस वार्ड में सिर्फ तीन उम्मीदवार ही चुनाव मैदान में थे। BJP प्रत्याशी कैलाश चंद्र के नामांकन में दो प्रस्तावक भी थे, लेकिन प्रस्तावकों ने भी उन्हें वोट नहीं दिया। इस वार्ड में कुल 573 वोट पड़े थे। कांग्रेस की हिना खान ने 181 वोटों से जीत दर्ज की। निर्दलीय प्रत्याशी को एक भी वोट नहीं नागौर जिले के रियांबड़ी के वार्ड नंबर 3 में निर्दलीय प्रत्याशी मोहम्मद कुरबान को एक भी वोट नहीं मिला। इस वार्ड में कुल 849 वोट पड़े। निर्दलीय प्रत्याशी समद मोहम्मद ने 271 वोट हासिल किए और 123 मतों से जीत दर्ज की। हालाकि माेहम्मद कुरबान ने चुनाव से पहले कांग्रेस को समर्थन दे दिया था। इसी प्रकार वार्ड 5 में निर्दलीय प्रत्याशी सुरेश को महज 7 वोट मिले। वार्ड में कुल 638 वोट पड़े। यहां कालू खां ने 303 वोट हासिल कर 92 मतों से जीत दर्ज की। वार्ड नंबर 8 में निर्दलीय प्रत्याशी मोहनराम को 5 और शांतिलाल को महज 2 वोट मिले। इस वार्ड में कुल 814 वोट पड़े थे। यहां उगमाराम ने 214 मतों से जीत दर्ज की। वार्ड 15 में भी निर्दलीय प्रत्याशी दिनेश को एक भी वोट नहीं मिला। भाजपा प्रत्याशी को सिर्फ 8 वोट रियांबड़ी में वार्ड नंबर 6 में भाजपा प्रत्याशी शिवलाल को महज 8 वोट मिले। शिवलाल ने बताया कि वार्डवासियों ने कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों का समर्थन किया। जिसके कारण उन्हें इतने ही वोट मिले। इस वार्ड में कुल 778 वोट पड़े। अन्नाराम ने 322 वोट हासिल कर 114 मतों से जीत दर्ज की। आरएलपी प्रत्याशी को 9 वोट रियांबड़ी में वार्ड नंबर 10 में RLP प्रत्याशी शिवराम बगेरिया को सिर्फ 9 वोट मिले। इस वार्ड में कुल 543 वोट पड़े थे।। भाजपा प्रत्याशी मंजू देवी ने 231 वोट हासिल कर 60 मतों से जीत दर्ज की। इसी प्रकार वार्ड नंबर 11 में आरएलपी प्रत्याशी नौरतमल भाटी को महज 2 वोट मिले। वे पूर्व चेयरमैन गिरधारीलाल भाटी के पुत्र हैं। नौरतमल ने बताया कि उन्होंने दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ा था और इस वार्ड में कभी प्रचार करने नहीं गए। इस वार्ड में कुल 204 वोट पड़े थे। कांग्रेस प्रत्याशी को 1 वोट रियांबड़ी के वार्ड नंबर 15 में कांग्रेस प्रत्याशी मजीद मोहम्मद को महज 1 वोट मिला। वार्ड में कुल 291 वोट पड़े। इस वार्ड में भाजपा प्रत्याशी सुनील कुमार चौहान ने 208 वोट हासिल कर 136 मतों से जीत दर्ज की। मजीद मोहम्मद ने बताया कि जब मैं चुनाव प्रचार में था तो करीब 35 समर्थक तो साथ ही चलते थे, लेकिन उनके मेरे पड़ोसी गजेंद्र वैष्णव ने आरएलपी को समर्थन दिया। इस वजह से मेरे वोट आरएलपी को चले गए। पूर्व सरपंच को महज 2 वोट रियांबड़ी के वार्ड नंबर 20 में कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व सरपंच भरत कुमार सांखला को महज 2 वोट मिले। इस वार्ड में भाजपा, आरएलपी और निर्दलीय सहित कुल 9 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे और सांखला को इन सभी प्रत्याशियों में सबसे कम मत मिले। खास बात यह है कि भरत कुमार सांखला रियांबड़ी के सरपंच रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि वार्डवासियों की ओर से सामूहिक विरोध किया गया था, जिसके बाद उन्होंने इस वार्ड से अपना समर्थन छोड़ दिया था। पति-पत्नी दोनों चुनाव लड़े, दोनों को मिले सिर्फ 6-6 वोट कोटपूतली–बहरोड़ जिले की मांढण नगरपालिका चुनाव में वार्ड नंबर 19 और 20 का परिणाम चर्चा का विषय बना हुआ है। वार्ड नंबर 19 से कांग्रेस प्रत्याशी रिशाल देवी और वार्ड नंबर 20 से उनके पति सरजीत ने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा। परिणाम में दोनों प्रत्याशियों को अपने-अपने वार्ड से महज 6-6 वोट ही मिले। वार्ड नंबर 19 में कुल 313 मतदाता थे, जबकि वार्ड नंबर 20 में 291 मतदाता थे। कांग्रेस तीन वार्डों में 5 से कम वोट ले सकी पीसांगन नगरपालिका चुनाव में पिता पुत्र की जोड़ी को अलग–अलग वार्डों में मिलाकर भी दिहाई जितने वोट नहीं मिले। यहां वार्ड 3 में उगमचंद कांग्रेस के प्रत्याशी थे। उमगचंद को महज 4 वोट मिले। वहीं उनके बेटे जवरी लाल वार्ड 25 में कांग्रेस के प्रत्याशी थे। जवरी लाल को भी 4 ही वोट मिले। पीसांगन के ही वार्ड संख्या 20 में कांग्रेस के लिए एक और परिणाम चौंकाने वाला रहा। यहां पार्टी के प्रत्याशी सानू को महज 2 वोट मिले। मथानिया: जोधपुर जिले के मथानिया के एक वार्ड में भाजपा को महज 7 वोट मिले। मथानिया के वार्ड 3 में श्यामलाल भाजपा के प्रत्याशी थे। उन्हें 7 वोट ही मिले। इस वार्ड में कुल 581 वोट पड़े थे। इसी प्रकार वार्ड 23 में भाजपा प्रत्याशी संतोकराम मात्र 8 वोट मिले। इस वार्ड में 697 वोट पड़े थे। मथानिया के ही वार्ड नंबर 10 से कांग्रेस प्रत्याशी सुमायला बानो को मात्र 4 वोट मिले। इस वार्ड में कुल तीन प्रत्याशी मैदान में थे। कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रही। यहां कुल 330 वोट पड़े। विराटनगर: जयपुर जिले की विराटनगर नगर पालिका वार्ड नंबर 4 में कांग्रेस प्रत्याशी अनिल छिपी को महज 4 वोट मिले हैं। इस वार्ड में 298 वोट पड़े। इसी प्रकार वार्ड 3 में निर्दलीय प्रत्याशी विनोद कुमार बैराठी को 9 वोट मिले। वार्ड में कुल 380 वोट पड़े। पलसाना: सीकर जिले के पलसाना में कांग्रेस के तीन उम्मीदवारों को 10 से कम वोट मिले। यहां वार्ड नंबर 4 में यूनुस खान को महज 8 वोट मिले। इस वार्ड में कुल 412 वोट हैं। वार्ड नंबर 8 में मीरा देवी को 4 वोट मिले। यहां कुल 403 वोट हैं। वार्ड नंबर 13 में कमल पवार को 6 वोट मिले। यहां कुल 255 वोट पड़े। इनपुट: मकराना से जावेद मोहम्मद, रियांबड़ी से विशनाराम सैनी, पीसांगन से प्रदीप चौधरी, मथानिया से मूलाराम परिहार, विराटनगर से रवि मित्तल, मांढ़ण से अमन कुमार, रानोली से लोकेश कुमार। …………………………. ये खबरें भी पढ़ें…. 1. रिजल्ट में ‘काकाजी’ की एंट्री का असर:जनता ने भाजपा-कांग्रेस को डराकर जिताया; 140+ निकायों में निर्दलीय खोलेंगे सत्ता का ताला राजस्थान के निकाय चुनाव के नतीजों का एक वाक्य में विश्लेषण करें तो भाजपा जीती है, लेकिन कांग्रेस भी बुरी तरह से नहीं हारी है। निकाय चुनाव में ‘काकाजी’ की एंट्री का असर भी दिख रहा है।वैसे चुनाव संख्या के हिसाब से भाजपा 309 निकायों में से 163 में जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर आगे है। कांग्रेस 103 पर है, लेकिन ये आंकड़े अधूरी सच्चाई हैं। पूरी खबर पढ़ें… 2. जयपुर समेत 4 निगमों में भाजपा बनाएगी मेयर:बीकानेर में कांग्रेस को बहुमत, पाली-अजमेर के रिजल्ट ने चौंकाया; 4 निगमों में निर्दलीय किंगमेकर 3. 47 नगर परिषदों में से 28 में निर्दलीय किंगमेकर:बारां में पहली बार 'आप' का बोर्ड; सीकर में प्रत्याशियों के समर्थकों में पथराव 4. पूर्व सीएम गहलोत और केंद्रीय मंत्री शेखावत अपने वार्ड हारे:पायलट के क्षेत्र में जीती कांग्रेस; राजस्थान निकाय चुनाव में पहली बार ‘आप’ का बोर्ड 5. जयपुर में मेयर की रेस में सुनील-पुनीत सहित 4 नाम:उदयपुर में कटारिया के रिश्तेदार, कोटा में स्पीकर की पसंद अहम, जानिए निगमों में प्रमुख दावेदार 6. भाजपा–कांग्रेस से टिकट लाए, परिवार के वोट भी नहीं मिले:कांग्रेस में पिता–पुत्र और पति–पत्नी की जोड़ी दहाई भी नहीं छू पाई, भाजपा प्रत्याशी को मिला महज एक वोट 7. BJP-कांग्रेस के वोट शेयर में 1% से कम अंतर:आरएलपी-आप सहित 5 पार्टियों को नोटा से कम वोट, भाजपा ने कांग्रेस से 566 वार्ड ज्यादा जीते

श्रीगंगानगर नगर परिषद चेयरमैन की दौड़ में 3 नाम:मूंदड़ा, दावड़ा और डॉ. मैय्यर में टक्कर, जानिए- किसे मिलेगी कुर्सी

श्रीगंगानगर नगर परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद अब चर्चा चेयरमैन पद को लेकर शुरू हो गई है। 65 वार्डों में से 30 सीटें जीतकर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। कांग्रेस को 17 और निर्दलीयों को 18 सीटें मिली हैं। फिलहाल नगर परिषद में बहुमत के लिए 33 पार्षदों की जरूरत है। ऐसे में भाजपा बहुमत से सिर्फ 3 सीट दूर है। 18 निर्दलीयों में कई पार्षदों को भाजपा समर्थक माना जा रहा है। यदि इनमें से तीन भी भाजपा के साथ आते हैं तो भाजपा आसानी से बहुमत का आंकड़ा पूरा कर बोर्ड बना सकती है। हालांकि बोर्ड बनने की तस्वीर साफ होने के साथ ही भाजपा में चेयरमैन पद के दावेदारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पढ़िए- सबसे प्रभावशाली 3 दावेदार संजय मूंदड़ा का नाम सबसे आगे चेयरमैन पद की दौड़ में संजय मूंदड़ा का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। आढ़त व्यवसाय से जुड़े मूंदड़ा लंबे समय से भाजपा से जुड़े हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होती है। उन्होंने वार्ड 55 से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीता है। पार्टी में लंबे समय से सक्रियता, स्थानीय पहचान और राजनीतिक पकड़ उनके पक्ष में जाती है। चुनाव से पहले भी उनके चेयरमैन पद के दावेदार होने की चर्चा थी। यही वजह है कि परिणाम आने के बाद उनका नाम सबसे पहले लिया जा रहा है। अजय दावड़ा को परिषद का अनुभव अजय दावड़ा उर्फ लक्की दावड़ा भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वे नगर परिषद के पूर्व उपसभापति रह चुके हैं। उन्होंने वार्ड 58 से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की है। पूर्व उपसभापति रहने के कारण उन्हें परिषद के कामकाज, सदन की कार्यप्रणाली और पार्षदों के साथ तालमेल का अनुभव है। संगठन और स्थानीय राजनीति में सक्रियता भी उनके पक्ष में जाती है। डॉ. भरत पाल मैय्यर भी दौड़ में तीसरा प्रमुख नाम डॉ. भरत पाल मैय्यर का है। उन्होंने वार्ड 21 से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की है। मैय्यर का नगर परिषद की राजनीति से पुराना जुड़ाव रहा है और शहर में डॉक्टर के रूप में भी उनकी पहचान है। उनका पूर्व परिषद अनुभव, शहर में पहचान और भाजपा संगठन से जुड़ाव उन्हें चेयरमैन पद की दौड़ में बनाए हुए है। पहले निर्दलीयों का साथ, फिर चेयरमैन पर फैसला भाजपा के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाना है। 30 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़ा दल जरूर है, लेकिन बहुमत के लिए उसे 3 और पार्षदों की जरूरत है। यदि 3 निर्दलीय भाजपा के साथ आते हैं तो उसके पास 33 पार्षद हो जाएंगे और बोर्ड गठन का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके बाद पार्टी के सामने चेयरमैन के नाम पर सहमति बनाने की चुनौती होगी। हालांकि निर्दलीयों का रुख भी बोर्ड गठन के साथ चेयरमैन के चुनाव में महत्वपूर्ण रहेगा। श्रीगंगानगर चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… श्रीगंगानगर में 65 वार्डों के नतीजे घोषित:बीजेपी 30, कांग्रेस 17 और 18 निर्दलीय ने जीत दर्ज कराई श्रीगंगानगर नगर परिषद के 65 वार्डों के नतीजे सामने आने के बाद अब बोर्ड गठन की तस्वीर भी लगभग साफ हो गई है। भाजपा 30 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि कांग्रेस को 17 और निर्दलीयों को 18 वार्डों में जीत मिली है। पूरी खबर पढ़िए

