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अपने ही वार्ड में सीटें नहीं बचा पाए भाजपा नेता:पूर्व सभापति के वार्ड में बागी ने हराया; पूर्व MLA, भाजपा जिलाध्यक्ष के इलाके में भी हारी पार्टी

पाली को बीजेपी का गढ़ माना जाता है, लेकिन निकाय चुनाव में पार्टी के बड़े नेताओं के अपने ही वार्डों में भाजपा प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा। पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख, भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और पूर्व सभापति महेंद्र बोहरा से जुड़े वार्डों में पार्टी प्रत्याशी जीत दर्ज नहीं कर सके। कहीं कांग्रेस ने कांटे के मुकाबले में बाजी मारी तो कहीं भाजपा के बागी निर्दलीय प्रत्याशियों ने पार्टी का गणित बिगाड़ दिया। इन नतीजों ने बीजेपी को मंथन करने पर मजबूर कर दिया है। पूर्व सभापति के वार्ड में भाजपा को बागी ने हराया वार्ड 26 में भाजपा ने शिवजी प्रजापत को मैदान में उतारा था। उन पर बाहरी प्रत्याशी का टैग लगा। भाजपा नेता और पूर्व सभापति महेंद्र बोहरा उनके साथ लगे रहे, लेकिन वार्डवासियों ने भाजपा के पूर्व पार्षद की अगुवाई में सभी की सर्वसम्मति से भाजपा से बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतरीं कुसुम सोनी को समर्थन दिया। नतीजे में कुसुम सोनी ने भाजपा प्रत्याशी शिवजी प्रजापत को 117 वोटों से हरा दिया। कुसुम सोनी को 1113 और शिवजी प्रजापत को 996 वोट मिले। वहीं, 35 वार्डवासियों ने नोटा का बटन दबाया। जिलाध्यक्ष के वार्ड में 12 वोटों से हारी भाजपा वार्ड 39 में भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी रहते हैं। इसके बावजूद वे भाजपा प्रत्याशी पीयूष शर्मा को जीत नहीं दिला सके। यहां कांग्रेस की अनामिका सोलंकी ने कड़े मुकाबले में पीयूष शर्मा को महज 12 वोटों से हरा दिया। निर्दलीय राजेंद्र जांगिड़ को 199 वोट मिले, जबकि 28 लोगों ने नोटा का बटन दबाया। निर्दलीय प्रत्याशी ने इस वार्ड में भाजपा की जीत का समीकरण बिगाड़ने का काम किया। पूर्व विधायक के वार्ड में भाजपा प्रत्याशी को मिले सिर्फ 177 वोट वार्ड 40 आदर्श नगर में पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख रहते हैं। यहां भाजपा प्रत्याशी नवरतन कंवर को महज 177 वोट मिले। भाजपा से बागी होकर पूर्व पार्षद किशोर सोमनानी ने अपनी पत्नी पुष्पा सोमनानी को निर्दलीय मैदान में उतारा था। पुष्पा सोमनानी ने भाजपा प्रत्याशी को 826 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया। प्रदेशाध्यक्ष के वार्ड में भी कांग्रेस ने दर्ज की जीत भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ वर्तमान में पाली शहर के वार्ड 23 में रहते हैं। प्रदेश के साथ पाली जिले में भी भाजपा को जिताने की उनकी जिम्मेदारी थी। लेकिन उनके वार्ड क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी खुशबू लोढ़ा को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस प्रत्याशी शीला ने खुशबू लोढ़ा को 106 वोटों से हरा दिया। भाजपा प्रत्याशी खुशबू लोढ़ा महापौर के संभावित दावेदारों में शामिल थीं। बड़े नेताओं के अपने ही वार्डों में पार्टी प्रत्याशियों की हार ने बीजेपी के सामने आत्ममंथन की स्थिति पैदा कर दी है। पाली में 17 साल बाद कांग्रेस बनाएंगी बोर्ड पाली नगर निगम में कांग्रेस का 17 साल का वनवास खत्म करते हुए बोर्ड बनाने जा रही है। 65 वार्डों में कांग्रेस ने 29, भाजपा ने 21 और निर्दलीय 15 सीटों पर जीत दर्ज की है। बोर्ड बनाने के लिए 33 सीटों की आवश्यकता है। ऐसे में कांग्रेस के प्रबल चांस है। महापौर के लिए महिला सीट आरक्षित है। कांग्रेस की ओर से महापौर की दौड़ में राजबाला-प्रदीप हिंगड़, सुमित्रा जैन और अनामिका सोलंकी प्रबल दावेदार माने जा रहे है। वही भाजपा को जोड़-तोड़ कर भी लेती है तो उन्हें 12 निर्दलीयों का साथ चाहिए जो संभव कम लगता है।

कहीं जीत का जश्न, कहीं बोल गया 'मोरिया':बाड़ेबंदी में 'गणेशजी की आरती'; मंत्रीजी की थाली में 'रोटी की कमी'