जयपुर में मेयर की रेस में सुनील-पुनीत सहित 4 नाम:उदयपुर में कटारिया के रिश्तेदार, कोटा में स्पीकर की पसंद अहम; जानिए निगमों के प्रमुख दावेदार

नगर निकाय चुनावों के नतीजे आ गए हैं। प्रदेश के 10 नगर निगमों में से बीजेपी 4 में आसानी से बोर्ड बनाते हुए नजर आ रही है। वहीं, कांग्रेस को बीकानेर नगर निगम में पूर्ण बहुमत मिला है और पाली में निर्दलीयों की मदद से आसानी से बोर्ड बना लेगी। अलवर में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी है। जोधपुर, अजमेर और भरतपुर नगर निगम में स्थिति फिलहाल साफ नहीं है। इसके साथ ही जिन निगमों में बहुमत की स्थिति स्पष्ट है, वहां मेयर के दावेदारों ने लॉबिंग भी शुरू कर दी है। जयपुर में वैश्य समाज से मेयर बनाया जा सकता है। वहीं, उदयपुर में जैन या ब्राह्मण चेहरे पर दांव संभव है। इसी तरह कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा और पाली में कई नेता रेस में लगे हैं। स्पष्ट बहुमत और बहुमत के करीब वाले 7 नगर निगमों में कौन-कौन से चेहरे मेयर बनने की रेस में हैं? कौनसे- समीकरण उनके पक्ष में हैं? जोधपुर, अजमेर और भरतपुर में किसका बोर्ड बनने की संभावना है? पढ़िए स्पेशल स्टोरी में… 1. जयपुर नगर निगम : वैश्य समाज से बन सकता है मेयर बीजेपी का कोर वोटर ब्राह्मण, वैश्य, राजपूत और सामान्य वर्ग को माना जाता है। जानकारों का मानना है कि पार्टी ने जयपुर की सांगानेर विधानसभा सीट से भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाकर ब्राह्मण कोटे को भर दिया है। वहीं, विद्याधर नगर सीट से दीया कुमारी को उप मुख्यमंत्री बना रखा है। वे राजपूत समाज से आती हैं। जयपुर की सांसद मंजू शर्मा भी ब्राह्मण हैं। ऐसे में पार्टी वैश्य समाज से मेयर बनाकर सामाजिक और जातिगत संतुलन को साधना चाहती है। मेयर की 5 सीटें महिलाओं के लिए पहले से आरक्षित हैं। ऐसे में पार्टी किसी पुरुष प्रत्याशी को ही जयपुर का मेयर बनाना चाहती है। उनमें ये प्रमुख दावेदार हैं… सुनील कोठारी : मेयर पद के सबसे प्रबल दावेदारों में नाम चल रहा है। कोठारी का जयपुर के जेम्स एंड ज्वेलरी बिजनेस में बड़ा नाम है। वे पार्टी में कार्यालय प्रभारी, प्रदेश मंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर भी रहे हैं। पार्टी ने उन्हें निर्वतमान मेयर कुसुम यादव का टिकट काटकर वार्ड-112 से प्रत्याशी बनाया था। इसके अलावा वे जैन समुदाय से आते हैं। पार्टी वैश्य में भी जैन को मौका देकर इस महत्वपूर्ण कम्युनिटी को साध सकती है। पुनीत कर्नावट : मेयर की दौड़ में दूसरा सबसे प्रबल दावेदार पुनीत कर्नावट को माना जा रहा है। कर्नावट निर्वतमान डिप्टी मेयर हैं। छात्र राजनीति से उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। एबीवीपी के कार्यकर्ता रहे हैं। प्रदेश युवा मोर्चा में प्रदेश मंत्री भी रहे। उन्हें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का नजदीकी माना जाता है। वे विधानसभा चुनाव में मालवीय नगर सीट से दावेदारी भी जता रहे थे। लेकिन उस समय पार्टी ने कालीचरण सराफ को मौका दिया था। विमल अग्रवाल : वार्ड-135 से जीते प्रत्याशी विमल अग्रवाल भी मेयर की रेस में हैं। उनकी पहचान पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता की मानी जाती है। जिला उपाध्यक्ष और दो बार के पार्षद हैं। युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। हालांकि, घनश्याम तिवाड़ी के साथ बीजेपी छोड़कर उनकी बनाई दीनदयाल वाहिनी पार्टी में चले गए थे। लेकिन फिर से बीजेपी मे लौट आए। इसी तरह से वार्ड-98 से प्रत्याशी सुभाष चंद्र सिंघी भी मेयर पद के लिए चौंकाने वाला नाम हो सकता है। सिंघी आरएसएस के कार्यक्रमों में हमेशा प्रमुख सहयोगी रहे हैं। पूर्व मंत्री और राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी के करीबी हैं। शहर के प्रमुख व्यवसायी भी हैं। सुभाष सिंघी पार्टी के आर्थिक प्रकोष्ठ से जुड़े रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक जयपुर में यदि भाजपा हाइब्रिड मॉडल अपनाती है तो वैश्य समाज के किसी नॉन पार्षद नाम पर भी विचार हो सकता है। इनमें खंडेला ट्रस्ट के संस्थापक पुरुषोत्तम गुप्ता सहित कई नामों की चर्चा है। 2. उदयपुर नगर निगम : जैन-ब्राह्मण चेहरे पर दांव संभव उदयपुर नगर निगम में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला है। पार्टी ने यहां 80 में से 53 सीटें जीती हैं। यहां प्रमोद सामर मेयर पद के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। सामर बीजेपी सहकारिता प्रकोष्ठ के संयोजक हैं। राज्यसभा चुनाव में भी उनके नाम की चर्चा थी। उदयपुर में बीजेपी पार्षदों में उम्र और अनुभव के आधार पर सबसे वरिष्ठ नेता हैं। उन्हें पार्षद का चुनाव लड़ाने के साथ ही उनके मेयर बनने की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। प्रदेश और दिल्ली के नेताओं से सीधे संपर्क उन्हें इस पद का प्रबल दावेदार बनाते हैं। इसके अलावा पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट भी मेयर की दौड़ में हैं। संघ में अच्छी पकड़ और जातिगत समीकरण उनकी दावेदारी को मजबूत बनाते हैं। शहर बीजेपी अध्यक्ष राजपूत हैं और विधायक ताराचंद जैन समुदाय से आते हैं। ऐसे में अगर ब्राह्मण को मौका मिलता है तो दिनेश भट्ट को प्रमोद सामर से पहले प्राथमिकता मिल सकती है। भट्ट उस समय भी चर्चा में आए थे, जब उन्होंने टिकट मिलने से पहले ही बीजेपी के प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भर दिया था। वहीं राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के दोनों दामादों के भाई आकाश और अतुल चंडालिया भी इस बार चुनाव में जीत गए हैं। ऐसे में अतुल चंडालिया का नाम भी मेयर पद के लिए चलाया जा रहा है। 3. कोटा : लोकसभा स्पीकर की पसंद को प्राथमिकता कोटा नगर निगम में मेयर की सीट महिला ओबीसी के लिए रिजर्व है। यहां बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला है। इस सीट पर बीजेपी की अनुसुइया गोस्वामी और सीमा चौधरी का नाम प्रबल दावेदारों में शामिल है। अनुसुइया गोस्वामी बीजेपी संगठन में प्रदेश मंत्री भी रह चुकी हैं और बीजेपी महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष भी रही हैं। इन्हें लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के खेमे में माना जाता है। वहीं, सीमा चौधरी स्पीकर ओम बिड़ला के वार्ड-83 से चुनाव जीतकर आई हैं। सीमा के पति धीरेन्द्र चौधरी पहले पार्षद रह चुके हैं। जो बिड़ला खेमे के भरोसेमंद नेताओं में शामिल हैं। जानकारों के मुताबिक कोटा के मेयर पद पर लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला की पसंद पर आखिरी मुहर लगाई जा सकती है। 4. बीकानेर नगर निगम : कल्ला के भतीजे को मिल सकता है मौका केवल बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है। यहां मेयर पद के प्रबल दावेदारों में पूर्व मंत्री बीडी कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला का नाम सबसे आगे है। कल्ला के विधानसभा क्षेत्र बीकानेर पश्चिम के वार्डों से कांग्रेस ने अच्छी जीत दर्ज की है। अनिल कल्ला अपनी आक्रामक पॉलिटिक्स के लिए जाने जाते हैं। लंबे समये बीकानेर में राजीव गांधी क्लब के जरिए समाज सेवा से जुड़े हुए हैं। हालांकि चर्चा यह भी है कि अगर अनिल कल्ला मेयर बनते हैं तो भविष्य में बीडी कल्ला की विधायकी की दावेदारी कमजोर पड़ सकती है। इस स्थिति में दिलीप बांठिया मेयर बन सकते हैं। बांठिया पहले पार्षद और जिला उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनका पक्ष इसलिए भी मजबूत है कि वे जिस गंगाशहर इलाके से चुनाव जीते हैं, वह आरएसएस का गढ़ है और यहां पहली बार कांग्रेस को बढ़त मिली है। तीसरे प्रबल दावेदारों में पूर्व यूआईटी चेयरमैन मकसूद अहमद का नाम है। मकसूद पहले सभापति भी रह चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का वीटो लगता है तो वे भी मेयर बन सकते हैं। एक फैक्ट यह भी है कि बीकानेर में बड़ी संख्या में मुस्लिम प्रत्याशियों को जीत मिली है। कांग्रेस भी उन्हें मेयर बनाकर अल्पसंख्यक समुदाय के साथ खड़े होने का मजबूत संदेश दे सकती है। 5. भीलवाड़ा नगर निगम : सुमन ओझा-पूर्णिमा जैन में मुकाबला यहां बीजेपी ने बहुमत से ज्यादा 70 में से 45 सीटें जीत ली हैं। भीलवाड़ा नगर निगम में मेयर की सीट जनरल महिला के लिए रिजर्व है। यहां वार्ड-60 से जीतकर आई सुमन ओझा और वार्ड-61 से जीतीं पूर्णिमा जैन के बीच मेयर पद के लिए सीधा मुकाबला है। सुमन ओझा पहले भी एक बार पार्षद रह चुकी हैं। उन्हें सांसद दामोदर अग्रवाल और पूर्व मेयर राकेश पाठक के खेमे से माना जाता है। वहीं, पूर्व विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी के खेमे से आने वाली पूर्णिमा जैन का नाम भी मेयर प्रत्याशी के तौर पर चल रहा है। पूर्णिमा के पति विजय पोखरणा भी पार्टी में जिला प्रवक्ता हैं। भीलवाड़ा में जैन समुदाय बड़ी संख्या में है। ऐसे पार्टी उनके नाम पर भी विचार कर सकती है। 6. अलवर नगर निगम : बीजेपी का बोर्ड बनना तय नगर निकाय चुनावों में अलवर के परिणामों ने चौंकाया है। यहां बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत तो नहीं है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निर्दलीयों की सहायता से राह आसान हो सकती है। निगम में कुल 65 वार्ड हैं, जिनमें से बीजेपी के 28 और कांग्रेस के 23 प्रत्याशी पार्षद का चुनाव जीते हैं। बहुमत के लिए 33 पार्षदों की जरूरत है। बीजेपी को केवल 5 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन चाहिए। जबकि 13 निर्दलीय जीते हैं। अगर बीजेपी का बोर्ड बनता है तो मेयर की रेस में 2 चेहरे सबसे प्रमुख हैं। पूर्व चेयरमैन रहे अजय अग्रवाल की पत्नी सुमनलता अग्रवाल और पुरुषोत्तम मनचंदा की पुत्रवधु नेहा मनचंदा, दोनों मजबूत हैं। पुरुषार्थी समाज से होने के कारण नेहा मनचंदा का नाम सोशल इंजीनियरिंग के लिहाज से प्रबल माना जा रहा है। तीसरी दावेदार के तौर पर नीलेश खंडेलवाल की पुत्रवधु अपूर्वा शर्मा का नाम चर्चा में है। 7. पाली नगर निगम : कांग्रेस का बोर्ड बनना तय यहां 65 वार्डों में से कांग्रेस ने 29 वार्ड में जीत दर्ज की है। कांग्रेस बहुमत से महज 4 सीट दूर है। 15 निर्दलीय जीते हैं। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि वे निर्दलीयों के साथ से आसानी से बोर्ड बना लेंगे। अगर कांग्रेस का बोर्ड बनता है तो मेयर की दावेदारी में वार्ड-38 से चुनाव जीती कांग्रेस नेता प्रदीप हिंगड़ की पत्नी राजबाला हिंगड़ का नाम सबसे प्रबल माना जा रहा है है। कांग्रेस विधायक भीमराज भाटी और शहर ब्लॉक अध्यक्ष का उन्हें समर्थन है। जयपुर तक भी उनकी अच्छी लॉबिंग है। इनके अलावा सुमित्रा जैन भी मेयर पद के दावेदारों में शामिल हैं। वे जैन समुदाय से आती हैं। कांग्रेस प्रदेश कार्यकारिणी में भी रह चुकी हैं। उनकी जीत इसलिए भी बड़ी हो जाती है, क्योंकि उन्होंने बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस के मजबूत बागी को हराया है। वहीं, तीसरे दावेदार के तौर पर अनामिका सोलंकी मेवाड़ा का नाम भी चर्चा में है। भरतपुर : जिसकी सत्ता, उसका बोर्ड नगर निकाय के चुनावों में सबसे ज्यादा चौंकाने वाले परिणाम भरतपुर से आए हैं। भरतपुर नगर निगम में निर्दलीयों ने 65 में से 36 सीटें जीतकर बहुमत जुटा लिया है। लेकिन इतिहास पर नजर डालें तो यह समीकरण भी बीजेपी के पक्ष में जाता है। भरतपुर में हमेशा निर्दलीयों का बोलबाला रहता है। साल 2019 के चुनावों में भी यहां दोनों पार्टियों से ज्यादा निर्दलीय प्रत्याशी जीते थे। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, ऐसे में बोर्ड कांग्रेस का बना और अभिजीत जाटव मेयर बने थे। इससे पहले साल 2014 में निर्दलीय ज्यादा जीते थे, लेकिन सत्ता बीजेपी की थी तो बोर्ड-मेयर बीजेपी का बना था। ऐसे में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यहां निर्दलीय सत्ता के साथ ही जाएंगे। अजमेर में 36 साल बाद बोर्ड बनाने के करीब कांग्रेस, जोधपुर में पलड़ा बराबर अजमेर नगर निगम में करीब 36 साल बाद कांग्रेस बोर्ड बनाने के करीब पहुंच गई है। अजमेर नगर निगम की 80 सीटों से कांग्रेस ने 37 और बीजेपी ने 32 सीटें जीती हैं। ऐसे में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से केवल 4 सीटें पीछे है। कांग्रेस का दावा है कि उसके तीनों बागी कांग्रेस खेमे में शामिल हो गए हैं और अन्य को साधकर वो बोर्ड बना लेगी। जोधपुर नगर निगम की 100 सीटों में से बीजेपी-कांग्रेस ने 44-44 सीटें जीती हैं। 10 वार्ड निर्दलीयों और एक वार्ड आरएलपी के खाते में गया है। वहीं एक वार्ड का चुनाव परिणाम रुका हुआ है। प्रदेश में सत्ता होने के कारण भाजपा के पास बोर्ड बनाने का एडवांटेज नजर आ रहा है। वहीं, कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रतिष्ठा सीधे इस निगम से जुड़ी हुई है। ऐसे में सियासी जानकारों का मानना है कि गहलोत की रणनीति यहां बीजेपी पर भारी भी पड़ सकती है। निर्दलीय किंग मेकर की भूमिका में हैं। … ये खबरें भी पढ़ें… 1. रिजल्ट में ‘काकाजी’ की एंट्री का असर:जनता ने भाजपा-कांग्रेस को डराकर जिताया; 140+ निकायों में निर्दलीय खोलेंगे सत्ता का ताला राजस्थान के निकाय चुनाव के नतीजों का एक वाक्य में विश्लेषण करें तो भाजपा जीती है, लेकिन कांग्रेस भी बुरी तरह से नहीं हारी है। निकाय चुनाव में ‘काकाजी’ की एंट्री का असर भी दिख रहा है।वैसे चुनाव संख्या के हिसाब से भाजपा 309 निकायों में से 163 में जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर आगे है। कांग्रेस 103 पर है, लेकिन ये आंकड़े अधूरी सच्चाई हैं। पूरी खबर पढ़ें… 2. पूर्व सीएम गहलोत और केंद्रीय मंत्री शेखावत अपने वार्ड हारे:पायलट के क्षेत्र में जीती कांग्रेस; राजस्थान निकाय चुनाव में पहली बार ‘आप’ का बोर्ड 3. राजस्थान- 10 में से 4 नगर निगमों में निर्दलीय किंगमेकर:पाली-अजमेर के रिजल्ट ने चौंकाया; बीकानेर में कांग्रेस, भीलवाड़ा-उदयपुर में भाजपा बनाएगी मेयर 4. भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों को 1-1 वोट मिला:सीकर में कांग्रेस-निर्दलीय समर्थक भिड़े, पत्थर फेंके; वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ में कांग्रेस जीती 5. जयपुर, जोधपुर, कोटा में मेयर-डिप्टी मेयर के चुनाव स्थगित:राज्य निर्वाचन आयोग नए सिरे से जारी करेगा कार्यक्रम, EVM खराबी से रिजल्ट अटका 6. भाजपा–कांग्रेस से टिकट लाए, परिवार के वोट भी नहीं मिले:कांग्रेस में पिता–पुत्र और पति–पत्नी की जोड़ी दहाई भी नहीं छू पाई, भाजपा प्रत्याशी को मिला महज एक वोट 7. BJP-कांग्रेस के वोट शेयर में 1% से कम अंतर:आरएलपी-आप सहित 5 पार्टियों को नोटा से कम वोट, भाजपा ने कांग्रेस से 566 वार्ड ज्यादा जीते

पाली नगर निगम में जीतने वाले प्रत्याशियों की प्रोफाइल:कोई 12 वोट से जीता, कोई 1427 वोटों से हारा; सबसे बड़ा मार्जिन 1427 मतों का

पाली नगर निगम चुनाव के नतीजों में हार-जीत का मार्जिन रोचक रहा। कोई 12 वोट से हारा तो किसी का 1427 वोटों के बड़े अंतर से जीता। 35 वार्ड से कांग्रेस की नजमा बानो ने भाजपा की शाहिना को 1427 के बड़े अंतर से हराया। नजमा को 1642 और शाहीना को 215 वोट मिले। वार्ड संख्या 39 में कड़ी टक्कर देखने को मिली। कांग्रेस की अनामिका सोलंकी ने भाजपा के पीयूष शर्मा को 12 वोट से हराया। अनामिका को 581 और पीयूष को 569 वोट मिले। वार्ड 41 में निर्दलीय कांतिलाल ने भाजपा के लुम्बाराम चौधरी को 24 वोट से हराया। वार्ड सात से भाजपा की पानी देवी ने निर्दलीय पार्वती को 1321 वोट के अंतर से हराया। वार्ड 17 में निर्दलीय सुलेमान ने निर्दलीय शिवेंद्रसिंह राजपुरोहित को 20 वोट के अंतर से हराया। वार्ड 38 में कांग्रेस की राजबाला हिंगड़ ने भाजपा की नयनश्री को 949 वोट से हराया। पढ़ें प्रत्याशियों की प्रोफाइल…

अजमेर में 4 वोट से जीता कांग्रेस पार्षद:निलंबित ASI की पत्नी मीनाक्षी मीणा भी बनी पार्षद; 80 पार्षदों की प्रोफाइल