नमस्कार, निकाय चुनाव का रिजल्ट आ गया। कहीं पुराने किले ढह गए, कहीं निर्दलीयों ने परचम लहराया। जो जीता वो सिकंदर बन गया, बाकी का ‘मोरिया’ बोल गया। बोर्ड बनाने के लिए बाड़ेबंदी का पैंतरा जारी है। कोटा में मंत्रीजी को अन्नपूर्णा रसोई में जली रोटी मिल गई तो बाड़मेर में दिग्गज नेता ने 100 रुपए बांटे। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. कहीं जीत का जोश, कहीं बोला ‘मोरिया’ अकाल सिर्फ बारिश न आने के कारण ही नहीं आता, वोट न मिलने से भी आता है। अजमेर में 36 साल से भाजपा का बोर्ड था। कांग्रेस के खाते में वोटों का अकाल था। इस बार सूखा खत्म हो गया। बड़े-बड़े दिग्गज भी धराशायी हो गए। मेयर मनने के सपने देखने वाली मैडम खुद हार गईं। कांग्रेस रेस में आगे निकल गई। हालांकि बहुमत किसी पार्टी को नहीं मिला। ऐसे में अब निर्दलीय प्रत्याशियों की दसों अंगुलियां घी में हैं और सिर… डीडवाना-कुचामन की परबतसर नगर पालिका में तो गजब ही हो गया। यहां वार्ड नंबर-13 से भाजपा प्रत्याशी कैलाश चंद चुनावी मैदान में थे। जब रिजल्ट आया तो पता चला कि कैलाश जी को सिर्फ एक वोट मिला है। वह भी उन्होंने खुद को दिया होगा। बाकी घरवालों ने भी वोट नहीं दिया। यही हाल नागौर की रियांबड़ी नगर पालिका में कांग्रेस के मजीद मोहम्मद का हुआ। वे वार्ड 15 से मैदान में थे। उन्हें भी सिर्फ खुदका वोट मिला। चुनाव में जो जीत गए, उनका जश्न शुरू हो गया। गुलाल उड़ाई गई। ढोल-ताशे बजे। घर-घर धोक लगाने की रस्म शुरू हो गई। सीकर में जीतने वालों ने हारने वालों को चिढ़ा दिया। इस पर बात बढ़ गई। एक तो पहले ही मोरिया बोल गया। ऊपर से चिढ़ाना। ऐसा झगड़ा फसाद हुआ कि पुलिस पहुंची और डंडे से सुंताई करने लगी। हिदायत दी कि झुंड बनाकर जश्न मानने की दरकार नहीं। इधर श्रीगंगानगर में नगर परिषद का रिजल्ट आया। वार्ड 54 से भाजपा के अमरजीत गिल जीत गए। जैसे ही जीत की खबर मिली। गिल का बेटा गले लगकर रोने लगा। लगता है बेटे ने भी खूब पसीना बहाया था। पिताजी ने भी प्यार से गले लगाया, पुच्ची दी और बोले- अब सारी गंदगी साफ कर देंगे। नागौर और डीडवाना में तो कांग्रेस-बीजेपी के बीच सबसे कम वोट पाने का कॉम्पिटिशन हो गया। नागौर की रियांबड़ी नगर पालिका के वार्ड 15 से कांग्रेस के प्रत्याशी मजीद मोहम्मद को सिर्फ 1 वोट मिला। वहीं डीडवाना-कुचामन की परबतसर में वार्ड 13 में बीजेपी के कैलाश चंद को भी 1 ही वोट मिला। 2. जो हारे वो बाड़ाबंदी से बाहर कैसे-कैसे सपने लेकर प्रत्याशी बाड़ाबंदी में गए थे। रिजल्ट आया तो कइयों के दिल के अरमां आंसुओं में बह गए। गए तो थे 10 दिन की पैकिंग करके। लेकिन दो ही दिन की मौज काटकर लौट आए। हारने वालों का बाड़ाबंदी में क्या काम? अलवर के 65 वार्डों के कांग्रेस प्रत्याशी बाड़ेबंदी में जयपुर के एक रिसोर्ट में जुटे। तीज पर महिलाओं ने गणेशजी की आरती उतारी। पुरुष प्रत्याशी क्रिकेट का शौक पूरा करते रहे। जब उसने मौज-मस्ती के बारे में पूछा तो बोले- बीजेपी वाले तो पूल पार्टी कर रहे हैं। गानों पर नाच रहे हैं। हम तो फिर भी देवताओं की आरती कर रहे हैं। बोर्ड बनाने को लेकर बीजेपी वाले ज्यादा संजीदा रहे। चर्चा रही कि वे अपनों को लेकर बस से उत्तराखंड निकल गए। अलवर में कांग्रेस की बाड़ाबंदी में पुलिस घुस गई। बोली कि एक प्रत्याशी के किडनैप होने की सूचना मिली है। सारे प्रत्याशी मिलकर पुलिस से भिड़ गए। प्रत्याशी चिल्लाकर बोला- मैं अपनी मर्जी से आया हूं। उधर, बांसवाड़ा से कुंभलगढ़ पहुंचीं महिला प्रत्याशियों ने तीज पर एक दूसरे को मेहंदी लगाई। लॉन में बैठकर शिवलिंग बनाया। फिर ओम नम: शिवाय का जाप किया। 3. मंत्रीजी को जली हुई रोटी दे दी कुछ दिन पहले भरतपुर में एक गरीब उपभोक्ता को राशन डीलर से सड़े हुए गेहूं दे दिए थे। उपभोक्ता ने बड़ी दीनता से कहा था- क्या करें साहब, लेने पड़ेंगे, गरीब आदमी हैं। हालांकि वीडियो शेयर होने के बाद डीलरशिप जाने के डर से डीलर ने गेहूं चेंज कर दिए। लेकिन वीडियो नहीं आता तो गरीब को वही गेहूं खाने पड़ते। कभी-कभी गरीब की हाय लग जाती है। कोटा में पंचायतीराज मंत्रीजी अन्नपूर्णा रसोई का निरीक्षण औचक ढंग से करने पहुंच गए। उनके साथ दो-तीन अफसरनुमा लोग और थे। भोजन करने बैठ गए। मंत्रीजी और अन्य लोगों को जली हुई रोटियां परोस दी गईं। मंत्रीजी ने शिकायत की तो वहां परोसगारी कर रहा व्यक्ति भड़क कर बोला- मैं यहां काम थोड़े करता हूं। चावल मांगे तो पता चला कि चावल भी खत्म। मंत्रीजी सब्जी की तरी से भूख मिटाने लगे। अन्य लोग तरी में से आलू तलाशने लगे। किसी तरह निरीक्षण का काम निपटाकर जिम्मेदारों को निर्देश देते हुए निकल गए। 4. चलते-चलते… अब चलते-चलते बात सीमावर्ती जिले बाड़मेर की। यहां बरसों-बरस शिव विधानसभा सीट पर कांग्रेस के सीनियर नेता अमीन खान साहब का कब्जा रहा। उन्होंने इस सीट से 10 बार चुनाव लड़ा और 5 बार विधायक बने। चुनावी सीजन में अमीन खान भी पार्टी के लिए खूब घूमे। हालांकि वे संत-फकीर किस्म के प्राणी हैं। जो जंचती है कह जाते हैं, कर जाते हैं। यही कारण है कि पार्टी ने कुछ वक्ते के लिए उन्हें निकाल भी दिया था। अमीन खान जी का एक वीडियो सामने आया है। बताया जा रहा है कि वे शिव विधानसभा के दौरे पर थे। इस दौरान एक कार्यकर्ता टकरा गया। कार्यकर्ता के साथ दो बच्चियां। उन्हें देख साहब ने कुर्ते के ऊपर की जेब से 100 रुपए निकाले। एक बच्ची की तरफ बढ़ाकर बोले- अभी तो ये सौ रुपए दे रहा हूं। दोनों 50-50 बांट लेना। अकेली तू मत रख लेना। घटना का वीडियो संभवत: कार के ड्राइवर ने बनाया। वीडियो को कुछ लोगों ने नेताजी की दरियादिली कहा और कुछ ने चुनावी दरियादिली। इनपुट सहयोग- शक्ति सिंह (कोटा), धर्मेंद्र सिंह, साजिद खान (अलवर), संजय पटेल (बांसवाड़ा), सुरेंद्र माथुर (सीकर), सुनील जैन, भरत मूलचंदानी (अजमेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार सुबह 7 बजे मुलाकात होगाी।

BJP प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के गढ़ में कैसे हारी पार्टी:गुटबाजी-बागियों ने बिगाड़ा खेल; कांग्रेस ने आखिरी समय किया डैमेज कंट्रोल