अजमेर नगर निगम चुनाव की मतगणना पूरी होने के साथ 80 वार्डों में पार्षदों की तस्वीर साफ हो गई है। कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है। भाजपा को 32 और निर्दलीयों को 11 सीटें मिलीं। इन नतीजों में सियासत के साथ कई दिलचस्प चेहरे और किस्से भी सामने आए हैं। देवनानी के वार्ड-4 की हॉट सीट पर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आईं मोनिका जैन जीतीं और 16.03 करोड़ रुपए की संपत्ति के साथ सबसे अमीर पार्षद बनीं। चुनाव के दौरान निलंबित हुए एएसआई की पत्नी मीनाक्षी मीणा भी वार्ड-60 से कांग्रेस के टिकट पर जीतकर पार्षद बन गईं। वहीं, वार्ड-26 में सुनील केन ने महज 4 वोट से जीत दर्ज की, जबकि वार्ड-80 की 21 वर्षीय काश्यपी सांखला सबसे युवा पार्षद बनीं। अब देखें आपके वार्ड से कौन बना पार्षद..... वार्ड संख्या एक से हारे हुए शैलेन्द्र अग्रवाल कांग्रेस से है। जीते विनोद डीडवानिया ग्रेजुएट है और इनकी कुल संपत्ति: 3.16 करोड़ रुपए है। ये पेशे से उद्योगपति हैं। राजनीति में नया चेहरा हैं। विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी से नजदीकी के चलते टिकट मिला। इनकी पत्नी के पास 3.62 करोड़ की कुल संपत्ति है, जो इनसे 50 लाख अधिक है। पिछली बार इसी वार्ड से कांग्रेस के बनवारी लाल शर्मा जीते थे। वार्ड 2 से हारी हुई रितू मामनानी भाजपा से है। जीते हुए कमल बैरवा 10वीं पास है। इनकी कुल संपत्ति: 5.08 लाख रुपए है। ये कांग्रेस से 2010 में पार्षद रह चुके हैं। पेशे से सिविल कॉन्ट्रेक्टर हैं। साल 2015 में पुलिस केस के चलते चुनाव नहीं लड़ पाए। भाई को चुनाव में उतारा था। अभी कांग्रेस के मंडल अध्यक्ष हैं। पिछली बार इस वार्ड से भाजपा के मनोज मामनानी जीते थे। वार्ड 3 से हारी हुई संध्या काबरा निर्दलीय थी। अनामिका शर्मा 10वीं पास है। इनकी कुल संपत्ति: 37.61 लाख रुपए है। भाजपा नेता सीताराम शर्मा की पुत्र वधु, परिवार का भाजपा से जुड़ाव, लेकिन पहली बार चुनाव मैदान में। स्पीकर वासुदेव देवनानी की करीबी है। पिछली बार इस वार्ड से भाजपा से प्रतिभा पाराशर जीती थी। वार्ड 4 से हारी हुई हेमा गहलोत निर्दलीय थी। जीती हुई मोनिका जैन पोस्ट ग्रेजुएट है। कुल संपत्ति: 16.03 करोड़ रुपए है। पिछला चुनाव कांग्रेस के टिकट पर वार्ड 71 से लड़ा और भाजपा शहर जिलाध्यक्ष रमेश सोनी इस वार्ड से पार्षद जीते। चुनाव से कुछ दिन पहले ही भाजपा ज्वॉइन की और टिकट मिला। पिछली बार इस वार्ड से भाजपा के ज्ञान सारस्वत जीते थे। वार्ड 5 से हारने वाली लक्ष्मी रावत कांग्रेस से है। जीती हुई मंजू देवी रावत साक्षर है। कुल संपत्ति: 22 लाख रुपए है। हाथीखेड़ा ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच लालासिंह रावत की पत्नी हैं। राजनीति में नया चेहरा। टिकट मिलने का कारण पति की राजनीति में सक्रियता, स्पीकर से निकटता है। पिछली बार इस वार्ड से भाजपा के अजय वर्मा जीते थे। वार्ड संख्या 6 से हारे रामदेवसिंह रावत कांग्रेस से है। मीनाक्षी (39 वर्ष) शिक्षा पोस्ट ग्रेजुएट, कुल संपत्ति 4.39 लाख। भाजपा कार्यकर्ता शक्तिसिंह की पत्नी, नया चेहरा, टिकट मिलने का कारण पति की राजनीति में सक्रियता। आर्मी के सामान की सप्लाई का स्टोर है। पिछले चुनाव में निर्दलीय कुंदन वैष्णव जीते थे। वार्ड संख्या 7 से हारे हुए अरूण सिंह कांग्रेस से है। विवेक रावत का प्रोफाइल -शिक्षा: एलएलबी, कुल संपत्ति: 49.19 लाख रुपए, पहली बार चुनाव लड़ रहे, नया चेहरा, इवेंट मैनेजमेंट व शराब कारोबारी। पिछले चुनाव में इस वार्ड से आरएलपी से गीता लखन जीती थी। वार्ड आठ से हारे हुए पंकज सिंह राठौड़ भाजपा से है। कुंदन वैष्णव का प्रोफाइल- पिछली बार पार्षद थे और निर्दलीय ही चुनाव जीता। इस बार भाजपा से टिकट मांगा था लेकिन मिला नहीं। पिछले चुनाव में भाजपा से सुभाष जीते थे। वार्ड 9 में हारे हुए अनिल नरवाल भाजपा से है। मीनाक्षी यादव का प्रोफाइल- शिक्षा पोस्ट ग्रेजुएट, कुल संपत्ति 13.95 लाख। महिला कांग्रेस में प्रदेश सचिव और उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। पेशे से वकील हैं। पिता अजमेर से दो बार और मां तीन बार पार्षद रह चुकी हैं। पिछली बार भाजपा की अंजली जीती थी। वार्ड संख्या 10 से हारी गांधारी जसोदिया कांग्रेस से है। हेमलता जाटव का प्रोफाइल- शिक्षा: पोस्ट ग्रेजुएट, कुल संपत्ति: 7.73 करोड़, पूर्व पार्षद सुभाष जाटव के भाई की पत्नी, परिवार का भाजपा से जुड़ाव, राजनीति में नया चेहरा। पिछले चुनाव में इस वार्ड से भाजपा के राजू जीते। वार्ड 11 में हारी हुई संजना घोड़ीवाल कांग्रेस से है। इस वार्ड से पिछले चुनाव में निर्दलीय अजहर जीते थे। वार्ड 12 में हारी हुई पूजा टांक कांग्रेस से है। रंजना सोनी (49 वर्ष) - शिक्षा: ग्रेजुएट, कुल संपत्ति: 59.81 लाख, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष व पूर्व में पार्षद रहे रमेश सोनी की पत्नी, राजनीति में नया चेहरा, पहली बार चुनाव लड़ेंगी। इस वार्ड से पिछले चुनाव में निर्दलीय शहजाद जीते थे। वार्ड 13 से हारे मोहम्मद आजाद निर्दलीय है। मो. रेहान खान (46वर्ष), शिक्षा: 12वीं, कुल संपत्ति: 5.90 लाख, परिवार का कांग्रेस से जुड़ाव, नया चेहरा, होटल व्यवसायी और पहली बार चुनाव मैदान में उतरे। पिछले चुनाव में मोहम्मद शाकीर निर्दलीय जीते थे। वार्ड 14 से हारे हुए प्रत्याशी मुख्तयार अहमद नवाब निर्दलीय है। पिछले चुनाव में इस वार्ड से भाजपा की हेमलता बंसल जीती थी। वार्ड 15 से हारे हुए सैयद मोहम्म्द मुजाहिद निर्दलीय है। आमाद चिश्ती (34 वर्ष) प्रोफाइल: शिक्षा: 10वींकुल संपत्ति: 2.35 लाख रुपए, पूर्व पार्षद, राजनीति में सक्रिय, होटल व्यवसायी। पिछले चुनाव में इस वार्ड से कांग्रेस के नुकूल खंडेलवाल जीते थे। वार्ड 16 से हारी हुई सुनीता शर्मा कांग्रेस से है। तरूणा गोयल (44 वर्ष) का प्रोफाइल - शिक्षा: एमकॉम, कुल संपत्तिः 1.13 करोड़, मंडल अध्यक्ष संदीप गोयल की पत्नी, हाउस वाइफ और पति का शेयर ब्रोकर का काम। पिछले चुनाव में इस वार्ड से भाजपा की भारती श्रीवास्तव जीती थी। वार्ड 17 में हारी हुई हितेश्वरी टांक कांग्रेस है। बालेश गोहिल (62 वर्ष) का प्रोफाइल - शिक्षा: 9वीं, कुल संपत्ति: 12.76 लाख, सैलून संचालक,भाजपा से लम्बे समय से जुड़ाव, पहली बार चुनाव लड़ेगे, नया चेहरा । पिछले चुनाव में इस वार्ड से भाजपा के विक्रम तंबोली जीते थे। वार्ड 18 से हारे हुए प्रत्याशी विक्रम तंबोली भाजपा से है। लक्ष्मी धोलखेडिया (52वर्ष) का प्रोफाइल - शिक्षा: 12वीं, कुल संपत्ति: 7.85 लाख, कांग्रेस में ब्लॉक अध्यक्ष, गृहिणी, पहली बार चुनाव लड़ रही, नया चेहरा। पिछले चुनाव में इस वार्ड से कांग्रेस की पिंकी जीती थी। वार्ड 19 से हारी हुई प्रत्याशी माया देवी कांग्रेस से है। चन्द्रशेखर बालोटिया (54 वर्ष) का प्रोफाइल - शिक्षा: 10वीं, कुल संपत्तिः 38.84 लाख, पूर्व पार्षद और वर्तमान में शहर महासचिव, सिविल कांन्ट्रेक्टर का काम। पिछले चुनाव में इस वार्ड से भाजपा से सीता टांक जीती थी। वार्ड 20 से हारे प्रत्याशी ऋषभ पटेल कांग्रेस से है। राजेश शर्मा (भाजपा) - 44 वर्ष- शिक्षा: 7वीं पास, कुल संपत्ति: 8.05 लाख रुपए, पतंग व्यवसायी हैं, पूर्व में चुनाव लड़ चुके हैं और भाजपा में सक्रिय हैं। पिछले चुनाव में इस वार्ड से हितेश्वरी टांक कांग्रेस से जीती थी। वार्ड 21 से हारे हुए प्रत्याशी भाजपा से हेमेन्द्र जैन है। सुनील मोतियानी (कांग्रेस) - 59 वर्ष- शिक्षा: 10वीं पास, कुल संपत्ति: 39.50 लाख रुपए, होटल व्यवसायी और केबल वर्क का काम करते हैं। पूर्व मनोनीत पार्षद रह चुके हैं और कांग्रेस में सक्रिय हैं। हाथ जोड़कर जनता से वोट मांग रहे हैं। पिछले चुनाव में इस वार्ड से भाजपा की किरण जीती थी। वार्ड 22 से हारे हुए प्रत्याशी चन्द्रप्रकाश बोहरा कांग्रेस से है। गोविंदराज 12वीं पास हैं और उनकी कुल संपत्ति 29.93 लाख रुपये है। गोविंदराज भाजपा में पूर्व महामंत्री रह चुके हैं, प्रोपर्टी व्यवसायी हैं और पिछली बार चुनाव हार गए थे। पिछले चुनाव में भाजपा के हेमेन्द्र जीते थे। वार्ड 23 से हारी हुई मंजू देवी भाजपा से है। नीलम सियोता पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 2.95 लाख रुपए है। नीलम पूर्व पार्षद की पत्नी हैं, परिवार का कांग्रेस से पुराना जुड़ाव है और नया चेहरा, पहली बार चुनाव मैदान में उतरी हैं। चुनाव में इस वार्ड से निर्दलीय नरेश जीते थे। वार्ड 24 से हारे हुए वासुदेव निर्दलीय है। रश्मि हिंगोरानी का प्रोफाइल -शिक्षा: 10वींकुल संपत्ति: 31.95 लाख रुपए, कांग्रेस से पूर्व में 2 बार पार्षद रही, कांग्रेस से लम्बे से जुड़ाव, राजनीति में अनुभवी व सक्रिय। पिछले चुनाव में भाजपा के लोकेश वर्मा जीते थे। हारी हुई प्रत्याशी अनिता राणा कांग्रेस से है। दुर्गा देवी 10वीं पास हैं और उनकी कुल संपत्ति 55.90 लाख रुपये है। दुर्गा देवी बिजनेस करती हैं, उनके पति भवानीसिंह वकील और भाजपा के मंडल अध्यक्ष हैं। परिवार का भाजपा से पुराना जुड़ाव है। पिछला चुनाव इस वार्ड से भाजपा के बलराम ने जीता था। वार्ड 25 में हारे हुए प्रत्याशी मोहित चौहान भाजपा से है। सुनील केन पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 4.97 लाख रुपये है। कांग्रेस में लंबे समय से सक्रिय सुनील केन पांच बार पार्षद रह चुके हैं और फ्लोर मिल का व्यवसाय करते हैं। पिछली बार वार्ड 26 से कांग्रेस से रश्मि हिंगोरानी जीती थी। वार्ड 27 से हारे हुए प्रत्याशी रूपेन्द्र परिहार कांग्रेस से है। पिछले चुनाव में निर्दलीय विनोद जीते थे। हारने वाले बलविंदरसिंह निर्दलीय उम्मीदवार है। पिछले चुनाव में गीता जांगिड़ जीती थी। हारने वाले धीरज गुर्जर कांग्रेस से है। हेमलता खत्री (भाजपा) - 56 वर्ष* - शिक्षा: पोस्ट ग्रेजुएट, कुल संपत्ति: 80.27 लाख रुपए, पिछली बार निर्विरोध निर्वाचित हुई थीं। भाजपा के वरिष्ठ नेता मोहन लालवानी की पत्नी हैं। पिछला चुनाव भी भाजपा से हेमलता खत्री ने ही जीता था। हारने वाली रीतू रावत भाजपा की प्रत्याशी है। मोसिना 10वीं पास है। कुल संपत्ति 3.85 लाख रुपए बताई है। पूर्व पार्षद की पत्नी हैं, कांग्रेस परिवार से जुड़ाव है, गृहिणी हैं और पहली बार चुनाव मैदान में उतरी हैं। पिछला चुनाव कांग्रेस से मोहम्मद वसीम जीते थे। कांग्रेस के ललित गुर्जर को यहां से हराया अंकित गुर्जर 12वीं पास हैं और उनकी कुल संपत्ति 39.35 लाख रुपये है। अंकित गुर्जर ओबीसी मोर्चा के जिला अध्यक्ष हैं, अजमेर दक्षिण से विधायक अनीता भदेल के करीबी हैं और भाजपा में लंबे समय से सक्रिय हैं। बीजेपी की सुशीला देवी को यहां से हराया वार्ड 32 से 32 वर्षीय खुशनुमा पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 20 लाख रुपये है। उनके पति पूर्व पार्षद हैं, खुद गृहिणी हैं, परिवार कांग्रेस में सक्रिय है और नया चेहरा हैं। बीजेपी के हेमंत गौड़ को यहां से हराया इकरामुद्दीन 9वीं पास हैं और उनकी कुल संपत्ति 71.45 लाख रुपये है। इकरामुद्दीन केबल नेटवर्क का काम करते हैं, कांग्रेस से लंबे समय से जुड़ाव है, नया चेहरा हैं और पहली बार चुनाव मैदान में उतरे हैं। कांग्रेस के चेतन सैनी को यहां से हराया वार्ड 34 (UR) से 60 वर्षीय मंजू शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 9.44 लाख रुपये है। मंजू शर्मा भाजपा में लंबे समय से सक्रिय हैं, कई पदों पर रह चुकी हैं और पहली बार टिकट मिला है। भाजपा के दीदार चौहान को हराया। निर्दलीय घीसू लाल गढ़वाल को यहां से हराया वार्ड 36 से 28 वर्षीय निहाल सिंह एलएलबी तक शिक्षित हैं और उनकी कुल संपत्ति 19.55 लाख रुपये है। निहाल सिंह पेशे से वकील हैं, कांग्रेस में सक्रिय हैं लेकिन नया चेहरा हैं और पहली बार चुनाव मैदान में उतरे हैं। भाजपा के रणविजयसिंह को हराया बीजेपी के गिरीश को यहां से हराया ईश्वर टहल्यानी बीटेक तक शिक्षित हैं और उनकी कुल संपत्ति 27.93 लाख रुपए है। टहल्यानी पूर्व पार्षद प्रत्याशी रह चुके हैं, राजनीति में अनुभवी हैं और कांग्रेस से जुड़ाव रखते हैं। भाजपा की युक्तिका का डोई को हराया सीमा 10वीं पास हैं और उनकी कुल संपत्ति 26 लाख रुपए है। परिवार का कांग्रेस से जुड़ाव है, उनके पति पूर्व पार्षद रह चुके हैं, सीमा नया चेहरा हैं और गृहिणी हैं। निर्दलीय रूप किशोर शर्मा को हराया। ज्योति मिश्रा एलएलबी तक शिक्षित हैं और उनकी कुल संपत्ति 96.13 लाख रुपये है। ज्योति मिश्रा गृहिणी हैं, परिवार का भाजपा से जुड़ाव है और वे नया चेहरा हैं, पहली बार चुनाव मैदान में उतरी हैं। निर्दलीय नीतू मिश्रा को हराया सुनील सिंह ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 9.91 लाख रुपये है। सुनील सिंह अकाउंट्स का काम करते हैं, भाजपा से जुड़े हैं और नया चेहरा हैं, पहली बार टिकट मिला है। कांग्रेस के श्याम सुंदर को यहां से हराया संदीप माखिजानी 10वीं पास हैं और उनकी कुल संपत्ति 27.70 लाख रुपये है। संदीप माखिजानी रेस्टोरेंट मालिक हैं, भाजपा में मंडल महामंत्री हैं, पार्टी में सक्रिय हैं और उन्हें राजनीति का अनुभव है। निर्दलीय निर्मला जाटव को यहां से हराया काजल यादव ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 32.30 लाख रुपये है। काजल यादव पूर्व पार्षद हैं और यूथ कांग्रेस राजनीति और कांग्रेस में लंबे समय से सक्रिय हैं। बीजेपी की ज्योति पालीवाल को यहां से हराया पुष्पा राजोरिया ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 1.27 लाख रुपये है। पुष्पा राजोरिया महिला सेवादल जिला अध्यक्ष हैं और कांग्रेस में लंबे समय से सक्रिय हैं। भाजपा के राकेश कुमार को हराया। ऋषि बंशीवाल (36 वर्ष) - शिक्षा: 12वींकुल संपत्ति: 4.92 करोड़ रुपये, निर्माण कार्य का ठेकेदार, पहली बार टिकट, कांग्रेस में सक्रिय, नया चेहरा। कांग्रेस के मोक्ष नोनिया को हराया हेमंत सांखला 12वीं पास हैं और उनकी कुल संपत्ति 10.23 लाख रुपये है। हेमंत सांखला सिविल कॉन्ट्रेक्टर हैं, भाजपा में लंबे समय से सक्रिय हैं और जिला मंत्री व पूर्व पार्षद रह चुके हैं। बीजेपी की कुसुम लता को यहां से हराया शशि गढ़वाल पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 6.5 लाख रुपये है। शशि गढ़वाल स्कूल संचालक हैं, कांग्रेस में सक्रिय हैं, पहली बार टिकट मिला है और नया चेहरा हैं। बीजेपी के अजय को यहां से हराया निर्मल बेरवाल ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 48.97 लाख रुपये है। निर्मल बेरवाल ट्रेवल्स एजेंसी का काम करते हैं, पूर्व पार्षद पति हैं, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष रह चुके हैं और कांग्रेस में सक्रिय हैं। भाजपा के मोहनसिंह को हराया। बीजेपी के दुर्गेश डबरा को हराया वार्ड 50 (SC) से 53 वर्षीय चंदनसिंह एलएलबी तक शिक्षित हैं और उनकी कुल संपत्ति 4 लाख रुपये है। चंदनसिंह पेशे से वकील हैं, कांग्रेस में ब्लॉक अध्यक्ष हैं और पूर्व में पार्षद भी रह चुके हैं। बीजेपी के रेवती प्रसाद को हराया चंद्रकांत पालीवाल पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 9.58 लाख रुपये है। चंद्रकांत पालीवाल शहर कांग्रेस में सेक्रेटरी के पद पर हैं, पशुपालक का काम करने के साथ ही दूध का भी व्यापार करते हैं। भाजपा के सुंदरसिंह टांक को हराया सतीश बैरवा, उम्र: 39 वर्ष, शिक्षा: 10वीं पास, ​कुल संपत्ति: 41.58 लाख, कांग्रेस में करीब 5 साल से सक्रिय हैं। वर्तमान में दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में ब्लॉक महासचिव के पद पर हैं। परिवार भी कांग्रेस से जुड़ा हुआ है। पेशे से ठेकेदार हैं। भाजपा के भोपाल कांत को हराया। बीजेपी की अनु धानका हारी प्रीति माहुर 10वीं पास हैं और उनकी कुल संपत्ति 6.40 लाख रुपये है। प्रीति माहुर की राजनीति में नई शुरुआत हुई है। पति सुनील धानका कांग्रेस से पूर्व पार्षद रहे हैं और वार्ड उपाध्यक्ष के पद पर भी सेवा दे चुके हैं। बीजेपी के गौरव जैन को यहां से हराया विनोद आसनानी 10वीं पास हैं और उनकी कुल संपत्ति 1.62 करोड़ रुपये है। कांग्रेस में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं, संगठन में ब्लॉक महासचिव रह चुके हैं और प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े हुए हैं। भाजपा के रजनीश चौहान को हराया। बीजेपी की नीतू सिंह को यहां से हराया किरण गढ़वाल ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 11.59 करोड़ रुपये है। पति दिलीप गढ़वाल कांग्रेस में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं, किरण गढ़वाल स्वयं गृहिणी हैं, पति का मैरिज गार्डन है। बीजेपी की संतोष मौर्य को यहां से हराया मनीष सेठी पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 1.52 लाख रुपये है। मनीष सेठी कांग्रेस में लंबे समय से सक्रिय हैं, पूर्व में पार्षद के रूप में भी सेवा दे चुके हैं, वर्तमान में जनरल स्टोर का संचालन करते हैं। भाजपा की मधु शेखावत को हराया। बबीता, उम्र: 51 वर्ष, शिक्षा: पोस्ट ग्रेजुएट, ​कुल संपत्ति: 6.85 लाख, वर्तमान में राजनीति में सक्रिय हुई हैं। पति पूर्व में पार्षद रह चुके हैं और कांग्रेस में भी सक्रिय हैं। बीजेपी की ज्योति को यहां से हराया भावना चौहान 12वीं पास हैं और उनकी कुल संपत्ति 5 लाख रुपए है। भावना चौहान पूर्व में पार्षद का चुनाव लड़ चुकी हैं, उनके पति लंबे समय से कांग्रेस में सक्रिय हैं और संगठन में विभिन्न पदों पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। बीजेपी की राकेशी मीणा को हराया मीनाक्षी मीणा 10वीं तक शिक्षित हैं और उनकी कुल संपत्ति 1.65 लाख रुपये है। मीनाक्षी मीणा पूर्व में 4 वोट से पार्षद का चुनाव हारी थीं, कांग्रेस में सक्रिय हैं, पति पुलिस में एएसआई हैं। बीजेपी की संतोष को हराया पुष्पा जेदिया 8वीं तक शिक्षित हैं और उनकी कुल संपत्ति 4.80 लाख रुपये है। पुष्पा जेदिया के परिवार का कांग्रेस से जुड़ाव है और वे नया चेहरा हैं। कांग्रेस के मोसिन खान को हार मिली। उदयवीरसिंह ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 73.17 लाख रुपए है। उदयवीरसिंह भाजपा में सक्रिय हैं और पहली बार टिकट लेकर चुनाव मैदान में उतरे हैं। बीजेपी की ममता सैनी को हराया। आशा तुनवाल मिडिल क्लास तक शिक्षित हैं और उनकी कुल संपत्ति 14 लाख रुपएये है। आशा तुनवाल दो बार पार्षद रह चुकी हैं, कांग्रेस संगठन में सक्रिय हैं और पूर्व पार्षद निकी तुनवाल की मां हैं। बीजेपी के रचित कच्छावा को यहां से हराया नौरत गुर्जर एमएससी, बीटेक तक शिक्षित हैं और उनकी कुल संपत्ति 6.91 लाख रुपये है। नौरत गुर्जर कांग्रेस में सक्रिय हैं, विभिन्न पदों पर रह चुके हैं और दो बार पार्षद का चुनाव जीत चुके हैं। भाजपा के अजय सिंह नरूका को हार मिली गणेश चौहान 10वीं पास हैं और उनकी कुल संपत्ति 41.35 लाख रुपए है। गणेश चौहान पूर्व पार्षद रह चुके हैं, कांग्रेस में मंडल अध्यक्ष हैं और टेंट व्यवसायी हैं। कांग्रेस के गोविंद को यहां से हराया वार्ड 67 से 49 वर्षीय नलीनी शर्मा एमकॉम तक शिक्षित हैं और उनकी कुल संपत्ति 70.25 लाख रुपये है। नलीनी शर्मा पूर्व पार्षद हैं, भाजपा में सक्रिय हैं, भाजपा नेता राजेश शर्मा की पत्नी हैं और गृहिणी हैं। निर्दलीय हरेंद्र सिंह को यहां से हराया अनिश मोयल एम.कॉम तक शिक्षित हैं और उनकी कुल संपत्ति 2.79 करोड़ रुपये है। अनिश मोयल पूर्व पार्षद हैं और भाजपा में सक्रिय हैं, राजनीति में अनुभवी हैं और कपड़ा व्यवसायी हैं साथ ही पेट्रोल पंप संचालक भी हैं। बीजेपी की निहारिका त्रिपाठी को यहां से हराया रश्मि शर्मा 12वीं तक शिक्षित हैं और उनकी कुल संपत्ति 5.31 लाख रुपए है। रश्मि शर्मा पूर्व पार्षद रह चुकी हैं, कांग्रेस में सक्रिय हैं और राजनीति में अनुभवी हैं। कांग्रेस की गीता गुर्जर को यहां से हराया उमा पंडित पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 20.30 लाख रुपए है। उमा पंडित भाजपा के जिला उपाध्यक्ष योगेश शर्मा के भाई की पत्नी हैं और नया चेहरा के तौर पर पहली बार चुनाव मैदान में उतरी हैं। कांग्रेस के रजनी कश्यप को हराया रितू रानी एमसीए तक शिक्षित हैं और उनकी कुल संपत्ति 16.27 लाख रुपये है। रितू रानी भाजपा नेता गजेन्द्र शर्मा की पत्नी हैं और नया चेहरा हैं। कांग्रेस के रिचा जोशी को हराया अनु श्री पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 6.50 लाख रुपये है। अनु श्री के परिवार का भाजपा से जुड़ाव है और वे नया चेहरा हैं। पिछला चुनाव कांग्रेस के गजेन्द्रसिंह ने जीता। निर्दलीय विकास गुर्जर को हराया गंगाराम सैनी 8वीं पास हैं और उनकी कुल संपत्ति 25.09 लाख रुपये है। गंगाराम सैनी टेलरिंग का काम करते हैं। पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं, नया चेहरा हैं और भाजपा में सक्रिय हैं। पिछला चुनाव भाजपा की प्रियंका ने जीता। भाजपा की सोनिया जैन को हराया। पिछला चुनाव भाजपा के रूबी जैन ने ही जीता। निर्दलीय धर्मेंद्र सिंह को यहां से हराया रमेश चेलानी ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 3.24 करोड़ रुपये है। रमेश चेलानी पूर्व पार्षद व व्यवसायी हैं और भाजपा में सक्रिय हैं। पिछला चुनाव भाजपा के रमेश सोनी ने जीता। निर्दलीय मुकेश सिंह राठौड़ को हराया। सतीष बंसल 10वीं तक शिक्षित हैं और उनकी कुल संपत्ति 4.22 करोड़ रुपये है। सतीष बंसल भाजपा के जिला उपाध्यक्ष हैं, पार्टी में सक्रिय हैं और पहली बार टिकट मिला है। पिछला चुनाव भाजपा के अतीश माथुर ने जीता। कांग्रेस के दौलत खेमानी को यहां से हराया विकास लालवानी पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 57.34 लाख रुपए है। विकास लालवानी भाजपा नेता स्व. दीपेन्द्र लालवानी के भाई हैं, नया चेहरा हैं लेकिन परिवार का भाजपा से पुराना जुड़ाव रहा है। पिछला चुनाव भाजपा के दीपेन्द्र ने जीता। भाजपा की भारती श्रीवास्तव को हराया हामीद खान -शिक्षा: 12वीं] कुल संपत्ति: 16.72 लाख रुपए, दूध व्यवसाय का कारोबार, पूर्व में पार्षद रह चुके। लम्बे समय से कांग्रेस में सक्रिय। पिछला चुनाव कांग्रेस के हामीद खान ने जीता। कांग्रेस के जितेंद्र शर्मा को हराया कुमार लालवानी दसवीं पास हैं और उनकी कुल संपत्ति 1.15 करोड़ रुपये है। कुमार लालवानी पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं, नया चेहरा हैं, भाजपा से जुड़ाव है और पेशे से होटल व्यवसायी हैं। पिछला चुनाव भाजपा के वीरेन्द्र वालिया ने जीता। कांग्रेस की नजमा बानो को हार मिली है। काश्यपी सांखला बीटेक हैं और उनकी कुल संपत्ति 15.92 लाख रुपए है। काश्यपी सांखला पूर्व पार्षद चन्द्रेश सांखला की पुत्री हैं, पहली बार चुनाव लड़ रही हैं और वर्तमान में बीटेक कर रही हैं। इस वार्ड से पिछला चुनाव भाजपा के धर्मेन्द्र सिंह ने जीता। ……… पढें ये खबर भी… अजमेर में 36 साल बाद BJP को झटका:80 में से 37 वार्ड में कांग्रेस, 32 पर भाजपा; 11 निर्दलीय बनेंगे 'किंगमेकर' अजमेर नगर निगम के चुनाव के नतीजों में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया है। 80 में से 37 वार्ड में कांग्रेस, 32 में भाजपा के प्रत्याशी जीते। जबकि निर्दलीय 11 सीटों पर जीते हैं। दोनों दलों को बहुमतनहीं मिला है। ऐसे में निर्दलीय किंगमेकर बनेंगे। रिजल्ट से भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। बीते 36 साल से यहां भाजपा का बोर्ड रहा है। अजमेर शहर से स्पीकर वासुदेव देवनानी और अनिता भदेल की प्रतिष्ठा दांव पर थी। इसके बावजूद इस बार कांग्रेस से पार्टी पिछड़ गई। पूरी खबर पढें अजमेर- कांग्रेस से रश्मि शर्मा-रश्मि हिंगोरानी मेयर पद की दावेदार:बीजेपी अनामिका और रंजना पर खेल सकती है दांव; अनारक्षित महिला के लिए रिजर्व है सीट अजमेर नगर निगम का 36 साल से भाजपा का बोर्ड बनाने का रिकॉर्ड इस बार टूट सकता है। नगर निगम चुनाव के रिजल्ट में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला और तय हो गया है कि निर्दलियों के भरोसे मेयर की कुर्सी मिलेगी। (पूरी खबर पढें) अजमेर-मंत्री और विधायक के वार्ड में हारे पार्टी के प्रत्याशी:भाजपा-कांग्रेस जिलाध्यक्षों के वार्डों में जीती सीटें; जानिए-बडे़ नेताओं के वार्ड में कौन हारा-कौन जीता अजमेर नगर निगम चुनाव में बडे़ नेताओं के वार्ड में रोचक परिणाम देखने को मिले हैं। अजमेर उत्तर से विधायक वासुदेव देवनानी के वार्ड में बीजेपी प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। वहीं, अजमेर दक्षिण विधायक अनिता भदेल अपने ही वार्ड में भाजपा प्रत्याशी को जीता नहीं सकीं। पूरी खबर पढ़िए…