नगर निकाय चुनाव में भाजपा को प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले में ही हार झेलनी पड़ी। पाली नगर निगम चुनाव में कांग्रेस की 6 प्रत्याशियों के नामांकन खारिज होने और एक प्रत्याशी के भाजपा को समर्थन देने से खूब किरकिरी हुई थी। लेकिन बावजूद इसके कांग्रेस ने जबरदस्त वापसी करते हुए 29 वार्डों में जीत दर्ज की। वहीं, 65 में से भाजपा के महज 21 प्रत्याशी ही जीत पाए। यहां 15 निर्दलीय प्रत्याशियों ने बाजी मारी है। इनमें से 9 अल्पसंख्यक (मुस्लिम) वर्ग से है, जो कांग्रेस विचारधारा के माने जाते हैं। यानी पाली मे कांग्रेस का बोर्ड बनना लगभग तय माना जा रहा है। आखिर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के गढ़ में कांग्रेस कैसे जीत गई? पढ़िए इस रिपोर्ट में.. भाजपा की हार 3 बड़े फैक्टर 1 . जिलाध्यक्ष भंडारी और पूर्व विधायक पारख गुट में बंटी पार्टी पाली शहर में नगर निगम के वार्ड नंबर 40 में शामिल आदर्श नगर इलाके में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ पुश्तैनी मकान है। इसी आदर्श नगर में पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख का भी मकान है। हालांकि मदन राठौड़ पिछले कुछ सालों से टैगोर नगर इलाके में सर्किट हाउस के सामने नए बंगले में रहते हैं। राठौड़ और पारख के बीच सियासी दूरियां जग जाहिर हैं। वहीं, राठौड़ के करीबी भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी और पारख के बीच भी पटरी नहीं बैठती। यही वजह रही कि जिन नेताओं को चुनाव जिताने की जिम्मेदारी थी, वही नेता दो गुटों में बंट गए। पूर्व विधायक पारख के कई करीबियों के टिकट कट गए। दस साल पहले पारख के वार्ड-40 से सुनील भंडारी को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया था, लेकिन पारख ने अपने खास समर्थक किशोर सोमनानी को निर्दलीय चुनाव जितवा दिया। इस बार भी सोमनानी को भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो उन्होंने अपनी पत्नी पुष्पा को निर्दलीय चुनाव लड़ाया और जीत दिलाई। भंडारी और पारख अपने-अपने करीबियों को टिकट दिलाए। पार्टी के कार्यकर्ता भी नेताओं की गुटबाजी में फंसे रहे और खुलकर प्रचार नहीं कर पाए। 2. बागियों ने बिगाड़ा भाजपा का गणित, छह में से चार जीत गए भाजपा के 6 प्रत्याशी बागी हो गए। पूर्व सभापति कुसुम सोनी, पूर्व पार्षद किशोर सोमनानी की पत्नी, कांतिलाल वैष्णव, पूर्व पार्षद जय जसवानी, निर्मल जोशी, महेंद्र वैष्णव ने टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ा। इन नेताओं ने भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी कर भाजपा का गणित बिगाड़ दिया। बागियों में पूर्व सभापति कुसुम सोनी, किशोर सोमनानी की पत्नी पुष्पा और कांतिलाल वैष्णव और निर्मल जोशी निर्दलीय चुनाव जीत गए। वहीं दो सीटों पर बागी महेंद्र वैष्णव और जय जसवानी भले ही चुनाव हार गए लेकिन भाजपा प्रत्याशियों को भी यहां वोटबैंक में सेंधमारी के चलते हार का सामना करना पड़ा। 3. फैक्ट्रियां बंद और सीएम के दौरे को कांग्रेस ने भुनाया पाली शहर की लाइफ लाइन माने जाने वाली कपड़ा इंडस्ट्रीज चार माह से बंद है। मजदूर पलायन कर चुके हैं और कई व्यापारियों ने अपनी फैक्ट्रियां गुजरात शिफ्ट कर दी। फैक्ट्रियां बंद होने से करीब 50 हजार मजदूर बेरोजगार हो गए। इसका असर पाली के लोकल मार्केट पर भी पड़ा। इससे व्यापारी और मजदूरों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि सरकार के स्तर पर फैक्ट्रियां शुरू करने के लिए कोई सकारात्मक प्रयास नहीं हुए। मतदान से दो दिन पहले सीएम भजनलाल शर्मा ने प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ समेत अन्य नेताओं के साथ पाली में रोड शो किया। इस दौरान लोगों ने शहर की फैक्ट्रियां शुरू करने का शोर मचाया। इस मुद्दे को कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर खूब भुनाया। इससे भाजपा के खिलाफ और कांग्रेस के पक्ष में बज क्रिएट हुआ। अब पढ़िए कांग्रेस की जीत के 4 बड़े फैक्टर 1 . चुनाव प्रबंधन में हारी, लेकिन वोटिंग से पहले वापसी कांग्रेस के टिकट बंटवारे के दौरान कांग्रेस को खूब किरकिरी झेलनी पड़ी थी, क्योंकि 6 प्रत्याशियों के नामांकन खारिज हो गए। लेकिन समय रहते कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिशुपालसिंह और विधायक भीमराज भाटी डैमेज कंट्रोल में लग गए। भाजपा के निलंबित पूर्व चेयरमैन रेखा भाटी और उनके पति राकेश भाटी को कांग्रेस में शामिल किया। कांग्रेस ने राकेश भाटी का इस्तेमाल भाजपा की रणनीति का तोड़ निकालने में किया। भाटी हर वार्ड की गणित और भाजपा नेताओं के बीच चल रही गुटबाजी को जानते थे। इधर, पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ ने जिन 6 वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों के नामांकन खारिज हुए, वहां निर्दलीयों को साधते हुए पार्टी के पक्ष में किया और चुनाव प्रचार की रणनीति संभाली। ऐसा पहली बार हुआ कि कांग्रेस ने सभी गुटों को साध लिया। पाली के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि एक साथ मिलकर चुनाव लड़ा। विधायक और जिलाध्यक्ष के साथ पूर्व सभापति की प्लानिंग काफी काम आई। 2. अल्पसंख्यक वोटरों की एकजुटता ने कांग्रेस को संजीवनी दी पाली शहर में अब तक के इतिहास में अल्पसंख्यक (मुस्लिम) वर्ग से 9 निर्दलीय उम्मीदवार पहली बार जीते हैं। 9 में से 3 उम्मीदवार कांग्रेस के टिकट पर जीते हैं। यानी कुल 65 वार्डों में से अब 12 उम्मीदवार मुस्लिम समुदाय से हैं। विश्लेषकों की मानें तो इस बार अल्पसंख्यक वर्ग ने वोटों का बंटवारा होने नहीं दिया। केवल जिताऊ उम्मीदवार पर ही दांव खेला। भाजपा ने मुस्लिम समुदाय से 3 प्रत्याशियों को टिकट दिया था, लेकिन उनमें एक भी जीत दर्ज नहीं कर पाया। इस एकतरफा वोटिंग ने कांग्रेस के लिए संजीवनी के रूप में काम किया। भाजपा 12 वार्डों में कहीं भी बढ़ नहीं बना पाई। वार्ड नंबर 11 में कांग्रेस ने लीला देवी चौधरी को टिकट दिया, जो नगर निगम में महापौर प्रत्याशी मानी जाती थी। इस वार्ड में भाजपा ने सुमित्रा मेवाड़ा को टिकट दिया। वार्ड में अल्पसंख्यक वर्ग से शबनम खिलजी को उतारा और उसे ही जीता दिया। वार्ड 17 में कांग्रेस-भाजपा ने हिन्दू वर्ग से उम्मीदवार उतारे तो निर्दलीय सुलेमान को जीता दिया। ऐसा ही वार्ड 12 में हुआ, जहां निर्दलीय असलम जीत गए। अब इन 9 निर्दलीय उम्मीदवारों से ही कांग्रेस की बोर्ड बनाने की राह आसान होगी। 3. सभी गुटों को साधा टिकट बंटवारे में कांग्रेस ने जितने वाले कैंडिडेंट को टिकट दिया। साथ ही कुछ एजडस्ट टिकट भी दिए। कांग्रेस की महिला जिलाध्यक्ष नीलम बिड़ला तक को मैदान में उतारा गया, लेकिन वो हार गई। वरिष्ठ कांग्रेसी जब्बरसिंह राजपुरोहित के भाई गजेंद्र सिंह को टिकट दिया गया, लेकिन वो भी चुनाव नहीं जीत पाए। इस तरह से कांग्रेस ने सात ऐसे टिकट दिए, जिसमें जीत की संभावना कम थी, लेकिन कई गुटों को साध लिया। …. निकाय चुनाव की ये खबरें भी पढ़िए… 1. रिजल्ट में ‘काकाजी’ की एंट्री का असर:जनता ने भाजपा-कांग्रेस को डराकर जिताया; 140+ निकायों में निर्दलीय खोलेंगे सत्ता का ताला राजस्थान के निकाय चुनाव के नतीजों का एक वाक्य में विश्लेषण करें तो भाजपा जीती है, लेकिन कांग्रेस भी बुरी तरह से नहीं हारी है। निकाय चुनाव में ‘काकाजी’ की एंट्री का असर भी दिख रहा है। वैसे चुनाव संख्या के हिसाब से भाजपा 309 निकायों में से 163 में जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर आगे है। कांग्रेस 103 पर है, लेकिन ये आंकड़े अधूरी सच्चाई हैं। (पूरी खबर पढ़ें) 2. पूर्व सीएम गहलोत और केंद्रीय मंत्री शेखावत अपने वार्ड हारे:पायलट के क्षेत्र में जीती कांग्रेस; राजस्थान निकाय चुनाव में पहली बार ‘आप’ का बोर्ड 3. राजस्थान- 10 में से 4 नगर निगमों में निर्दलीय किंगमेकर:पाली-अजमेर के रिजल्ट ने चौंकाया; बीकानेर में कांग्रेस, भीलवाड़ा-उदयपुर में भाजपा बनाएगी मेयर