अजमेर- कांग्रेस से रश्मि शर्मा-रश्मि हिंगोरानी मेयर पद की दावेदार:बीजेपी अनामिका और रंजना पर खेल सकती है दांव; अनारक्षित महिला के लिए रिजर्व है सीट

अजमेर नगर निगम का 36 साल से भाजपा का बोर्ड बनाने का रिकॉर्ड इस बार टूट सकता है। नगर निगम चुनाव के रिजल्ट में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला और तय हो गया है कि निर्दलियों के भरोसे मेयर की कुर्सी मिलेगी। कांग्रेस के सबसे ज्यादा 37 पार्षद जीते हैं, जबकि भाजपा के केवल 32 ही पार्षद जीत कर आए हैं। वहीं 11 निर्दलीय है। मेयर बनाने के लिए 80 में से 41 पार्षदों की जरूरत पडे़गी। ऐसे में निर्दलीय किंग मेकर बनेंगे। कांग्रेस में जीत कर आई वार्ड 69 से रश्मि शर्मा व वार्ड 24 से रश्मि हिंगारोनी प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं, वहीं भाजपा वार्ड 3 से अनामिका शर्मा व वार्ड 12 से रंजना सोनी पर दांव खेल सकती है। अजमेर में मेयर का पद अनारक्षित महिला के लिए रिजर्व है। इनके अलावा भाजपा नलिनी शर्मा, मोनिका जैन के नाम पर भी पार्षदों से चर्चा कर सकती है। वहीं कांग्रेस किरण गढ़वाल, बबीता सैन पर भी पार्षदों से चर्चा कर सकती है।बता दें कि पिछले 36 साल से नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनता रहा है। पहली बार है कि कांग्रेस के पार्षद ज्यादा जीते। दोनों पार्टियों का दावा- बनाएंगे बोर्ड कांग्रेस के शहर जिलाध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने कहा कि जनता ने कांग्रेस पर विश्वास जताया है और भाजपा के कुशासन को जवाब दिया है। जीते हुए सभी निर्दलीय को विश्वास है कि कांग्रेस बोर्ड बनाएंगी। इसके लिए सभी 11 ने कांग्रेस को समर्थन दे दिया है। कांग्रेस ही बोर्ड बनाएगी। वहीं, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष रमेश सोनी ने कहा कि 11 निर्दलीय जीते हैं और चार हमारे कैंम्प में आ चुके हैं, 2 आ रहे हैं, 3 से बात चल रही है। भाजपा ही बोर्ड बनाएगी। शहर के विकास के लिए सरकार में कड़ी से कड़ी जोड़ने के लिए निर्दलीय पूरा सहयोग कर रहे हैं। रश्मि शर्मा - पार्षद वार्ड 69 प्लस पॉइंट- निवर्तमान पार्षद हैं और पति दीनदयाल शर्मा भी पूर्व में पार्षद रह चुके हैं। राजनीति का दोनों को अनुभव है। पति प्रोपर्टी व्यवसायी हैं और वे खुद गृहिणी हैं। माइनस पॉइंट- कांग्रेस के पास बहुमत नहीं है और ऐसे में निर्दलियों को मैनेज करना मुश्किल होगा। रश्मि हिंगोरानी- पार्षद वार्ड 24 प्लस पॉइंट- तीन बार पार्षद रह चुकी हैं और राजनीति का अनुभव है। साथ ही कांग्रेस में उच्च स्तर पर अच्छी पकड़ है। माइनस पॉइंट- कांग्रेस के पास बहुमत नहीं और निर्दलियों सहित कांग्रेसियों को एकजुट रखना मुश्किल होगा। अनामिका शर्मा - पार्षद, वार्ड 3 प्लस पॉइंट- सामान्य वर्ग से हैं। पति मनीष शर्मा अजमेर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष, ससुर सीताराम शर्मा की विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी से घनिष्ठता। माइनस पॉइंट- पहली बार टिकट मिला, नया चेहरा, राजनीतिक अनुभव नहीं, भाजपा के पास बहुमत नहीं और निर्दलियों को मैनेज करना मुश्किल। रंजना सोनी- पार्षद, वार्ड 12 प्लस पॉइंट- भाजपा शहर जिला अध्यक्ष व निवर्तमान पार्षद रमेश सोनी की पत्नी हैं, अजमेर उत्तर विधायक व विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी के खास, रमेश सोनी को टिकट देने के बजाय उनकी पत्नी को दिया। माइनस पॉइंट- पहली बार टिकट मिला, नया चेहरा, राजनीति में कोई अनुभव नहीं, नगर निगम की मेयर सीट अनारक्षित महिला के लिए रिजर्व है, लेकिन खुद ओबीसी से। भाजपा के पास बहुमत नहीं और निर्दलियों को मैनेज करना मुश्किल। ……… ये खबर भी पढ़िए… अजमेर में 36 साल बाद BJP को झटका:80 में से 37 वार्ड में कांग्रेस, 32 पर भाजपा; 11 निर्दलीय बनेंगे 'किंगमेकर' अजमेर नगर निगम के चुनाव के नतीजों में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया है। 80 में से 37 वार्ड में कांग्रेस, 32 में भाजपा के प्रत्याशी जीते। जबकि निर्दलीय 11 सीटों पर जीते हैं। दोनों दलों को बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में निर्दलीय किंगमेकर बनेंगे। रिजल्ट से भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। बीते 36 साल से यहां भाजपा का बोर्ड रहा है। अजमेर शहर से स्पीकर वासुदेव देवनानी और अनिता भदेल की प्रतिष्ठा दांव पर थी। इसके बावजूद इस बार कांग्रेस से पार्टी पिछड़ गई। पूरी खबर पढ़िए… अजमेर-मंत्री और विधायक के वार्ड में हारे पार्टी के प्रत्याशी:भाजपा-कांग्रेस जिलाध्यक्षों के वार्डों में जीती सीटें; जानिए-बडे़ नेताओं के वार्ड में कौन हारा-कौन जीता अजमेर नगर निगम चुनाव में बडे़ नेताओं के वार्ड में रोचक परिणाम देखने को मिले हैं। अजमेर उत्तर से विधायक वासुदेव देवनानी के वार्ड में बीजेपी प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। वहीं, अजमेर दक्षिण विधायक अनिता भदेल अपने ही वार्ड में भाजपा प्रत्याशी को जीता नहीं सकीं। पूरी खबर पढ़िए…

पूर्व सीएम गहलोत और केंद्रीय मंत्री शेखावत अपने वार्ड हारे:पायलट के क्षेत्र में जीती कांग्रेस; राजस्थान निकाय चुनाव में पहली बार ‘आप’ का बोर्ड

राजस्थान के 309 निकाय के चुनावों में कई नतीजे चौंकाने वाले रहे। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ में कांग्रेस ने जीत हासिल की। वहीं पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र टोंक में भी बीजेपी को हार मिली है। इधर, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और पूर्व सीएम अशोक गहलोत अपना-अपना वार्ड भी नहीं बचा पाए। आप पार्टी पहली बार किसी नगर परिषद में स्पष्ट बहुमत के साथ चेयरमैन बनाने की स्थिति में आ गई है। बारां में आप बीजेपी और कांग्रेस पर भारी पड़ गई। जयपुर में बीजेपी अपना मेयर बनाने के करीब पहुंच गई है। वहीं, सीएम भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में निर्दलीय के सहारे ही बीजेपी मेयर बना सकेगी। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के पाली में बीजेपी को हार और कांग्रेस को जीत मिली है। अजमेर में 36 साल बाद कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी 10 निगमों में से 1 बीकानेर में 80 में से 42 वार्ड जीत कर कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिल गया है। केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल बीजेपी को जीत नहीं दिला पाए। वहीं अजमेर में 80 वार्ड में कांग्रेस 37, बीजेपी 32 और पाली में 65 वार्ड में से कांग्रेस 29 और बीजेपी 21 वार्ड पर जीतीं। कांग्रेस यहां बड़ी पार्टी बनकर उभरी। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और केंद्रीय राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी के गढ़ अजमेर निगम में 36 साल बाद कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। सीएम के गृह जिले भरतपुर निगम में भाजपा को बहुमत नहीं सीएम भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर नगर निगम में भाजपा को बहुमत नहीं मिल पाया। 65 वार्डों में से निर्दलीयों ने 36 वार्डों में जीत दर्ज की है। भाजपा 20 सीटों के साथ दूसरे और कांग्रेस 7 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रही। वहीं बसपा और RLP को एक-एक सीट मिली है। भरतपुर में निर्दलीय किंगमेकर बनेंगे। जोधपुर में निर्दलीय होंगे किंगमेकर इसी तरह बीजेपी का गढ़ माने जाने वाले केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के क्षेत्र जोधपुर में कांग्रेस ने जबरदस्त टक्कर दी है। दोनों पार्टियों ने 44-44 वार्ड जीते हैं। अब नजरें 11 सीट पर जीत चुके निर्दलीयों पर जा टिकी हैं। वहीं एक वार्ड पर नतीजा आना बाकी है। यहां केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के वार्ड 56 में भाजपा और तीन बार सीएम रहे अशोक गहलोत के वार्ड 88 में कांग्रेस हार गई। उदयपुर, अलवर, कोटा में बीजेपी मजबूत उदयपुर निगम में 80 में से 53 और भीलवाड़ा में 70 में से 45 वार्ड जीतकर बीजेपी बोर्ड बनाने की स्थिति में आ गई है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के क्षेत्र अलवर और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के क्षेत्र कोटा में भी बीजेपी बहुमत के नजदीक है और निर्दलीयों से सहारे बोर्ड बना सकती है। वसुंधरा में गढ़ में भाजपा को सिर्फ 13 सीटें नगर परिषद की बात करें तो पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ में 45 में से बीजेपी मात्र 13 वार्डों पर सिमट गई और कांग्रेस ने 39 वार्ड जीत लिए। सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र टोंक नगर परिषद में कांग्रेस ने 60 में से 32 वार्ड जीत लिए है। बीजेपी 19 और बाकी वार्ड निर्दलीयों ने जीते। नगर परिषद बारां नगर परिषद में आप पार्टी ने 60 में से 31 वार्डों में जीत हासिल की और बीजेपी 9 और कांग्रेस 17 पर सिमट गए। आप पहली बार राजस्थान में अपना चेयरमैन बनाएगी। 2 केंद्रीय सहित 4 मंत्री और कांग्रेस के बड़े नेता नहीं बचा सके अपना वार्ड केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी दोनों अपने ही वार्ड में अपनी पार्टी को जीत नहीं दिला पाए। इसी तरह राजस्थान के केबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़, मदन दिलावर और जोराराम कुमावत, अलवर में नाराज होकर धरने पर बैठे संजय शर्मा ने भी जिस वार्ड से वोट डाला वहां पार्टी हार गई। कांग्रेस की बात करें तो नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व सीएम अशोक गहलोत, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट सहित कांग्रेस के 4 बड़े नेता भी अपना-अपना वार्ड नहीं बचा पाए। ……….. ये खबरें भी पढ़ें… 1. रिजल्ट में ‘काकाजी’ की एंट्री का असर:जनता ने भाजपा-कांग्रेस को डराकर जिताया; 140+ निकायों में निर्दलीय खोलेंगे सत्ता का ताला राजस्थान के निकाय चुनाव के नतीजों का एक वाक्य में विश्लेषण करें तो भाजपा जीती है, लेकिन कांग्रेस भी बुरी तरह से नहीं हारी है। निकाय चुनाव में ‘काकाजी’ की एंट्री का असर भी दिख रहा है। वैसे चुनाव संख्या के हिसाब से भाजपा 309 निकायों में से 163 में जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर आगे है। कांग्रेस 103 पर है, लेकिन ये आंकड़े अधूरी सच्चाई हैं। (पूरी खबर पढ़ें) 2. राजस्थान- 10 में से 4 नगर निगमों में निर्दलीय किंगमेकर:पाली-अजमेर के रिजल्ट ने चौंकाया; बीकानेर में कांग्रेस, भीलवाड़ा-उदयपुर में भाजपा बनाएगी मेयर 3. भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों को 1-1 वोट मिला:सीकर में कांग्रेस-निर्दलीय समर्थक भिड़े, पत्थर फेंके; वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ में कांग्रेस जीती 4. जयपुर में सुनील-पुनीत-विमल मेयर की रेस में:उदयपुर में कटारिया के रिश्तेदार, कोटा में स्पीकर की पसंद पर लग सकती है मुहर, जानिए निगमों में मेयर के प्रमुख दावेदार 5. भाजपा–कांग्रेस से टिकट लाए, परिवार के वोट भी नहीं मिले:कांग्रेस में पिता–पुत्र और पति–पत्नी की जोड़ी दहाई भी नहीं छू पाई, भाजपा प्रत्याशी को मिला महज एक वोट 6. BJP-कांग्रेस के वोट शेयर में 1% से कम अंतर:आरएलपी-आप सहित 5 पार्टियों को नोटा से कम वोट, भाजपा ने कांग्रेस से 566 वार्ड ज्यादा जीते 7. जयपुर, जोधपुर, कोटा में मेयर-डिप्टी मेयर के चुनाव स्थगित:राज्य निर्वाचन आयोग नए सिरे से जारी करेगा कार्यक्रम, EVM खराबी से रिजल्ट अटका