राजस्थान में आज 20 जिलों में बारिश का अलर्ट:जैसलमेर में पारा 40 डिग्री के ऊपर, उदयपुर संभाग में कई जगह भारी बरसात

मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर ने राज्य में 17 सितंबर तक बारिश का अलर्ट जारी किया है। आज भी 20 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। उदयपुर संभाग में 13 सितंबर की रात से 14 सितंबर की शाम 6 बजे तक भारी बारिश हुई। डूंगरपुर, बांसवाड़ा में 4 इंच से ज्यादा पानी बरसा। बंगाल की खाड़ी से आया लो-प्रेशर सिस्टम जो दक्षिणी राजस्थान और उससे लगते गुजरात, मध्य-प्रदेश पर एक्टिव है। इससे इन इलाकों में भारी बारिश हुई। इस​ सिस्टम का सबसे ज्यादा असर उदयपुर, कोटा संभाग के एरिया में रहा। प्रदेश में बारिश की स्थिति मानसून के बड़े अपडेट्स 3 इंच तक बारिश: पिछले 24 घंटे में झालावाड़ के रायपुर में 75MM तक पानी बरसा। डूंगरपुर, बांसवाड़ा, राजसमंद जिले में भी 21MM बारिश दर्ज हुई। इनके अलावा सोमवार को सिरोही, प्रतापगढ़, जालौर, बारां, जयपुर, जोधपुर, पाली, अजमेर के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हुई। इससे पहले 13 सितंबर की रात से 14 सितंबर की सुबह बांसवाड़ा के लुहाड़ियां और डूंगरपुर के सागवाड़ा 109-109MM बरसात दर्ज हुई थी। राजस्थान में कहां एक्टिव है मानसून: मौसम विशेषज्ञों ने बताया- मानसून ट्रफ अब दक्षिण की तरफ शिफ्ट हो गई और ये गुजरात के नलिया से निकलकर लो-प्रेशर सिस्टम से होकर राजगढ़, दमोह, पेन्ड्रा रोड, राउरकेला, दीघा होते हुए बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। लो-प्रेशर सिस्टम अभी गुजरात और दक्षिणी राजस्थान की सीमा के आसपास एक्टिव है। अरब सागर से लगातार नमी मिलने से राज्य में अगले दो दिन और बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। पश्चिमी राजस्थान में तेज गर्मी: इस साल पश्चिमी राजस्थान में मानसून कमजोर रहा है। इस एरिया के ज्यादातर जिलों में सूखे जैसे हालात हैं। बारिश कम होने से इन जिलों में सितंबर का दूसरा सप्ताह बीतने के बाद भी तापमान 40 डिग्री के करीब है। सोमवार से सबसे ज्यादा तापमान जैसलमेर में रिकॉर्ड हुआ। आगे कैसा रहेगा मौसम

अहम-वहम से टूटा भाजपा का तिलिस्म:गुटबाजी और सवर्ण वोट बैंक की नाराजगी से हुई हार

जानिए भाजपा की हार की 5 प्रमुख वजह नगर निगम चुनाव के नतीजे भारतीय जनता पार्टी के लिए किसी बड़े राजनीतिक झटके से कम नहीं रहे। पार्टी को यहां करारी हार मिली। इस हार के पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर उपजा ‘अहं’ और ‘वहम’ था जिसने संगठन को अंदर से खोखला कर दिया। टिकट वितरण से लेकर प्रशासनिक मशीनरी की मनमानी तक, कई ऐसी भूलें रहीं जिनका परिणाम वही हुआ जिसकी आशंका पहले ही जताई जा रही थी। स्थिति यह थी कि टिकट वितरण के समय न तो किसी विधायक, न सांसद और न ही प्रभारी और न संगठन ने किसी की सुध ली। प्रभारियों ने प्रदेश नेतृत्व को पूरी तरह अंधेरे में रखा, क्योंकि वे खुद यहां नेताओं की तरह गुटबाजी और अपने चहेतों को उपकृत करने में उलझे रहे। नतीजा यह हुआ कि प्रदेश नेतृत्व तक सही फीडबैक पहुंच ही नहीं पाया। 1: सरकार के खिलाफ एंटी-इन्कम्बेंसी और प्रशासनिक मनमानी : पिछले पांच सालों में शहर में टूटी सड़कें, बजबजाती नालियां, ओवरफ्लो सीवरेज और जनसुनवाई के बजाय अधिकारियों का आम जनता व पार्षदों से टकराव सबसे बड़े चर्चा के विषय रहे। सरकार को तीन साल हो चुके हैं। वार्डों के कोई नए टेंडर नहीं लगे इसका जवाब वोट की चोट से ही दिया। 2: जिताऊ चेहरों की अनदेखी और अपनों को टिकट देने की जिद : दावा किया गया कि केवल जिताऊ उम्मीदवारों को टिकट मिलेगा। लेकिन वितरण में नेताओं की मनमर्जी चली और सिर्फ अपनों को तवज्जो दी गई। नामांकन के अंतिम दिन महावीर रांका का टिकट काटकर वैश्य वर्ग को निराश कर दिया गया। करीब 16 सामान्य सीटों पर ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को उतार दिया गया, जिससे पारंपरिक सामान्य (सवर्ण) वर्ग बुरी तरह बिदक गया। 3: यूजीसी रोल बैक और सवर्ण वोट बैंक की नाराजगी : चुनावी माहौल में ‘यूजीसी रोल बैक’ का मुद्दा एक बड़ा नासूर बन गया। मुख्यमंत्री के रोड-शो तक में इस नारे के गूंजने के बावजूद भाजपा नेताओं ने शुतुरमुर्ग की तरह रेत में गर्दन छुपा ली और मान बैठे कि सब ठीक है। लेकिन वे यह भूल गए कि जनता सब याद रखती है। सवर्ण वोट बैंक भाजपा का सबसे मजबूत और पारंपरिक कोर वोटर माना जाता है, लेकिन यूजीसी के मुद्दे पर उपजी नाराजगी सीधे जमीन तक पहुंच गई थी। शहर के कई वार्डों में इसके विरोध में बैनर तक लग गए। करणी सेना और अन्य संगठनों के सक्रिय होने से भाजपा का यह मूल मतदाता छिटक गया। 4: कमजोर संगठन और प्रभारियों की गुटबाजी : पार्टी के महामंत्री, उपाध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे पदाधिकारी खुद टिकट लेकर चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे थे। ऐसी स्थिति में संगठन चुनाव क्या संचालित करता, सारे उम्मीदवार अपने दम पर लड़ने को मजबूर थे। पार्टी के बड़े और प्रमुख नेता भी सिर्फ उन्हीं इलाकों में प्रचार के लिए गए जहां उनकी जीत पहले से ही पक्की (श्योर) मानी जा रही थी। 5: नए मतदाता और जेन-जी फैक्टर की अनदेखी : करीब 20 हजार से अधिक नए युवा मतदाताओं के आवेदन के बाद वोटर आईडी कार्ड तो बन गए लेकिन उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में जुड़ नहीं पाया। जेन-जी से जुड़े मुद्दों, यूजीसी रोल बैक और अन्य स्थानीय मुद्दों को लेकर उच्च वर्ग के साथ-साथ ओबीसी वर्ग के युवा भी भाजपा से दूर होते चले गए। इन तमाम अंदरूनी और बाहरी कारणों ने मिलकर भाजपा के विजय रथ को रोक दिया।

नानी बाई का मायरा कथा का शुभारंभ

शहर के रणुजा धाम के पीछे स्थित आईनाथ गोशाला में मंगलवार से पांच दिवसीय संगीतमय धार्मिक कथा नानी बाई का मायरा का आयोजन किया जाएगा।संस्थापक करनाराम प्रजापत ने बताया कि इस पांच दिवसीय कथा में कथावाचक रेवत महाराज की ओर से कथा का वाचन किया जाएगा। वहीं गायक शंकर विश्नोई की ओर से भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी।महाराज नानी बाई के मायरे से जुड़े भक्तिमय एवं प्रेरक प्रसंगों का सजीव वर्णन करेंगे। कथा दोपहर 1 बजे से सायं 4 बजे तक चलेगी।

भाजपा-कांग्रेस 3-3 में जीती, 1 में निर्दलीय किंग मेकर

नगर निकाय चुनावों के परिणाम घोषित हो गए। जिले का जनमत फिफ्टी-फिफ्टी वाला रहा। कुल 7 नगर निकायों में से भाजपा व कांग्रेस को 3-3 निकाय में स्पष्ट बहुमत मिला। रावतभाटा में 7 निर्दलीय निर्णायक भूमिका में है। वहां कुल 40 में से भाजपा ने 17 व कांग्रेस ने 16 वार्ड जीते। जादुई अंक से दोनों क्रमश: 4 व 5 सीटें दूर है। पहली बार नगर पालिका बनी आकोला कांग्रेस की झोली में गई। कुल 20 में से उसने 12 वार्ड जीते। भाजपा 7 ही जीत सकी। एक निर्दलीय जीता। बाकी 6 निकायों मे से गत चुनाव में 5 में कांग्रेस और 1 में भाजपा का बोर्ड बना था। इस बार में इनमें से 2 में कांग्रेस और 3 में भाजपा का बहुमत आया। रावतभाटा में कांग्रेस से एक सीट ज्यादा होने के साथ सत्ता व विधायक के प्रभाव से भाजपा 4 निर्दलीयों को साथ लेकर बोर्ड बना पाई तो अब जिले में भाजपा के 4 और कांग्रेस के 3 बोर्ड रह जाएंगे। इनमें सिर्फ बड़ीसादड़ी ही ऐसा निकाय है, जहां कोई पार्टी यानी कांग्रेस अपना बोर्ड बचाने में सफल रही। वर्ना भाजपा अपना एकमात्र बोर्ड कपासन तो कांग्रेस चित्तौड़गढ़, बेगूं, निंबाहेड़ा, बड़ीसादड़ी व रावतभाटा गंवाने की स्थिति में है। कांग्रेस नई नपा आकोला व भाजपा से कपासन छीनकर बराबरी पर आ पाई। यदि इन दोनों व बड़ीसादड़ी के साथ 5 निर्दलीय जुटाकर रावतभाटा में भी बोर्ड बना सकी तो जिले में भाजपा पर बढ़त कायम रख पाएगी। भाजपा ने 28 वार्ड ज्यादा जीते, 4 निकाय में आगे रही, सत्ता फैक्टर पर कांग्रेस से पीछे इस बार कुल 7 निकायों के 250 वार्ड थे। भाजपा 4 निकाय में कांग्रेस से आगे रही और कुल 130 यानी 52 प्रतिशत वार्ड जीते। कांग्रेस ने 3 निकाय में आगे रहते हुए 102 यानी 41 प्रतिशत वार्ड जीते। इस तरह वो भाजपा से पीछे रही पर सत्ता के साथ निकाय वाले ट्रेंड से देखे तो उसका प्रदर्शन बेहतर है। पिछली बार कांग्रेस सरकार में हुए चुनावों में कुल 6 निकाय के 220 वार्ड थे। कांग्रेस ने इनमें से 130 वार्ड यानी 59 प्रतिशत सीटें जीती और 5 में साफ बहुमत के साथ बोर्ड बनाया था। तब विपक्षी दल भाजपा को 81 यानी 37 प्रतिशत वार्ड ही मिले। पिछले व इस चुनाव का एक बड़ा अंतर निर्दलीयों का अपेक्षाकृत असरदार प्रदर्शन भी है। गत बार 6 निकायों में 9 निर्दलीय ही जीत पाए थे। इस बार 7 निकायों में 18 निर्दलीय जीतकर आए। रावतभाटा में तो 40 में से 7 निर्दलीयों ने दोनों पार्टियों का गणित बिगाड़ कर रख दिया। चित्तौड़गढ़ में गत बार एक भी निर्दलीय नहीं था, वहां इस बार 4 जीते। बेगूं में भी गत बार से एक ज्यादा जीता। कपासन में गत बार की तरह 2 व आकोला में भी एक निर्दलीय जीता। सिर्फ बड़ीसादड़ी में ही कोई निर्दलीय नहीं जीत सका। आकोला आकोला | नवगठित आकोला नगरपालिका के 20 वार्डों के चुनाव परिणाम में कांग्रेस ने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए 12 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि भाजपा के खाते में मात्र 7 सीटें आई। वार्ड 13 में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रही। आकोला निकाय में यह चुनाव विधायक अर्जुनलाल जीनगर एवं कांग्रेस के पूर्व प्रधान भगवतीलाल हिंगड़ के नेतृत्व में लड़ा गया। इन दोनों ही नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर थी, इसमें हिंगड़ प्रतिष्ठा बचाने में कामयाब रहे। निर्वाचन अधिकारी बृजेन्द्र मीणा ने मतगणना के बाद परिणामों की आधिकारिक घोषणा की। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी की और मिठाई बांटकर जीत का जश्न मनाया। महज 3 वोटों से जीते प्रकाश चंद्र: सबसे करीबी मुकाबला वार्ड नंबर सात में रहा। जहां कांग्रेस के प्रकाश चन्द्र ने भाजपा के पिंटू छीपा को महज 3 वोटों से हराया। प्रकाश चन्द्र को 206 और पिंटू छिपा को 203, वार्ड 10 में कांग्रेस के पप्पू लालभील ने 392 वोट हासिल कर भाजपा के पवन कुमार को 266 वोटों से हराया। वार्ड 13 में निर्दलीय उमा तेली ने 153 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। बेगूं बेगूं | नगर की नई सरकार चुनने के लिए जनता ने इस बार भाजपा को प्रचंड बहुमत दिया है। सोमवार को घोषित 30 वार्डों के नतीजों में 30 में भाजपा ने 19 सीटें जीती। जबकि कांग्रेस 8 पर ही जीत पाई है। तीन वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं। पांच वार्डों में भाजपा प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध चुन लिए जाने से अब भाजपा के पास कुल 24 सीटें हो चुकी। इस कारण भाजपा का बोर्ड बनना तय है। स्वामी विवेकानंद माडल स्कूल में मतगणना हुई। ईवीएम से 30 वार्डों की मतगणना मात्र सवा घंटे में पूरी हो गई। रिटनिंग अधिकारी एसडीएम अंकित सामरिया ने रिजल्ट घोषित किए। तहसीलदार गोपाल जीनगर, थानाधिकारी चंपाराम मय ज़ाब्ता मौजूद रहे । भाजपा की शानदार जीत पर नगर में ढोल नगाड़ों के साथ आतिशबाज़ी कर मिठाई बाटी। भाजपा में जीत का जोश है तो कांग्रेस में करारी हार की मायूसी। विधायक डॉ सुरेश धाकड़ ने नपा चुनाव में पूरी ताक़त झोंक दी थी। अब उनके नेतृत्व में भाजपा बोर्ड बनाने में जुटी है । जबकि कांग्रेस आपसी गुटबाजी और खींचतान में फंसी रही। कांग्रेस में नेतृत्व का अभाव रहा। 3 निर्दलीय जीते : वार्ड 5 से निर्दलीय दुर्गा बाई 152 वोटों से, 12 से सलीम अंसारी 46 वाटों से और वार्ड 13 से निर्दलीय प्रत्याशी रुखसार बानो 409 वोटों से जीती है । कपासन कपासन | नगर पालिका में इस बार कांग्रेस ने 25 में से 13 सीट हासिल कर भाजपा को लगातार तीसरी बार बोर्ड बनाने से रोक दिया। वहीं साल 2000 के बाद कांग्रेस का पूर्ण बहुमत वाला बोर्ड बनेगा। इधर चुनाव के नतीजे भी काफी एक रोचक रहे। कुछ वार्डो में काफी निकट का मामला रहा, वार्ड 4 में भाजपा की प्रत्याक्षी सुनीता भदादा मात्र एक वोट से विजयी घोषित हुई। उनके सामने कांग्रेस की अनीता नंदवाना थी। यह वार्ड भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष राज विजयवर्गीय का था ओर उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। वार्ड 23 में कांग्रेस की शांता बारेगामा ने भाजपा की पुष्पा बारेगामा पर मात्र 2 मतों से विजयी प्राप्त की। यह वार्ड माली समाज बाहुल्य है। सूरज माली प्रकरण वाला सूरज माली भी इसी वार्ड का निवासी है। शांता के पति भेरू बारेगामा की प्रकरण में सूरज का साथ देने में अहम भूमिका रही थी। इसी प्रकार वार्ड 20 में कांग्रेस की अनीता शर्मा ने भाजपा की पिंकी सुथार पर मात्र 5 मतो से जीत हासिल की। वार्ड 14 में भी मामला काफी नजदीकी रहा।जिसमें भाजपा के अभिनव दुग्गड मात्र 7 मत से विजयी हुए।उनके सामने कांग्रेस के महावीर चंडालिया थे। दोनों जैन समाज से है व मामला काफी रोचक था। निंबाहेड़ा निम्बाहेड़ा | नगर निकाय चुनाव के चुनाव परिणाम आने से पहले ही ऐसा लग रहा था जैसे दोनों ही दलों को परिणामों का पूर्वाभास था । अगर परिषद चुनावों में भाजपा को 27 , कांग्रेस को 17 तो एक सीट निर्दलीय को मिली।सभी वार्डों के कुल वोट या वोट प्रतिशत में दोनों ही प्रमुख दलों में सीटों के अनुपात में अंतर नहीं दिखा । भाजपा को कुल 21852 तो कांग्रेस को 21786 मत मिले दोनों के वोटो में मात्र 66 वोट का अंतर ही रहा।सबसे अधिक जीत का अंतर भी सबसे बड़े वार्ड 24 नंबर में 1155 मति का रहा।वही सबसे कम वोट अंतर 7 वोट से वार्ड 35 की प्रत्याशी जीती।वही भाजपा के 5 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में सभी हारे। कांग्रेस के 7 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में थे वे सभी जीते। ग्रामीण क्षेत्र जो परिसीमन में नए जुड़े उनमें 6 में से 4 में भाजपा जीती। परिसीमन भाजपा की विजय का मुख्य कारण माना जा रहा है।क्योंकि पिछले चुनाव कांग्रेस ने परिसीमन में परिवर्तन कर जीता।ऐसा सोच कर भाजपा ने परिसीमन में सुधार किया और वह सफल भी रही। बड़ीसादड़ी बड़ीसादड़ी | नगरपालिका चुनाव-2026 के घोषित परिणाम में 25 वार्डों में कांग्रेस ने 13 सीटों पर जीत दर्ज कर लगातार दूसरी बार नगरपालिका में बहुमत बरकरार रखा है पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 14 वार्ड जीतकर बोर्ड बनाया था। इस बार कांग्रेस को 2 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं भाजपा को 12 सीटों पर संतोष करना पड़ा। ुपरिणामों की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि कई अनुभवी और चर्चित चेहरों को जनता ने इस बार नकार दिया, जबकि नए और युवा प्रत्याशियों ने अपनी जीत से राजनीतिक समीकरण बदल दिए। वार्ड-1 में भाजपा के मोहन सिंह मीणा ने कांग्रेस के गोपाल सिंह मीणा को महज 4 वोट से हराकर सबसे करीबी मुकाबला जीता। वार्ड-2 में भाजपा के युवा प्रत्याशी भारत लाल व्यास ने पूर्व कांग्रेस पार्षद भोपाल सिंह मोगरा को शिकस्त दी।् वार्ड-6 में पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष विनोद कंठालिया ने जीत दर्ज की। वार्ड-7 में भाजपा के पूर्व पार्षद धर्मेंद्र सिंह को नगर कांग्रेस अध्यक्ष रणजीत सिंह झाला ने हराकर कांग्रेस के खाते में सीट डाली। वार्ड-11 का परिणाम खासा चर्चित रहा। यहां आजादी के बाद पहली बार भाजपा की अनीता रेगर ने जीत का परचम फहराया। कांग्रेस के पूर्व प्रधान हिंगड़ ने साबित की नेतृत्व क्षमता चित्तौड़गढ़. प्रत्याशियों की जीत पर कलेक्ट्रेट पर जश्न मनाते हुए समर्थक व कार्यकर्ता। विश्लेषण भास्कर जनमत 50-50 भाजपा को मिला कांग्रेस की आपसी खींचतान और गुटबाजी का फायदा भाजपा का लगातार तीसरी बार बोर्ड बनाने का सपना टूटा भाजपा को 27वार्डों के साथ पिछले चुनाव से 11 सीटों पर मिली बढ़त, कांग्रेस को 11 सीटों का नुकसान भी कांग्रेस का बहुमत बरकरार, भाजपा को झटका मंत्री दक और विधायक जीनगर को करारा झटका अभी जिले के पांचों विधायक सत्तासीन भाजपा से हैं। जिले से एकमात्र मंत्री गौतम दक व कपासन विधायक अर्जुन जीनगर को करारा झटका लगा। दक बड़ीसादड़ी में कांग्रेस का दोबारा बहुमत नहीं रोक पाए। जीनगर की विस में दोनों निकायों में कांग्रेस बहुमत लाने मंें सफल रही। पूर्व मंत्री विधायक श्रीचंद कृपलानी के निंबाहेड़ा मेंं भाजपा ने 60% वार्ड जीते। नप बनने के बाद पहला सभापति बनेगा पर उनके क्षेत्र की एक अन्य विस छोटीसादड़ी में पार्टी 13 से आगे नहीं बढ़ी। चित्तौड़गढ़ में विधायक चंद्रभानसिंह आक्या जिले के सबसे बड़े निकाय में 60 में से 33 सीटें जीतकर बहुमत लाने में सफल रहे।