कैबिनेट मंत्री रावत-विधायक भदेल खुद के वार्ड में हारे:भाजपा-कांग्रेस जिलाध्यक्षों ने जीती सीट; जानिए-बडे़ नेताओं के वार्ड में कौन हारा-कौन जीता

अजमेर नगर निगम चुनाव में बडे़ नेताओं के वार्ड में भी रोचक परिणाम देखने को मिले हैं। अजमेर उत्तर से विधायक वासुदेव देवनानी ने जहां अपने वार्ड में जीत दर्ज की, वहीं अजमेर दक्षिण विधायक अनिता भदेल अपने ही वार्ड में भाजपा प्रत्याशी को जीता नहीं सकीं। पुष्कर विधायक व केबिनेट मंत्री सुरेश रावत के विधानसभा क्षेत्र के दो वार्ड 61 और 54 भी अजमेर नगर निगम क्षेत्र में है और इन दोनों वार्ड में भाजपा के प्रत्याशी चुनाव हार गए और कांग्रेस ने जीत दर्ज की। वहीं भाजपा व कांग्रेस के दोनों जिलाध्यक्ष रमेश सोनी व राजकुमार जयपाल के अपने अपने वार्ड में पार्टी प्रत्याशी की जीत हुई है। अजमेर दक्षिण से कांग्रेस प्रत्याशी द्रोपदी कोली व पीसीसी सदस्य हेमंत भाटी के वार्ड में भी कांग्रेस जीती। कांग्रेस से अजमेर उत्तर में विधानसभा प्रत्याशी रहे महेन्द्रसिंह रलावता व पूर्व में कांग्रेस के शहर जिलाध्यक्ष रहे विजय जैन के वार्ड में कांग्रेस की हार हुई है। जानिए-किस नेता के वार्ड में कौन जीता… वासुदेव देवनानी- वार्ड 4 में भाजपा जीती विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का निवास वार्ड संख्या 4 में हैं। यहां तीन प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। यहां कांग्रेस ने प्रत्याशी नहीं उतारा और निर्दलीय हेमा गहलोत का समर्थन किया। भाजपा की मोनिका जैन जीती। यहां कुल 5004 मतदाता हैं, इनमें से 3180 ने मतदान किया। मतदान प्रतिशत 63.55 प्रतिशत रहा। अनिता भदेल - वार्ड 45 में कांग्रेस जीती अजमेर दक्षिण विधायक अनिता भदेल का मकान संख्या 45 में है। यहां चार प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे। भाजपा प्रत्याशी राकेश कुमार चुनाव हारे और कांग्रेस के ऋषि बंसीवाल जीते। यहां कुल 5177 मतदाता हैं, इनमें से 68.84% यानि 3564 ने मतदान किया। सुरेश रावत - वार्ड 61 व 54 में कांग्रेस जीती अजमेर नगर निगम क्षेत्र में वार्ड संख्या 54 व 61 का क्षेत्र पुष्कर विधानसभा क्षेत्र में आता है। इन दोनों वार्ड से कांग्रेस जीती है। वार्ड संख्या 54 में कांग्रेस प्रत्याशी प्रीती माहूर जीती है, उन्होंने भाजपा प्रत्याशी अनू को हराया। वार्ड संख्या 61 में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी मीणा ने भाजपा प्रत्याशी राकेशी मीणा को हराया। रमेश सोनी - वार्ड 12 - भाजपा जीती भारतीय जनता पार्टी के शहर अध्यक्ष रमेश सोनी की पत्नी रंजना सोनी वार्ड संख्या 12 में भाजपा प्रत्याशी थी। उन्होने कांग्रेस प्रत्याशी पूजा टांक को हराया। यहां कुल 2672 मतदाता हैं। इनमें से 1580 ने मतदान किया। मतदान 59.13 प्रतिशत रहा। राजकुमार जयपाल - वार्ड 65 में कांग्रेस जीती कांग्रेस के शहर जिलाध्यक्ष राजकुमार जयपाल का मकान वार्ड 65 में है। यहां 63.02 मतदान हुआ। वार्ड में 4527 कुल मतदाता हैं। इसमें से 2853 मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। यहां भाजपा व कांग्रेस में सीधा मुकाबला था। इसमें कांग्रेस के नौरत गुर्जर ने भाजपा के रचित कच्छावा को हराया। महेन्द्र सिंह रलावता - वार्ड 70 में भाजपा जीती अजमेर उत्तर में कांग्रेस से विधायक प्रत्याशी रहे महेन्द्रसिंह रलावता का मकान वार्ड 70 में है। मतदान 53.66 प्रतिशत हुआ। यहां 5030 मतदाता हैं। इसमें से 2699 मत पडे। यहां पांच प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। इसमें भाजपा की उमापंडित जीती व कांग्रेस की गीता गुर्जर चुनाव हार गई। द्रोपदी कोली - वार्ड 44 में कांग्रेस जीती अजमेर दक्षिण में कांग्रेस से विधानसभा प्रत्याशी व नगर निगम में प्रतिपक्ष नेता रही द्रोपदी कोली का मकान वार्ड 44 में है। यहां 67.36 प्रतिशत मतदान हुआ। वार्ड में कुल 3652 मतदाता हैं। इसमें से 2460 ने मतदान किया। यहां तीन प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे। भाजपा की ज्योति पालीवाल चुनाव हार गई और कांग्रेस की पुष्पा राजोरिया जीती। विजय जैन - वार्ड 42 में भाजपा जीती कांग्रेस के पूर्व शहर जिलाध्यक्ष रहे विजय जैन का मकान वार्ड 42 में है। यहां 66.62 प्रतिशत मतदान हुआ। यहां 3176 मतदाता है। इनमें से 2116 ने मतदान किया। यहां चार प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे। इनमें संदीप माखीजानी भाजपा से जीते, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव हार गए। हेमंत भाटी - वार्ड 48 में कांग्रेस जीती कांग्रेस नेता व पीसीसी सदस्य हेमंत भाटी का मकान वार्ड 48 में है। यहां 74.09 प्रतिशत मतदान हुआ। वार्ड में 5960 वोटर हैं। इसमें से 4416 ने मतदान किया। यहां पांच प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। भाजपा के अजय ज्योतियाना चुनाव हार गए, लेकिन कांग्रेस के निर्मल कुमार ने जीत दर्ज की। ……… पढें ये खबर भी… अजमेर में 36 साल बाद BJP को झटका:80 में से 37 वार्ड में कांग्रेस, 32 पर भाजपा; 11 निर्दलीय बनेंगे 'किंगमेकर' अजमेर नगर निगम के चुनाव के नतीजों में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया है। 80 में से 37 वार्ड में कांग्रेस, 32 में भाजपा के प्रत्याशी जीते। जबकि निर्दलीय 11 सीटों पर जीते हैं। दोनों दलों को बहुमतनहीं मिला है। ऐसे में निर्दलीय किंगमेकर बनेंगे। रिजल्ट से भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। बीते 36 साल से यहां भाजपा का बोर्ड रहा है। अजमेर शहर से स्पीकर वासुदेव देवनानी और अनिता भदेल की प्रतिष्ठा दांव पर थी। इसके बावजूद इस बार कांग्रेस से पार्टी पिछड़ गई। पूरी खबर पढें अजमेर- कांग्रेस से रश्मि शर्मा-रश्मि हिंगोरानी मेयर पद की दावेदार:बीजेपी अनामिका और रंजना पर खेल सकती है दांव; अनारक्षित महिला के लिए रिजर्व है सीट अजमेर नगर निगम का 36 साल से भाजपा का बोर्ड बनाने का रिकॉर्ड इस बार टूट सकता है। नगर निगम चुनाव के रिजल्ट में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला और तय हो गया है कि निर्दलियों के भरोसे मेयर की कुर्सी मिलेगी। (पूरी खबर पढें)

इंद्र देव की धमाकेदार एंट्री ने सागवाड़ा की विधुत व्यवस्था को किया ढेर, सुबह तक रही बत्ती गुल

इंद्र देव का विकराल रुप  सागवाड़ा/ डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा नगरपालिका अंतर्गत रविवार की रात इंद्र देव ने कयामत बरसा दी। रुक रुक कर हुई धमाकेदार बरसात में आधी रात के बाद विधुत विभाग की कमर तोड़ दी। जबरजस्त कडाके और गगनभेदी धमाको के बीच आधी रात के बाद विधुत विभाग ने आखिर इंद्र देव के समक्ष घुटने टेक दिए। और बत्ती गुल हो गई जो सुबह तक बहाल नही हो सकी।  रात को हुए जबरदस्त धमाके शाम को शुरू हुई बरसात के बाद रुक रुक कर बरसात का दौर जारी रहा। बरसात के साथ तेज बिजली के गगनभेदी धमाको ने पुरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया। इस बीच घरों में बिजली के उपकरणों में भी नुकसान होने की खबर है। हालांकि बिजली विभाग ने इस आपदा का आधि रात तक डट कर मुकाबला किया लेकिन आधी रात के बाद घुटने टेकते हुए अपने हथियार डाल दिए जिससे सुबह तक पुरा सागवाड़ा अंधेरे में डुबा रहा।  पहली बार हुई जमकर बरसात हालांकि इस बार की ये पहली मुसलाधार बरसात है। इस बरसात से क्षेत्र में जल संकट पर मंडरा रहे खतरे को लेकर राहत भरी खबर है। नदी नालों में पानी की आवक की संभावना जताई गई है। फिलहाल तेज बरसात के बावजूद गर्मी और उमस में राहत नहीं मिली है अगले 24 घंटो में तेज गर्जन के साथ बरसात की मौसम विभाग ने चेतावनी दी है।  नगर पालिका चुनाव 2026 रिजल्ट लाइव

सागवाड़ा में झमाझम बारिश

सागवाड़ा में झमाझम बारिश, कड़कड़ाहट के साथ गरजे मेघ  सागवाड़ा में रविवार शाम करीब 6:30 बजे बाद मौसम ने अचानक करवट ली। तेज बारिश के साथ आसमान में बिजली चमकी और बादलों की जोरदार गड़गड़ाहट सुनाई दी। दिनभर उमस से परेशान लोगों ने बारिश के बाद राहत की सांस ली। तेज बरसात के बाद मौसम में ठंडक महसूस हुई।  बारिश की कमी से फसलों पर असर के बीच गणेश चतुर्थी से ठीक एक दिन पहले हुई झमाझम बारिश से किसानों को राहत की उम्मीद जगी है। वहीं नदी-नालों में पानी की आवक बढ़ने की संभावना है।  मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है।  सागवाड़ा | डूंगरपुर

पंचायती राज चुनाव को लेकर कांग्रेस ने कसी कमर

पंचायती राज चुनाव को लेकर कांग्रेस ने कसी कमर  डूंगरपुर जिले के 84 विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस कमेटी की बैठक आयोजित हुई। बैठक में पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा ने कार्यकर्ताओं के साथ पंचायती राज चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा की। बैठक में भगोरा ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में पिछले कार्यकाल में दो बार भारत आदिवासी पार्टी के विधायक रहे और वर्तमान में राज्य में भाजपा की सरकार है, लेकिन क्षेत्र में विकास के अपेक्षित कार्य नहीं हुए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव जनसंपर्क करने और कांग्रेस का हाथ मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को मजबूत करने से क्षेत्र के विकास को गति मिल सकेगी।  पंचायती राज चुनाव को लेकर कांग्रेस ने शुरू की तैयारियां।