पूर्व मंत्री मदन कौर की आदमकद प्रतिमा का अनावरण, उनके विकास कार्यों को याद किया

शहर के वीर तेजाजी जाट समाज छात्रावास में पूर्व मंत्री एवं पश्चिमी राजस्थान में शिक्षा की प्रतिमूर्ति मदन कौर की 91वीं जयंती पर उनकी आदमकद प्रतिमा का अनावरण समारोह एवं रक्तदान शिविर आयोजित हुआ। कार्यक्रम में वक्ताओं ने मदन कौर के शिक्षा, महिला सशक्तिकरण व जनसेवा के क्षेत्र में योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया। बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने कहा कि शिक्षा ही मानव विकास की सबसे बड़ी पूंजी है। मदन कौर ने पश्चिमी राजस्थान में शिक्षा के प्रसार के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि मदन कौर का जीवन महिला सशक्तिकरण एवं शैक्षणिक सुधार के लिए समर्पित रहा। पचपदरा विधायक डॉ. अरुण अमराराम चौधरी ने कहा कि मदन कौर का जीवन पश्चिमी राजस्थान के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके आदर्शों व विचारों को नई पीढ़ी को अपने जीवन में अपनाने की आवश्यकता है। पूर्व विधायक मदन प्रजापत ने सार्वजनिक जीवन में मदन कौर के योगदान को अभूतपूर्व बताया, जबकि पूर्व विधायक पदमाराम मेघवाल ने उनकी आदर्श जीवनशैली को विशिष्ट पहचान बताया। शिविर में युवाओं एवं समाजबंधुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए 1100 यूनिट रक्तदान किया। आयोजन में रक्तदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए रक्तदान को मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया। समारोह में पूर्व प्रधान लक्ष्मणराम डेलू, उपाध्यक्ष पुरखाराम बांगड़वा, बायतु प्रधान सिमरथाराम बेनीवाल, योग विशेषज्ञ डॉ. भंवरलाल आर्य, पाटौदी प्रधान ममता प्रजापत, रशीदा बानो, गरिमा राजपुरोहित, टीकूराम लेगा, प्रमिला चौधरी, खेराजराम लेगा, डॉ. हरदानराम लॉयल, प्रहलादराम धतरवाल, भंवरलाल बेनीवाल, दौलतराम गोदारा, घेवरराम मेघवाल, मेवाराम मेहता, रोशन अली, पारसमल भंडारी, नकतसिंह कालेवा, डॉ. गणपत मंडा, खींयाराम चौधरी, बाबूलाल सऊ, खेराजराम हुड्डा, मेहराराम कालीराणा, डॉ. प्रभु आर. चौधरी, गिरधारीलाल मुंडन, गंगाराम जानी, किशोर डूडी, राजेंद्र बेनीवाल, मगाराम पूनिया, लिखमाराम सांई, लाधाराम गोदारा, पदमाराम बेरड, ठाकराराम खोथ सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

परमात्मा पार्श्वनाथ ने नाग-नागिन को बनाया धरणेंद्र पद्मावती: मनोज्ञसूरीश्वर

कुशल कल्पतरू वर्षावास की व्याख्यान माला के तहत पर्युषण पर्व के सातवें दिन खरतरगच्छाचार्य जिन मनोज्ञ सूरीश्वर महाराज ने कल्पसूत्र वांचना में भगवान पार्श्वनाथ का जीवन चरित्र सुनाया। उन्होंने बताया कि कमठ का प्रभु से 10 भवों तक वैर रहा। पार्श्व कुमार ने कमठ के पंचाग्नि तप से नाग-नागिन के जोड़े को मुक्त कराया, जो धरणेंद्र व पद्मावती देव बने। जब कमठ के जीव मेघमाली देव ने प्रभु के ध्यान में प्राणांत उपसर्ग किया, तब धरणेंद्र-पद्मावती ने फणछत्र बनाकर रक्षा की। वह स्थान आज अहिछत्र पार्श्वनाथ तीर्थ कहलाता है। आचार्य ने कहा कि अरिष्टनेमि परमात्मा ने विवाह मंडप में पशुओं की करुण पुकार सुनकर वैराग्य धारण किया। गिरनार पर उनके तीन कल्याणक संपन्न हुए। वहीं प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के 13 भवों का विवेचन करते हुए बताया कि उन्होंने असि, मसि और कृषि का ज्ञान दिया। एक भूल से प्रभु को 400 दिन गोचरी नहीं मिली, फिर श्रेयांस कुमार ने अक्षय तृतीया को इक्षु रस से पारणा कराया। उनकी माता मरु देवी हाथी पर समवशरण जाते हुए केवलज्ञान पाकर मोक्ष जाने वाली प्रथम जीव बनीं। चक्रवर्ती भरत से संग्राम के बीच बाहुबली को वैराग्य हुआ और बहनों की प्रेरणा से अहंकार त्यागते ही उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ। प्रवक्ता पवन कोठारी ने बताया कि ट्रस्ट अध्यक्ष दानमल डूंगरवाल, चातुर्मास संयोजक मदनलाल छाजेड़ एवं उपधान तप लाभार्थी पिस्ता देवी ताराचंद छाजेड़ परिवार इंद्रोई जोधपुर की उपस्थिति में आगामी उपधान तप को लेकर अहम बैठक हुई। इसमें सभी ट्रस्टियों, समिति सदस्यों एवं सहयोगियों ने भाग लेकर व्यवस्थाओं की रूपरेखा बनाई।

ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिता का शुभारंभ

हमीरवास के पीएमश्री शहीद हरिसिंह राउमावि में प्राथमिक स्कूल के छात्र-छात्राओं की ब्लॉक स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का शुभारंभ सोमवार को हुआ। प्रशासक गीना देवी ने प्रतियोगिता का उदघाटन किया। एसीबीईओ सुनील श्योराण, प्रतियोगिता पर्यवेक्षक जयप्रकाश बुगालिया, प्राचार्य संदीप पूनिया नीमा ने विचार व्यक्त किए। आयोजक प्राचार्य राजपाल ओला ने सभी खेल प्रभारियों व निर्णायकों से प्रतियोगिता निष्पक्ष व पारदर्शिता से कराने का आह्वान किया। प्रतियोगिता में करीब 150 खिलाड़ियों ने भाग लिया। आयोजन में सरोज भांभू, अनीता लांबा, जयवीर सिंह, रमेश पूनिया, संजीव, अशोक, रामनिवास व्याख्याता, देवेंद्र पूनिया, संतोष आदि सहयोग कर रहे है। संचालन प्रेमप्रकाश पूनिया व रज्जाक खान ने किया।

बाबा श्याम के शीश को नगर भ्रमण कराया, झांकियां सजाईं

नागवाण नोहरे में श्याम अखंड ज्योत पाठ समिति चूरू व अखिल भारतीय श्याम अखंड ज्योत पाठ समिति की ओर से मंगलवार को श्याम अखंड ज्योत पाठ का आयोजन किया जाएगा। समिति के पवन जालान ने बताया कि श्याम पाठ के रचयिता गुरु श्रीचंद्र शर्मा की प्रथम पुण्यतिथि पर दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में कोलकाता के संजय मित्तल अपनी मधुर वाणी से पाठ का वाचन करेंगे। कार्यक्रम के तहत सोमवार को धोली शक्ति दादी मंदिर से श्याम शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए कार्यक्रम स्थल नागवाण नोहरे में पहुंची। शोभायात्रा में श्याम भक्त 111 निशानों के साथ पहुंचे। इस दौरान हाथी-घोड़ा, पालकी, ऊंट, रथ सहित विभिन्न प्रकार की झांकियां आकर्षण का केंद्र रही। शोभायात्रा जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। इत्र वर्षा भी की गई तथा बाबा के शीश को नगर भ्रमण भी करवाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