श्रीगंगानगर जिले के 1306 पार्षदों के भाग्य का फैसला कल:11 निकायों में सुबह 8 बजे से मतगणना, 67 टेबल पर 73 राउंड में गिनेंगे वोट

श्रीगंगानगर जिले की 11 नगरीय निकायों में हुए चुनाव के बाद सोमवार को रिजल्ट आएगा। सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी। वार्ड सदस्य पदों के लिए वोटों की गिनती संबंधित नगरपालिका मुख्यालयों पर निर्धारित मतगणना केंद्रों में रिटर्निंग अधिकारियों की निगरानी में होगी। जिले में नगरीय निकाय चुनाव दो चरणों में हुए थे। पहले चरण में सूरतगढ़, रायसिंहनगर, अनूपगढ़, श्रीविजयनगर और घड़साना में 9 सितंबर को मतदान हुआ था। वहीं, दूसरे चरण में नगर परिषद श्रीगंगानगर सहित सादुलशहर, श्रीकरणपुर, केसरीसिंहपुर, पदमपुर और गजसिंहपुर में 11 सितंबर को मतदान हुआ। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव ने बताया- जिले में कुल 11 मतगणना केंद्र, 67 मतगणना टेबल और 73 राउंड प्रस्तावित किए गए हैं। 11 निकायों में 340 वार्ड, 1,306 प्रत्याशी जिले की 11 नगरीय निकायों में कुल 340 वार्ड हैं। इन वार्डों में कुल 1,306 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। सबसे ज्यादा प्रत्याशी श्रीगंगानगर में प्रत्याशियों की संख्या के लिहाज से नगर परिषद श्रीगंगानगर सबसे आगे है। यहां 65 वार्डों में 332 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इसके बाद सूरतगढ़ में 205, रायसिंहनगर में 130 और अनूपगढ़ में 128 प्रत्याशी हैं। वहीं, केसरीसिंहपुर में 48, गजसिंहपुर में 58, पदमपुर में 61, श्रीकरणपुर में 70, सादुलशहर में 87, श्रीविजयनगर में 90 और घड़साना में 97 प्रत्याशी हैं। निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार एक वार्ड की मतगणना पूरी होने के बाद ही दूसरे वार्ड की मतगणना शुरू की जाएगी। जिस वार्ड की मतगणना चल रही होगी, उसी वार्ड के प्रत्याशियों और उनके निर्वाचन अभिकर्ताओं को संबंधित मतगणना केंद्र में उपस्थित रहने की अनुमति होगी। स्ट्रॉन्ग रूम से मतगणना टेबल तक कड़ी सुरक्षा ईवीएम को स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा गया है। निर्धारित समय पर प्रक्रिया के अनुसार स्ट्रॉन्ग रूम खोले जाएंगे और ईवीएम को मतगणना टेबल तक पहुंचाया जाएगा। जिला प्रशासन की ओर से मतगणना केंद्रों पर आवश्यक सुरक्षा, बैठने, पार्किंग और यातायात की व्यवस्थाएं की गई हैं।

भीलवाड़ा में कल 8 बजे से शुरू होगी काउंटिंग:1203 प्रत्याशियों का सियासी भविष्य कल होगा तय

भीलवाड़ा नगर निगम सहित 10 निकायों के कुल 1203 प्रत्याशियों का सियासी भविष्य कल तय होगा। इनमे भीलवाड़ा नगर निगम के 70 वार्डों के लिए 277 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। सुबह 8 बजे से काउंटिंग शुरु होगी और एक-एक कर के चुनावी नतीजे सामने आते जाएंगे। 154 निर्दलीय प्रत्याशी बड़ी चुनौती भीलवाड़ा नगर निगम में भाजपा के 70 प्रत्याशी मैदान में है जबकि 17 सिंबल नहीं मिलने के चलते कांग्रेस के 53 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के लिए 154 निर्दलीय प्रत्याशी बड़ी चुनौती है।भीलवाड़ा नगर निगम में इस बार 63.8 प्रतिशत वोटिंग हुई है जो साल 2021 में हुई वोटिंग से 3.29% कम है। भाजपा के बड़े चेहरों की साख दांव पर निकाय चुनाव को लेकर सीएम भजन लाल भीलवाड़ा में रोड शो कर चुके हैं जबकि सांसद दामोदर अग्रवाल, निर्दलीय विधायक अशोक कोठारी, पूर्व विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी ओर भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा की साख यहां दांव पर है। भाजपा ने पहले चरण कि वोटिंग के बाद से ही प्रत्याशियों को बाड़ेबंदी में रखा है। कांग्रेस के नेताओं की दिलचस्पी कम इधर चुनावी मैदान में 17 प्रत्याशियों के बिना 53 वार्डों में उतरी कांग्रेस महज दिखावे के लिए ही चुनाव मैदान में है।17 वार्ड़ सीधे-सीधे गंवाने के बाद निगम में कांग्रेस का बोर्ड ओर महापौर बनना लगभग नामुमकिन सा है।इसके चलते कांग्रेस के किसी भी बड़े नेता की निकाय चुनाव में खास दिलचस्पी नहीं है। भाजपा-कांग्रेस और निर्दलीयों की तैयारियां जोरों पर सोमवार को होने वाली मतगणना के लिए भाजपा कांग्रेस और निर्दलीय सभी के प्रत्याशियों की तैयारियां जोरों पर है। सभी ने अपने-अपने काउंटिंग एजेंट नियुक्त किए हैं। मतगणना के दौरान ये पॉलिटेक्निक कॉलेज पहुंचेंगे और पार्टी और प्रत्याशी के एजेंट के रूप में कार्य करेंगे उनको मिलने वाले टोटल वोट, हार-जीत का अंतर सहित सभी जानकारियां जुटाएंगे। प्रशासन की ओर काउंटिंग परिसर में आने के लिए एंट्री कार्ड जारी किया है सुबह 7 बजे तक पार्षद एजेंट की एंट्री काउंटिंग परिसर में होगी। भाजपा से भावी महापौर पर सबकी नजर मतगणना के दौरान संभावित महापौर प्रत्याशियों के परिणाम पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी। वार्ड नंबर 35 से भाजपा प्रत्याशी खुशबू शुक्ला, वार्ड नंबर 59 से चंदा त्रिपाठी, वार्ड नंबर 60 से सुमन ओझा और वार्ड नंबर 61 से पूर्णिमा जैन के रिजल्ट पर सब की नजर रहेगी। कांग्रेस के इन चेहरों पर सबकी नजर उसके साथ ही कांग्रेस के वार्ड नंबर 6 से तीन बार के पार्षद जितेंद्र राजावत,वार्ड नंबर 26 से 4 बार की पार्षद मंजू पोखरना, वार्ड नंबर 31 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुई सोनम साबनानी, वार्ड नंबर 47 से तीन बार के पार्षद उस्मान पठान, वार्ड नंबर 52 से तीन बार की पार्षद समदु देवी खटीक और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष वार्ड नंबर 64 से धर्मेंद्र पारीक के चुनाव परिणाम पर सबके निगाहें रहेगी। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पॉलिटेक्निक कॉलेज में होने वाली मतगणना के लिए सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पॉलिटेक्निक कॉलेज के चारों और करीब 400 मीटर पहले से बेरिकेडिंग लगाई गई है। इन रास्तों पर आमजन के आने जाने पर पाबंदी रहेगी। कॉलेज आने वाले सभी रास्तों पर बैरिकेड्स और पुलिस पिकेट लगाकर नाकाबंदी की है बिना एंट्री कार्ड किसी भी व्यक्ति को अंदर एंट्री नहीं दी जाएगी। सुबह 8 बजे से मतगणना सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी और 9 बजे के बाद से लगभग लगभग वार्डों के रिजल्ट आना शुरू हो जाएंगे। सुबह 11 से 12 बजे के बीच तक लगभग सभी वार्डों के रिजल्ट घोषित हो जाएंगे।

जसोल धाम में भाद्रपद बीज पर उमड़े श्रद्धालु:राणीसा के जयकारों से गूंजा धाम, छप्पन भोग और कन्या पूजन भी हुए

जसोल के श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान में रविवार, 13 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल पक्ष द्वितीया (बीज) मनाई गई। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। सुबह मंगला आरती के साथ ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया, जो देर रात तक जारी रहा। पूरे जसोल धाम में राणीसा भटियाणीसा के जयकारे गूंजते रहे। मंदिर परिसर को फूलों से सजाया श्रद्धालुओं ने श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाई सिंह जी, श्री लाल बन्नासा, श्री खेतलाजी और श्री काला-गौरा भैरूजी के मंदिरों में दर्शन किए। उन्होंने अपने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और फूलों से सजाया गया था, जिससे दिनभर भक्ति का माहौल बना रहा। बीज के इस खास मौके पर रायपुर (छत्तीसगढ़) की रहने वाली बासु जोशी, जो देव कुमार जोशी की पत्नी हैं, ने छप्पन भोग चढ़ाया। उनके परिवार ने पूरे विधि-विधान से छप्पन भोग अर्पित किया और सभी मंदिरों में विशेष भोग भी चढ़ाया गया। कन्या पूजन कर महाप्रसादी खिलाई लाभार्थी परिवार ने सभी समाज की कन्याओं का विधिवत पूजन किया। कन्याओं को भोजनशाला में महाप्रसादी खिलाई गई और उन्हें फल, प्रसाद व दक्षिणा भेंट की गई। परिवार ने कन्याओं का आशीर्वाद भी लिया। शाम तक श्री राणीसा भटियाणीसा के दरबार में विशेष रूप से सजाया गया छप्पन भोग दर्शन के लिए रखा रहा, जिसका लाभ हजारों श्रद्धालुओं ने उठाया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए संस्थान की ओर से दर्शन, सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गईं। सुव्यवस्थित रेलिंग एवं कतार व्यवस्था, प्रसाद अर्पण की व्यवस्था, प्रसाद सामग्री सुरक्षित रखने के लिए टोकन प्रणाली, मिस्टिंग सिस्टम, व्हीलचेयर एक्सेस, गोल्फ कार्ट सुविधा, सीसीटीवी मॉनिटरिंग तथा पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से व्यवस्थाओं पर सतत निगरानी रखी गई। श्रद्धालुओं के लिए विश्राम, पेयजल, भोजन प्रसादी एवं पार्किंग की भी समुचित व्यवस्था रही। संस्थान द्वारा विकसित रिवर फ्रंट पार्किंग क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं की गईं, जिससे वाहनों की आवाजाही एवं पार्किंग व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में सहायता मिली। संस्थान द्वारा विकसित सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं की श्रद्धालुओं ने सराहना करते हुए इन्हें दर्शन व्यवस्था को अधिक सुगम, सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाने वाला बताया। प्रतिपदा और बीज पर सजे भक्ति के जागरण भाद्रपद शुक्ल पक्ष प्रतिपदा की पूर्व संध्या पर संस्थान परिसर में विशेष रात्रि जागरण का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय दामामियों एवं भजनियों ने पारंपरिक एवं भक्तिमय प्रस्तुतियां दीं। वहीं, बीज के अवसर पर भी विशेष रात्रि जागरण हुआ, जिसमें स्थानीय भजनियों ने सुमधुर वाणी में भजनों की प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। पर्व को लेकर संस्थान परिसर को आकर्षक बिजली रोशनी से सजाया गया तथा समस्त मंदिरों में विशेष पुष्प सज्जा की गई। भक्ति संगीत, जयकारों, छप्पन भोग एवं दर्शन के बीच संपूर्ण जसोल धाम दिनभर आध्यात्मिक एवं भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। “श्रद्धालुओं की सेवा, सुरक्षा और सुविधा ही संस्थान की प्राथमिकता” इस अवसर पर संस्थान के प्रवक्ता कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि संस्थान सदैव श्रद्धालुओं की सेवा, सुरक्षा एवं सुविधा के प्रति समर्पित है। संस्थान का निरंतर प्रयास है कि देशभर से जसोल धाम आने वाले हर श्रद्धालु को सुगम दर्शन के साथ स्वच्छ, सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं सुविधाजनक वातावरण मिले। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु जसोल धाम से आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा एवं सुखद अनुभूति लेकर जाएं तथा श्री राणीसा भटियाणीसा की कृपा से उनकी मंगलकामनाएं पूर्ण हों। इसी भावना के साथ संस्थान श्रद्धालुओं की सुविधाओं, दर्शन व्यवस्थाओं एवं आधारभूत संरचना को निरंतर और अधिक सुदृढ़ एवं बेहतर बनाने की दिशा में कार्यरत है। देखें PHOTOS