‘पंजे’ को उलटा किया ‘कमल’ ने

निकाय चुनाव को लेकर सोमवार को मतगणना हुई। जिले में कांग्रेस को झटका लगा है। जिले के 11 निकायों में से 2 जगह सुजानगढ़ व तारानगर में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला है। वहीं 5 निकाय चूरू, सुजानगढ़, तारानगर, सरदारशहर, रतनगढ़, बीदासर और छापर में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। यहां बोर्ड बनाने के लिए भाजपा को निर्दलीयों का सहारा लेना पड़ेगा। दूसरी तरफ कांग्रेस केवल 3 निकायों राजगढ़, रतननगर और साहवा में ही बढ़त बना पाई है। राजलदेसर में मुकाबला सबसे दिलचस्प हो गया है। यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों को 14-14 सीटें मिली हैं। यहां 5 निर्दलीय और आरएलपी के 2 प्रत्याशी बोर्ड बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। जिले में पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 10 निकायों में से 7 जगह बोर्ड बनाए थे। इनमें से कांग्रेस सिर्फ राजगढ़ में बढ़त बना पाई है। वहीं रतननगर में भाजपा अपना बोर्ड नहीं बचा पाई, यहां कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है। नई बनी पालिका साहवा में भी कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है। चूरू में भाजपा ने 30 सीटें जीती हैं, यहां बहुमत के लिए सिर्फ 1 सीट की जरूरत है। रतनगढ़ में भाजपा ने 21 सीट जीती, यहां बहुमत के लिए 3 सीटों की जरूरत है। सरदारशहर में 25 सीट जीती हैं, यहां भी बहुमत के लिए 3 सीट चाहिए। कांग्रेस की हार की 3 बड़ी वजह 1. टिकट वितरण में मनमानी : जीतने वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर गलत टिकट बांटे गए। 2. लीड का ओवरकॉन्फिडेंस : विधानसभा में मिली 17 हजार की लीड के भरोसे रहे, कोर वोट बैंक को साधने की रणनीति फेल हुई। 3. स्थानीय मुद्दों से दूरी : पिछले दो साल से सफाई, पानी निकासी जैसे मुद्दों पर विपक्ष के रूप में जनता के बीच आक्रामक आंदोलन नहीं किया। भाजपा की जीत के 3 बड़े कारण 1. मुस्लिम बेल्ट में प्रयोग : मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में पार्टी सिंबल के बजाय समर्थित उम्मीदवार उतारे, जो कारगर रहा। 2. डेमेज कंट्रोल : सभापति पद के कई दावेदार होने के बावजूद गुटबाजी को हावी नहीं होने दिया। 3. सत्ता से कड़ी जोड़ने का रुझान : प्रदेश में भाजपा सरकार होने का फायदा मिला, जनता ने विकास के नाम पर वोट दिया। सुजानगढ़; परिसीमन का भी भाजपा को लाभ हुआ सुजानगढ़ | निकाय चुनाव के नतीजों में भाजपा की जीत और कांग्रेस की हार के पीछे कई स्थानीय और राजनीतिक कारण सामने आए हैं। सभापति की सीट ओबीसी होने का भी भाजपा को फायदा मिला। राजनीतिक जानकारों के अनुसार सामान्य सीट होने पर नेताओं की आपसी खींचतान और गुटबाजी ज्यादा खुलकर सामने आ सकती थी। लॉटरी से पहले भी कई नेताओं में मनमुटाव थे। नए परिसीमन का लाभ भी भाजपा को मिला। कांग्रेस के खिलाफ 10 साल से बोर्ड में रहने की एंटी इनकंबेंसी सबसे बड़ा कारण रही। शहर में जलभराव को लेकर लोगों में नाराजगी थी। 36 वार्डों में ही प्रत्याशी उतारे, जिससे कई जगह पार्टी का चुनावी माहौल कमजोर रहा। टिकट वितरण में कार्यकर्ताओं में असंतोष रहा। नए परिसीमन से पुराने राजनीतिक समीकरण बदले और कई वार्डों में जीत-हार के समीकरण उलट गए। समर्थकों में खुशी {जिले के 7 निकायों में भाजपा को बढ़त; पिछली बार कांग्रेस था ये स्कोर{सुजानगढ़-तारानगर में भाजपा को स्पष्ट बहुमत, चूरू में 30 सीट{रतननगर-साहवा में कांग्रेस को मिला बहुमत, राजगढ़ में बढ़त फोटो चूरू का विस चुनाव में 17 हजार की लीड भी काम न आई, भाजपा ने कांग्रेस से छीनी सत्ता : चूरू नगर परिषद में मतदाताओं ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर भरोसा जताया है। भाजपा ने पिछले चुनाव के मुकाबले 13 सीटों की छलांग लगाते हुए 30 वार्डों पर कब्जा जमाया। वहीं कांग्रेस को 12 सीटों का नुकसान हुआ, वह 24 सीटों पर सिमट गई। 6 वार्डों में निर्दलीय जीते हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को चूरू शहर से 17 हजार से अधिक वोटों की लीड मिली थी, लेकिन निकाय चुनाव में पार्टी इस बढ़त को बरकरार रखने में नाकाम रही।

पॉलिटिकल सेंसेक्स; राठौड़ व महर्षि का कद बढ़ा, बुडानिया-गोदारा और मेघवाल की साख को झटका

1. चूरू विधानसभा (चूरू व रतननगर) इनकी साख दांव पर थी : पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, भाजपा विधायक हरलाल सहारण और कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष रफीक मंडेलिया। {चूरू में भाजपा का बोर्ड बनना तय है, जिससे राठौड़ व सहारण का दबदबा मजबूत हुआ। वहीं मंडेलिया की साख को झटका लगा है, हालांकि रतननगर में कांग्रेस का बोर्ड बनना तय होने से राहत मिली है। 2. रतनगढ़ विस (रतनगढ़, छापर, राजलदेसर) इनकी साख दांव पर थी : कांग्रेस विधायक पूसाराम गोदारा और भाजपा के पूर्व विधायक अभिनेष महर्षि। {महर्षि का कद बढ़ा है; रतनगढ़ व छापर में भाजपा बोर्ड बनाने की ओर है। राजलदेसर में मुकाबला 14-14 पर टाई है। गोदारा की साख को झटका लगा है। 3. सुजानगढ़ विस (सुजानगढ़ व बीदासर) इनकी साख दांव पर थी : कांग्रेस जिलाध्यक्ष व विधायक मनोज मेघवाल, भाजपा के पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल व बीदासर पूर्व प्रधान संतोष मेघवाल। {सुजानगढ़ व बीदासर में भाजपा का बोर्ड तय है। मनोज अपने ही गढ़ में पार्टी को जीत दिलाने में नाकाम रहे। 4. तारानगर विस (तारानगर व साहवा) इनकी साख दांव पर थी : कांग्रेस विधायक नरेंद्र बुडानिया और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़। {तारानगर में भाजपा का बोर्ड बनना तय होने से राठौड़ का पलड़ा भारी रहा व बुडानिया को झटका लगा। हालांकि साहवा में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत है। 5. सादुलपुर विस (राजगढ़) इनकी साख दांव पर थी: कांग्रेस सांसद राहुल कस्वां, पूर्व विधायक डॉ. कृष्णा पूनिया और भाजपा नेता देवेंद्र झाझड़िया, सुमित्रा पूनिया {राजगढ़ नगर पालिका में कांग्रेस का बोर्ड बनना तय है। यहां कांग्रेस ने अपना पिछला बोर्ड बरकरार रखा, जिससे कस्वां और पूनिया का सियासी वर्चस्व कायम रहा। 6. सरदारशहर विस (सरदारशहर) इनकी साख दांव पर थी : कांग्रेस विधायक पं. अनिल शर्मा और भाजपा के पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा। {सरदारशहर में भाजपा को बढ़त है। विधायक अनिल शर्मा अपने क्षेत्र में पार्टी का बोर्ड नहीं बचा सके।

वित्तीय साक्षरता व हिंदी दिवस कार्यक्रम आयोजित

सिद्धमुख के शंकुतला देवी राजकीय कॉलेज में वित्तीय साक्षरता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई। बबीता पूनिया ने विद्यार्थियों को बचत, निवेश, उपभोग, महंगाई तथा वित्तीय निर्णयों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने साइबर क्राइम और ऑनलाइन वित्तीय फ्रॉड से बचने के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को सतर्क रहने का संदेश दिया। इसी क्रम में हिंदी दिवस पर कॉलेज में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार व उसके महत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्राचार्य शीशराम ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए हिंदी भाषा के महत्व, उसकी समृद्ध साहित्यिक व सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में हिंदी के अधिकाधिक एवं अधिकारिक प्रयोग के लिए प्रेरित किया।

बादलवाई से राहत, 37 डिग्री रहा पारा, अगले 4-5 दिन मौसम रहेगा शुष्क

जिले के अधिकांश क्षेत्रों में सोमवार को सुबह से शाम तक मौसम शुष्क रहा। सुबह से ही हल्के बादलों की आवाजाही रही, जो शाम तक बनी रही। दोपहर में तेज धूप के बीच धूप-छांव का मौसम बना रहा। इस दौरान हवा चलने से लोगों को गर्मी से राहत मिलती रही। सोमवार को अधिकतम तापमान 0.5 डिग्री की बढ़ोतरी के साथ 37.0 व न्यूनतम तापमान 0.2 डिग्री की गिरावट के साथ 26.4 डिग्री दर्ज किया गया। इससे पूर्व रविवार को अधिकतम तापमान 36.5 व न्यूनतम तापमान 26.6 डिग्री रहा था। जयपुर मौसम केंद्र निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि जिले के अधिकांश क्षेत्रों में आगामी चार-पांच दिन मौसम मुख्तया: शुष्क रहने की संभावना है। इस दौरान धूप-छांव का मौसम बना रहेगा तथा कहीं-कहीं बादलवाई के साथ हल्की बारिश हो सकती है।